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Walmart-Flipkart डील के खिलाफ ट्रेडर्स ने दिल्ली HC में दायर की याचिका, ED से की जांच की मांग

Walmart-Flikpkart डील के खिलाफ ट्रेडर्स एसोसिएशन ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है।

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नई दिल्ली। Walmart-Flikpkart डील के खिलाफ ट्रेडर्स एसोसिएशन ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। उन्होंने याचिका में इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) को फ्लिपकार्ट की एक्विटिज की जांच करने के लिए भी कहा है। फ्लि‍पकार्ट और अमेरि‍का की कंपनी वॉलमार्ट की डील को कंपीटि‍शन कमीशन ऑफ इंडि‍या (CCI) ने मंजूरी दे दी है। ऐसे में, वालमार्ट की ओर से 16 अरब डॉलर में फ्लि‍पकार्ट में 77 फीसदी हि‍स्‍सेदारी लेने का रास्‍ता साफ हो गया है। डील को मंजूरी मि‍लने के बाद कारोबारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कोर्ट जाने का फैसला कर लिया था।

 

ट्रेडर्स एसोसिएशन ने दायर की याचिका

 

 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को बताया कि ट्रेडर्स ने डील के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। अपील में इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट को फ्लिपकार्ट की एक्विटिज की जांच करने के लिए भी कहा है।

 

आखिर ट्रेडर्स क्यों कर रहे हैं विरोध

 

भारतीय ट्रेडर्स का कहना है कि वॉलमार्ट भले ही देश में ऑनलाइन मार्केट के जरिए एंट्री कर रही है लेकिन आगे चलकर वह ऑफलाइन बाजार में आएगी ही आएगी। प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि ऐसी कंपनियां दुनिया में से कहीं से भी सामान लाएंगी और देश को डंपिंग ग्राउंड बना देंगी। भारतीय रिटेलर्स के लिए लेवल प्‍लेइंग फील्‍ड बराबर का नहीं रहेगा और वे कॉम्पिटीशन में पिछड़ जाएंगे। उनका बिजनेस बर्बाद हो जाएगा। उनका कहना है कि देश में इस वक्‍त लगभग 7 करोड़ रिटेलर्स हैं, जिनमें से लगभग 3 करोड़ रिटेलर्स को इस डील से सीधे तौर पर नुकसान होने वाला है।

 

क्‍या है वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील?

 

अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट भारत की ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट में 75 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीदी है। फ्लिपकार्ट के बोर्ड ने इस डील को मंजूरी भी दे दी है। इस सौदे की कीमत करीब 1 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबि‍क, वॉलमार्ट के साथ गूगल-पेरेंट कंपनी अल्‍फाबेट इंक भी इस इन्‍वेस्‍टमेंट में हि‍स्‍सा ले सकती है।

 

ट्रेडर्स को 5-6 लाख नौकरियां जाने का डर

 

खंडेलवाल का कहना है कि भारत के ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सेगमेंट के रिटेलर्स को मिलाकर कुल 40 लाख करोड़ रुपए सालाना का रिटेल कारोबार होता है और कम से कम 20 लाख करोड़ के बिजनेस को इससे नुकसान होने वाला है। जहां तक जॉब लॉस की बात है तो रिटेलर्स कां धंधा गिरने से वे लोगों को निकालेंगे ही, इससे 5-6 लाख लोगों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा।

 

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