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वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट की हुई डील, जानें कंज्यूमर और सेलर पर कैसे होगा असर

अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट और भारतीय कंपनी फ्लिपकार्ट के बीच दुनिया की सबसे बड़ी ई- कॉमर्स डील पर बुधवार को मुहर लग गई।

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नई दिल्‍ली. अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट और भारतीय कंपनी फ्लिपकार्ट के बीच दुनिया की सबसे बड़ी ई- कॉमर्स डील पर बुधवार को मुहर लग गई। इस डील के साथ ही वॉलमार्ट 5 अरब डॉलर के भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट में अब अमेजन को चुनौती देने वाली कंपनी बन गई है। भारतीय मार्केट में इन दोनों अमेरिकी कंपनियों के बीच टक्‍कर का सीधा फायदा कस्‍टमर्स को मिलने की उम्‍मीद है। 

 

 कंज्यूमर को ऐसे मिलेगा फायदा 

दरअसल, फ्लिपकार्ट के अधिग्रहण के बाद अब भारतीय मार्केट में अमेरिका की 2 बड़ी कंपनी वालमार्ट और अमेजन के बीच टक्‍कर है। दोनों अमेरिकी कंपनियां अब एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगेंगे। दोनों कंपनियां भारतीय मार्केट में कस्‍टमर्स को लुभाने के लिए हर दिन नए हथकंडे अपनाएंगी। इसके लिए डिस्‍काउंट और ऑफर्स लांच किए जाएंगे और जाहिर है कि दोनों कंपनियों के बीच की इस होड़ का फायदा भारतीय कस्‍टमर्स को मिलेगा। 

 

ग्रेहाउंड रि‍सर्च के सीईओ संचि‍त गोगि‍या का कहना है कि वॉलमार्ट अमेरि‍का और दूसरे देशों में अमेजन को टक्‍कर देने का रास्‍ता ढूंढ रही है।  फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट के साथ आने से भारत में किराना स्‍टोर की अहमियत और बढ़ेगी। बेहतर स्‍टॉक और प्रोडक्‍ट्स की डिलीवरी के लिए किराना स्‍टोर्स के मौजूदा नेटवर्क और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का ही इस्‍तेमाल किया जाएगा। 

 

सेलर्स को वालमार्ट से है डर 

भारतीय ट्रेडर्स का कहना है कि वालमार्ट भले ही देश में ऑनलाइन मार्केट के जरिए एंट्री कर रही है लेकिन आगे चलकर वह ऑफलाइन बाजार में आएगी ही आएगी। कन्‍फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेेलवाल का कहना है कि ऐसी कंपनियां दुनिया में से कहीं से भी सामान लाएंगी और देश को डंपिंग ग्राउंड बना देंगी। भारतीय रिटेलर्स के लिए लेवल प्‍लेइंग फील्‍ड बराबर का नहीं रहेगा और वे कॉम्पिटीशन में पिछड़ जाएंगे। उनका बिजनेस बर्बाद हो जाएगा। उनका कहना है कि देश में इस वक्‍त लगभग 7 करोड़ रिटेलर्स हैं, जिनमें से लगभग 3 करोड़ रिटेलर्स को इस डील से सीधे तौर पर नुकसान होने वाला है। 
 
5-6 लाख नौकरियों पर खतरा 
खंडेलवाल का कहना है कि भारत के ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सेगमेंट के रिटेलर्स को मिलाकर कुल 40 लाख करोड़ रुपए सालाना का रिटेल कारोबार होता है और कम से कम 20 लाख करोड़ के बिजनेस को इससे नुकसान होने वाला है। जहां तक जॉब लॉस की बात है तो रिटेलर्स कां धंधा गिरने से वे लोगों को निकालेंगे ही, इससे 5-6 लाख लोगों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। 
 

 

ये है इंडि‍यन ऑनलाइन मार्केट की ताकत

कोटक इंस्‍टीट्यूशनल इक्‍वि‍टी की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, भारतीय ऑनलाइन मार्केट 2019-20 तक 28 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। अगले चार साल तक इसकी सालाना ग्रोथ रेट 45 फीसदी रह सकती है। मॉर्गन स्‍टैनली के मुताबि‍क, मौजूदा समय में इंडि‍यन ई-कॉमर्स मार्केट 15 अरब डॉलर का है।

 

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