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एक छोटी सी दुकान को बदल डाला 130 अरब के कारोबार में, कई देशों में फैला है बिजनेस

नहीं पसंद था किसी और के लिए काम करना

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नई दिल्ली। कभी इनके पिता की इंडोनेशिया में टेक्सटाइल की छोटी सी दुकान हुआ करती थी और आज दुनियाभर में इनका सिक्का चलता है। सिंगापुर में बस जाने वाले मोहन वासवानी की कंपनी तोलाराम ग्रुप नाइजीरिया में पोर्ट बना रही है, एस्टोनिया में पेपर का उत्पादन कर रही है, इंडोनेशिया में बैंक चला रही है और भारत में पावर सप्लाई कर रही है। अफ्रीका में कंपनी का फूड प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन ऑपरेशन हैं और 75 देशों में कंपनी इन उत्पादों को बेचती है। मोहन वासवानी इस बात की जीती जागती मिसाल हैं कि जुनून, जोखिम एवं मेहनत की हिम्मत हो तो इंसान अपना साम्राज्य खड़ा कर सकता है।

 

सात दशक पहले रखी गई कंपनी की नींव

कंपनी का नाम ब्रिटिश भारत के सिंध प्रांत में रहने वाले वैद्य सेठ तोलाराम के नाम पर रखा गया है। वे गरीब और बीमार लोगों की देखभाल करते थे। कंपनी उन्हीं के आदर्शों पर काम करती है। सेठ तोलाराम के सबसे छोटे बेटे खानचंद वासवानी 1930 में सिंध प्रांत से इंडोनेशिया जाकर बस गए। वहां पर1948 में उन्होंने टोको वासवानी नाम से टेक्सटाइल की दुकान खोली।

 

ऐसे बढ़ा व्यापार
1957 में उनके बेटे मोहन वासवानी ने 10 वर्ष की उम्र में अपने पारिवारिक बिजनेस में हाथ बंटाना शुरू किया। धीरे-धीरे यह छोटी सी टेक्सटाइल शॉप बड़े रिटेल बिजनेस में तब्दील हुई और फिर फैब्रिक और गारमेंट के होलसेल और ट्रेडिंग बिजनेस करने लगी। 1968 में कंपनी ने सिंगापुर में ऑफिस खोला। 19 साल की उम्र में मोहन वासवानी कंपनी के प्रमुख बन गए।

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कई देशों में खोले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट

1970 में कंपनी ने इंडोनेशिया के बाटु में पहली मैन्युफैक्चरिंग फैसेलिटी शुरू की। इसके बाद इंडोनेशिया समेत अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और बाल्टिक देशों में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट डाले। 1975 में कंपनी का हेडक्वार्टर सिंगापुर शिफ्ट किया आैर 1976 में नाइजीरिया में बिजनेस करने वाली पहली कंपनी बनी। फिलहाल कंपनी हर तरह के सेक्टर में बिजनेस कर रही है। हालांकि कंज्यूमर गुड़स, डिजिटल सर्विस, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ग्रोथ कंपनी का लक्ष्य है।

 

हर तरह के बिजनेस में आजामया हाथ

70 साल पुरानी उनकी कंपनी कई सारे स्टार्टअप के कलेक्शन जैसी दिखती है। कंपनी ने तकरीबन100 बिजनेस में हाथ आजमाया। इनमें से 75 फीसदी फेल हो गए लेकिन जो 25 फीसदी सफल रहे और उनसे सारे नुकसानों की भरपाई हो गई।आगे पढ़ें,

तेजी से कर रही ग्रोथ

कंपनी ने हाल ही में ऑनलाइन लोन बिजनेस तुनाएकू शुरू किया है। इस बिजनेस ने अब तक लोगों को 1 लाख करोड़ रुपिया (6.55 अरब डॉलर) के लोन दिए हैं। कंपनी की खास बात यह है कि कंपनी का कंट्रोल भले ही वासवानी परिवार के हाथों में है लेकिन सभी 18 बिजनेस यूनिट का कंट्रोल बाहर से आए प्रोफेशनल मैनेजर्स को सौंपा गया है। कंपनी में 10,000 कर्मचारी हैं।

 

नहीं पसंद किसी और के लिए काम करना
मोहन वासवानी का कहना है कि सिंधी समुदाय व्यापार करने वाला समुदाय है। हम उद्यमी हैं। अगर हम लोगों के पास थोड़ा भी धन होगा तो हम उससे अपना व्यापार शुरू कर देंगे, क्योंकि हमें किसी और के लिए काम करना पसंद नहीं है।

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