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तितली तूफान से 2800 करोड़ का नुकसान, संपत्ति से लेकर बागवानी तक को ले उड़ा

बुलबुल तूफान की तरह खतरनाक होता है तितली तूफान

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अमरावती: आंध्र प्रदेश में तितली तूफान के चलते कुल 4 लोगों की मौत हो गई है। जिसमें उड़ीसा और बंगाल के लोग शामिल हैं। तूफान से हुई क्षति के चलते आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने  केंद्र सरकार से 1200करोड़ की आंतरिक और 2800 करोड़ की वित्तीय सहायता की मांग की है। नायडू ने शनिवार को पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा,  'तितली तूफान से राज्य को लगभग 2800 करोड़ रुपये की क्षति पहुंची है। बागवानी को 1000 करोड़, कृषि को 800 करोड़, बिजली विभाग को 500 करोड़, आर एंड बी और पंचायत राज को 100-100 करोड़, सिंचाई और आर डब्ल्यू एस विभाग को 100-100 करोड़ और मत्स्य क्षेत्र को 50 करोड़ का क्षति पहुंची है।'

 

पत्र में नायडू ने कहा, " मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि उदारतापूर्वक और अविलम्ब सहायता राशि मंजूर करे ताकि लोगों के कष्टों को कम किया जा सके।" चक्रवात और भारी वर्षा से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिलों में भारी नुकसान हुआ। पश्चिमी मेदनीपुर में एक व्यक्ति की जान चली गई तथा राजमार्ग पांच पर कई पेड़ उखड़ गए। मौसम विभाग ने ओडिशा के गंजम, गजपति, पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, खुर्दा, नयागढ़, कटक, जाजपुर, भद्रक और बालासोर जैसे जिलों में भारी बारिश की आशंका जताई है। ओडिशा में 125 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, जो 165 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती हैं।

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क्या है तितली तूफान

 

इस तूफान को तितली नाम पाकिस्तान की ओर से दिया गया है। तूफानों को ऐसे नाम इसलिए दिए जाते हैं ताकि वैज्ञनिकों को उन्हें पहचानने में  कोई दिक्कत ना हो। दुनियाभर की 5 कमेटियों की ओर से तूफानों के नाम रखे जाते हैं। जो कि इस प्रकार हैं।
1.  इस्‍केप टाइफून कमेटी, 
2. इस्‍केप पैनल ऑफ ट्रॉपिकल साइक्‍लोन
3.  आरए 1 ट्रॉपिकल साइक्‍लोन कमेटी
4.  आरए- 4, आरए- 
5.  ट्रॉपिकल साइक्‍लोन कमेटी

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने सबसे पहले चक्रवातों के नाम रखने की शुरुआत की थी। भारत में साल 2004 में तूफानोंका नाम देने का चलन शुरू हुआ था। जिसके बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, म्यांमार, ओमान और थाइलैंड ने भी तूफानों को नाम देना शुरू कर दिया।  नामों के पहले अक्षर के अनुसार उनका क्रम तय किया जाता है और उसी क्रम के अनुसार चक्रवातों के नाम रखे जाते हैं। इन सभी आठ देशों ने वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (World Meteorological Organization) को तूफानों के नाम की लिस्ट दी हुई है. इसमें भारत ने 'अग्नि', 'बिजली', 'मेघ', 'सागर' और 'आकाश' जैसे नाम दिए. वहीं, पाकिस्तान ने 'निलोफर', 'बुलबुल' और 'तितली' जैसे नाम दिए। इन्हीं नामों में से वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन तूफान का नाम रखती है। इन देशों में जब तूफान आता है तो नामों को बारी-बारी कर चुना जाता है। इस बार पाकिस्‍तान की तरफ से भेजे गए तूफान का नाम चुना जाना था। इसलिए भारत में आए इस तूफान को तितली नाम दिया गया है।

ऐसे रखे जाते हैं तूफानों के नाम


हर साल अमेरिका तूफानों के 21 नामों की सूची तैयार करता है। अंग्रेजी के हर एल्‍फाबेट से एक नाम रखा जाता है।  लेकिन Q,U,X,Y और Z एल्‍फाबेट से तूफान का नाम रखने की परंपरा नहीं है। अगर एक साल में 21 से ज्‍यादा तूफान आते हैं तो फिर उनका नाम ग्रीक अल्‍फाबेट अल्‍फा, बीटा, गामा के नाम से रख दिया जाता है। इन नामों में ऑड-ईवन का फॉर्मूला चलता है। ऑड सालों में चक्रवात का नाम औरतों के नाम पर रखा जाता है, जबकि ईवन सालों में आए तूफान के नाम पुरुषों के नाम पर रखे जाते हैं। 

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