बिज़नेस न्यूज़ » Industry » E-Commerceडिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया के लिए WTO बना चैलेंज, मोदी को घेर रहे हैं अमेरिका-चीन

डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया के लिए WTO बना चैलेंज, मोदी को घेर रहे हैं अमेरिका-चीन

11 दि‍संबर से शुरू होने वाली डब्‍ल्‍यूटीओ वार्ता भारतीय ई-कॉमर्स इंडस्‍ट्री के लि‍ए बड़ा चैलेंज लेकर आ सकती है।

1 of

नई दि‍ल्‍ली. भारतीय ई-कॉमर्स इंडस्‍ट्री के लि‍ए 10 दि‍संबर से शुरू होने वाली डब्‍ल्‍यूटीओ वार्ता बड़ा चैलेंज लेकर आ सकती है। कुछ डेवलप देश चाहते हैं कि‍ ई-कॉमर्स के लि‍ए नए ग्‍लोबल रूल्‍स को लागू कि‍या जाए। अगर ऐसा होता है तो भारत सरकार की ओर से शुरू कि‍ए गए डि‍जि‍टल इंडि‍या, स्‍टार्टअप इंडि‍या और स्‍मार्ट सि‍टी को झटका लग सकता है। 

 

यही वजह है कि‍ भारत से इसका वि‍रोध कि‍या जा रहा है। इतना ही नहीं पहली बार डब्ल्यूटीओ में ई-कॉमर्स पर किसी भी वार्ता के विरोध का औपचारिक दस्तावेज पेश किया है। भारत ने डब्ल्यूटीओ के मंत्री स्तरीय सम्मेलन से पहले यह दस्तावेज पेश किया। ऐसे में भारत को क्रॉस बॉर्डर डि‍जि‍टल बि‍जनेस खोलने के लिए कई देशों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। बता दें, WTO सदस्‍य देशों की 11वीं मिनिस्‍ट्रीयल कॉन्‍फ्रेंस ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना) में 10 से 13 दिसंबर तक होगी।  

 

 

मोदी सरकार की पॉलि‍सी को नुकसान

 

सरकारी थिंक टैंक सीडब्‍ल्यूएस ने एक वर्किंग पेपर में कहा है कि भारत को अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और चीन की ओर से ई-कॉमर्स को डब्‍ल्‍यूटीओ के दायरे में लाने के प्रपोजल पर बातचीत शुरू करने की मांग को नहीं मानना चाहिए। सीडब्‍ल्‍यूएस ने कहा कि डि‍जि‍टल इंडि‍या, स्‍टार्टअप इंडि‍या जैसी पॉलिसीज देश के हितों और डिजिटल इकॉनमी की मौजूदा स्थिति के आधार पर बनाई जाती हैं।  

 

भारत में सर्वर के लोकलाइजेशन को अनिवार्य बनाने वाली पॉलिसी नहीं है, लेकिन सीडब्‍ल्‍यूएस का कहना है कि इस तरह की पॉलिसी बनाने का अधिकार छोड़ने से मेक इन इंडिया और स्मार्ट सिटीज जैसी योजनाओं को नुकसान हो सकता है। अगर सरकार इस तरह का अधिकार छोड़ती है तो वह ई-कॉमर्स सेक्टर में देश में ऑपरेट करने वाली विदेशी कंपनियों पर लोकलाइजेशन की शर्त लागू नहीं कर सकेगी। 

 

पर्सनल और नेशनल सि‍क्‍योरि‍टी को नुकसान 

 

कई बड़ी विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां भारत में आना चाहती हैं। सीडब्‍ल्‍यूएस ने कहा है कि स्मार्ट सिटीज योजना के मामले में रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा पर कंट्रोल न होने से नेशनल सि‍क्‍योरि‍टी को नुकसान हो सकता है। 

 

देश के बाहर सर्वर रखना भी खतरनाक

 

कई देशों की ओर से दि‍ए गए नए प्रपोजल में क्लाउड कंप्यूटिंग को भी शामि‍ल कि‍या गया है। भारत से बाहर सर्वर रखने वाले सर्विस प्रोवाइडर्स की जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए कहा है कि एक देश के डेटा या सर्वर से जुड़े विवादों का निपटारा उस देश के रूल्स के तहत करना होगा जहां सर्वर मौजूद है।  

 

भारत के रि‍टेल और ट्रेड को होगा नुकसान

 

ई-कॉमर्स एक्‍सपर्ट और टेक्‍नोपैक के चेयरमैन अरविंद के सिंघल ने moneybhaskar.com को बताया कि‍ भारत में ई-कॉमर्स सेक्‍टर को एफडीआई के जरि‍ए प्रोटेक्‍ट कि‍या जा रहा है और यहां इन्‍वेंटरी बेस्‍ट मॉडल पर बि‍जनेस कि‍या जाता है। चाहे अमेजन हो या फ्लि‍पकार्ट उनको एफडीआई का रूल फोलो करना पड़ता है। अगर भारत को डब्‍ल्‍यूटीओ की शर्तों को मानना पड़ता है तो हमें फि‍जि‍कल रि‍टेल भूलना पड़ेगा, शायद इसलि‍ए भारत इसका वि‍रोध कर रहा है। इसके अलावा, क्रॉस बॉर्डर डि‍जि‍टल बि‍जनेस ऑपन करने पर देश के ट्रेड पर असर पड़ेगा।

 

वि‍देशी समान और कंपनि‍यां पड़ेंगी भारी

 

डि‍जि‍टल बि‍जनेस के लि‍ए क्रॉस बॉर्डर ओपन होने से वि‍देशी कंपनि‍यों और वि‍देशी समान का फोलो बढ़ जाएगा। अभी भी ई-कॉमर्स के जरि‍ए वि‍देशी समान खरीदा जाता है लेकि‍न उन पर उस देश के हि‍साब से कंज्‍यूमर ड्यूटी लगती है। बॉर्डर ओपन होने से लोकल मैन्‍युफैक्‍चरर्स को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। 

 

WTO वार्ता में ई-कॉमर्स का मामला

 

साल 1998 में ई-कॉमर्स को डब्‍ल्‍यूटीओ में शामि‍ल कि‍या गया था। तब सदस्‍य देशों में इलेक्‍ट्रॉनि‍क ट्रांसमि‍शन पर कस्‍टम ड्यूटीज को नहीं लगाने पर सहमति‍ दी थी और समय-समय पर बढ़ाने की मंजूरी दी थी। हालांकि‍, बीते साल से कई देशों ने डि‍जि‍टल ट्रेड के वि‍भि‍न्‍न आयामों पर जैसे क्रॉस बॉर्डर डाटा फ्लो, सर्वर लोकेलाइजेशन, टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर, सोर्स कोड, कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन, इंटि‍लेक्‍चुल प्रॉपर्टी राइट्स और ट्रेड फेसि‍लि‍टेशन को ई-कॉमर्स का हि‍स्‍सा बनाने के लि‍ए अपना पक्ष रखा। 

 

वहीं, अमेरिका ने पिछले साल डिजिटल कस्टम ड्यूटी पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही फ्री और ओपन इंटरनेट का पक्ष लिया था। चीन चाहता है कि‍ ऑनलाइन शॉपिंग के साथ-साथ गुड्स की फि‍जि‍कल डि‍लि‍वरी के नि‍यम आसान हों। कुछ देशों की ओर से प्रभावशाली ढंग से कोशि‍श की जा रही है ताकि‍ ई-कॉमर्स पर व्यापक वार्ता शुरू करने के लिए एक व्यापक समर्थन हासिल हो।

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट