बिज़नेस न्यूज़ » Industry » E-Commerceफ्लिपकार्ट ने I-T डिपार्टमेंट को भेजी वॉलमार्ट डील की डिटेल, नियामकीय मंजूरी के बाद करेगा कार्रवाई

फ्लिपकार्ट ने I-T डिपार्टमेंट को भेजी वॉलमार्ट डील की डिटेल, नियामकीय मंजूरी के बाद करेगा कार्रवाई

डील पूरी होने और इसे नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद डिपार्टमेंट टैक्‍स डिटेल्‍स जानने के लिए नोटिस जारी कर सकता है।

1 of

नई दिल्‍ली. फ्लिपकार्ट ने वॉलमार्ट के साथ हुई डील पर इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट को कुछ डिटेल्‍स भेजी हैं। लेकिन डिपार्टमेंट अभी इस मामले में कोई कदम नहीं उठा रहा है। एक अधिकारी के मुताबिक,‍ डिपार्टमेंट इस डील को नियामकीय मंजूरी मिल जाने के बाद ही कदम उठाएगा। बता दें कि पिछले माह वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीदी। इस सौदे की कीमत करीब 1 लाख करोड़ रुपए रही है। 


अधिकारी ने कहा कि इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट इस वक्‍त फ्लिपकार्ट की ओर से मिली डिटेल्‍स की स्‍टडी कर रहा है। डील पूरी होने और इसे नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद डिपार्टमेंट टैक्‍स डिटेल्‍स जानने के लिए नोटिस जारी कर सकता है। डिपार्टमेंट ने पिछले माह वॉलमार्ट को लेटर लिखकर कहा था कि भारत के इनकम टैक्‍स एक्‍ट के सेक्‍शन 195 (2) के तहत टैक्‍स लायबिलिटी को लेकर कंपनी दिशा-निर्देश की मांग कर सकती है। सेक्‍शन 195 के अंतर्गत विदेशियों से होने वाली डील में टैक्‍स जमा करना होता है। इसे विदहोल्डिंग टैक्‍स भी कहते हैं। 

 

डिपार्टमेंट को डील में शामिल पार्टियों को नोटिस भेजने का है अधिकार 

नांगिया एडवाइजर्स एलएलपी में मैनेजिंग डायरेक्‍टर राकेश नांगिया के मुताबिक, इनकम टैक्‍स एक्‍ट के सेक्शन 133 (6) के तहत इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट को फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील में शामिल किसी भी पार्टी को नोटिस जारी करने का अधिकार है। फिर चाहे व‍ह फ्लिपकार्ट हो, वॉलमार्ट हो या इस डील में हिस्‍सेदारी बेचने वाले इन्‍वेस्‍टर्स। अगर डिपार्टमेंट खरीदार या बिक्री करने वाले के जवाब से संतुष्‍ट नहीं होता है तो वह खरीदार या बिक्रीकर्ता को एक्‍ट के सेक्‍शन 195 के तहत उचित टैक्‍स नहीं देने के चलते असेसी इन डिफॉल्‍ट कैटेगरी में रख सकता है। 

 

अभी सेक्‍शन 9 (1) के तहत कर रहा जांच 

अभी डिपार्टमेंट इनकम टैक्‍स कानून के सेक्‍शन 9 (1) के अंतर्गत काम ले रहा है। यह इनडायरेक्‍ट ट्रान्‍सफर प्रोविजन्‍स में इस्‍तेमाल होता है। इसके जरिए डिपार्टमेंट पता लगा रहा है कि सिंगापुर और मॉरिशस जैसे देशों के साथ बाइलेटरल टैक्‍स समझौतों में होने वाला लाभ वॉलमार्ट को हिस्‍सेदारी बेचने वाले विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्‍ध है या नहीं। 

 

डील को CCI की ओर से रेगुलेटरी क्‍लीयरेंस की है जरूरत

वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील के तहत फ्लिपकार्ट के बड़े शेयरहोल्‍डर्स जैसे सॉफ्टबैंक, नैस्‍पर्स, वेंचर फंड एक्‍सेल पार्टनर्स और ईबे ने भी अपनी हिस्‍सेदारी वॉलमार्ट को बेच दी है। साथ ही फ्लिपकार्ट के एक को-फाउंडर सचिन बंसल भी अपनी हिस्‍सेदारी बेच फ्लिपकार्ट से बाहर जा चुके हैं। एक्‍सपर्ट का मानना है कि डील को केवल CCI की ओर से रेगुलेटरी क्‍लीयरेंस की जरूरत है। इसके अलावा वॉलमार्ट को ई-कॉमर्स के मार्केटप्‍लेस मॉडल को लेकर कॉमर्स मिनिस्‍ट्री के दिशा-निर्देशों का भी पालन करना होगा।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट