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Home » Industry » E-CommerceAlibaba Owner Jack Ma Faces Criticism For Promoting 996 Work Culture 

चीन के सबसे अमीर आदमी ने दिया सफलता का ऐसा मंत्र, जिसकी दुनियाभर में हो रही आलोचना

गरीबी से निकलकर चीन का सबसे अमीर आदमी बनने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा।

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नई दिल्ली।

चीन की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के फाउंडर जैक मा एक बयान देकर विवादों के घेरे में आ गए हैं। उन्होंने रविवार को 996 वर्क कल्चर (सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक और सप्ताह में 6 दिन) की जोरदार वकालत की। उनका तर्क है कि 996 पद्धति जुनूनी युवाओं के लिए है। जैक मा की जिंदगी को देखें तो वे भी काफी जुनूनी हैं। एक गरीब इंसान से चीन के सबसे अमीर आदमी बनने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। वे स्कूल में कई बार फेल हुए, 30 नौकरियों से रिजेक्ट हुए, उनका मजाक उड़ाया, उन्हें ठग समझा, इसके बाद भी उनका जुनून और काम के प्रति उनकी लगन ही थी जिससे वे दुनिया की सबसे बड़ी रिटेलर और ई-काॅमर्स कंपनी के मालिक बने।

 

शुरू में ठग समझते थे लोग

जैक मा की नेट वर्थ 40.1 अरब डॉलर (2.77 लाख करोड़) है। कुछ समय पहले प्रकाशित हुई उनकी जीवनी पर आधारित किताब ‘अलीबाबा: द हाउस दैट जैक मा बिल्ट’ में बताया गया है कि जब जैक ने 1999 में हांगझू के अपने अपार्टमेंट में अलीबाबा कंपनी का कामकाज शुरू किया तो लोग उन्हें शक की नजरों से देखते थे। उन्हें लोग तीन साल तक ठग ही समझते रहे। बाद में जाकर लोगों को यकीन हुआ कि वे तो उनकी जिंदगी आसान करने वाले व्यक्ति हैं।

 

टीचर की नौकरी छोड़ शुरू की थी कंपनी

बिल गेट्स या स्टीव जॉब्स की तरह जैक मा के पास कम्प्यूटर साइंस की भी कोई पृष्ठभूमि नहीं रही। बचपन में कभी उन्होंने कम्प्यूटर इस्तेमाल नहीं किया। गणित के पेपर में एक बार उन्हें 120 में से केवल एक अंक मिला, ऐसे में उनकी कामयाबी की कहानी और भी हैरान करती है। 1980 में वह अपने शहर में स्कूल टीचर की नौकरी करने लगे। तीन साल बाद उन्होंने इस नौकरी को छोड़ अनुवाद करने वाली एक कंपनी खोली।

Mr. Internet के नाम से थे मशहूर

1994 में जब वह अपने बिजनेस के सिलसिले में अमेरिका गए हुए थे, तो वहां इंटरनेट देखकर हैरान रह गए। उन्हें यह बात करामाती लगी कि कैसे घर बैठे लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से इंटरनेट के जरिए जुड़ सकते हैं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने 'चाइना पेज' लॉन्च किया। यह देश की पहली ऑनलाइन डायरेक्टरी थी। इसकी कामयाबी से मा चीन में 'मिस्टर इंटरनेट' के नाम से मशहूर हो गए। लेकिन आगे रास्ता आसान नहीं था। चीन में इंटरनेट लाने के लिए यह जरूरी था कि वह सरकार का ध्यान इस ओर खींचें। यह इंटरनेट का शुरुआती चरण था और बहुत ही कम घरों में कम्प्यूटर देखने को मिलता था। लगातार कई नाकामियों के बाद मा ने चाइना पेज बंद कर दिया और अपने नए प्रोजेक्ट अलीबाबा की तैयारी में लग गए।

30 नौकरियों से रिजेक्ट होने पर रखी अलीबाबा की नींव

जैक मा पढ़ाई में बिल्कुल अच्छे नहीं थे, वो पांचवीं कक्षा में दो बार और आठवीं कक्षा में 3 बार फेल हुए थे। जैक मा पुलिस में भर्ती होना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने Apply भी किया, लेकिन वहां भी उन्हें Reject कर दिया गया था। प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें 10 बार रिजेक्ट किया। जब जैक मा के शहर में KFC ने अपनी ब्रांच खोली तो जैक ने उस जॉब के लिए भी अप्लाई किया पर वहां से भी रिजेक्ट हो गए। करीब 30 नौकरी से Rejection के बाद जैक मा ने अलीबाबा की शुरुआत की। 21 फरवरी 1999 को जैक मा ने अलीबाबा की नींव रखी और इसके लिए अपने 17 दोस्तों को तैयार किया। आज उनकी कंपनी जबरदस्त फायदे में है और दुनिया के ई-कॉमर्स बाजार में सबसे आगे है।

छह मिनिट में इम्प्रेस कर मिल गया था लोन

जापान की बड़ी फाइनेंशियल कंपनी सॉफ्टबैंक से जैक मा कर्ज लेने में कामयाब हुए। यह कंपनी चीन के आईटी सेक्टर में निवेश करती है। अलीबाबा में शुरुआती निवेश करने वालों में से एक वू यिंग ने वेबसाइट पर लिखा, “एक पुरानी सी जैकेट और हाथ में एक कागज पकड़े वह हमारे पास आया था।” कुल छह मिनट में उसने निवेशकों को इतना यकीन दिला दिया कि उन्हें दो करोड़ अमेरिकी डॉलर का कर्ज मिल गया।

पहले भी फंस चुके हैं विवादों में

इसके बाद कंपनी ने कई विवाद भी झेले। 2011 में अलीबाबा को झटका लगा जब कंपनी को कथित रूप से नकली सामान बेचते पाया गया। इसके बाद उन्होंने अपने दो सहायकों को नौकरी से निकाल दिया। लोगों ने उन पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से मिले होने के आरोप भी लगाए और जांच की मांग की।

जा रहे डाटा टेक्नोलॉजी की तरफ

तमाम विवादों के बावजूद मा के समर्थक उन्हें एक ट्रेंडसेटर के रूप में देखते हैं। चीन की सोशल नेटवर्किंग साइट वीबो पर उन्हें 1.5 करोड़ फॉलो करते हैं। उन पर लिखी गई एक किताब 'मा-इज्म' के मुताबिक, एक नया धर्म आ चुका है। मई 2013 में मा ने अलीबाबा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद छोड़ दिया। हालांकि, इससे न ही उनकी शोहरत में कोई कमी आई न कंपनी के इर्द-गिर्द मंडराते विवादों में। मा ने इशारा दिया कि आगे वह ऑनलाइन डाटा टेक्नोलॉजी की दिशा में काम करना चाहते हैं। कुछ वर्ष पहले त्सिंगुआ यूनिवर्सिटी में एक लेक्चर के दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया अब आईटी से डीटी (डाटा टेक्नोलॉजी) की तरफ जा रही है।

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