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सुविधा /स्पाइस मनी ने लॉन्च किया स्मार्टफोन इनेबल्ड माइक्रो एटीएम

  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना जैसी पहल से बैंक खातों की संख्या बढ़ी

Moneybhaskar.com

Jul 23,2019 02:41:00 PM IST

नई दिल्ली. डिजिस्पाइस ग्रुप की कंपनी स्पाइस मनी ने पॉइंट-ऑफ-सेल कार्ड मशीनों की तर्ज पर ‘माइक्रो-एटीएम’ के जरिए अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। स्पाइस मनी पहले ही अपने 2,00,000 मर्चेंट पॉइंट्स पर आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) के जरिए कैश विड्राल की सुविधा दे रही है। वह हर महीने अपने नेटवर्क में हजारों नए व्यापारी जोड़ रही है। कंफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (सीएटीएमआई) ने हाल ही में सॉफ्टवेयर के मेंटेनेंस और इक्विपमेंट के अप ग्रेड्स पर होने वाले भारी-भरकम खर्च को ध्यान में रखते हुए 50 प्रतिशत एटीएम बंद करने का फैसला किया है और इसे ध्यान में रखते हुए स्पाइस मनी ने वैकल्पिक लेन-देन फ्रेमवर्क विकसित करने का काम अपने हाथ में लिया है। एईपीएस सिस्टम पहले ही 2 लाख कस्टमर टच पॉइंट्स तक पहुंच गया है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा में 10,000 से ज्यादा माइक्रो-एटीएम लाखों भारतीयों के लिए हर दिन वित्तीय लेन-देन सहज बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना जैसी पहल से बैंक खातों की संख्या बढ़ी

एटीएम की संख्या में गिरावट देश में इस समय बहुत बड़ा संकट है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना जैसी पहल से बैंक खातों की संख्या बढ़ी। इससे उन इलाकों में समस्या और बढ़ गई है, जहां एटीएम तक पहुंच सीमित है। लोग इन बैंक खातों का इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे। स्थानीय रिटेल दुकानों और किराना स्टोर मालिकों को सशक्त बनाने के पीछे स्पाइस मनी के माइक्रो-एटीएम का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को आवश्यक वित्तीय लेन-देन की अनुमति प्रदान करना है ताकि इस बढ़ती खाई को पाटा जा सके। एईपीएस सिस्टम उन भारतीयों को सक्षम करता है जो हाशिये पर हैं। सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे। ताकि उन्हें उनके दरवाजे पर अंगूठा लगाकर लेन-देन करने की सुविधा उपलब्ध हो सके।

तेजी से हो रहा है डिजिटलाइजेशन

भारत में डिजिटलाइजेशन तेजी से हो रहा है। इसके बाद भी भारत की आबादी का एक बड़ा तबका सुविधाओं से दूर हैं। खासकर जब बात वित्तीय लेन-देन की आती है। ग्रामीण-शहरी सेवाओं में अंतर बहुत बड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति दस लाख लोगों पर 49 बैंक शाखाएं हैं जबकि महानगरों में दस लाख की आबादी पर 139 बैंक शाखाएं हैं। इसी तरह शहरी भारत में प्रति दस लाख लोगों पर 305 एटीएम हैं जबकि अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण भारत में सिर्फ 110 एटीएम। एटीएम की कमी के संकट को देखते हुए स्पाइस मनी के दो समाधान- आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम और माइक्रो एटीएम डिवाइस इन समस्याओं को कुशलता से दूर करते हैं। वे कैश विड्राल और बैलेंस पूछताछ जैसे आवश्यक वित्तीय लेन-देन की अनुमति देते हैं। उपयोगकर्ता मशीन पर अपने डेबिट कार्ड को स्वाइप कर सकते हैं और संबंधित राशि नगद निकाल सकते हैं। एक सुरक्षित पिन / आईडी आधारित प्रणाली से बैलेंस की जांच भी संभव है। अपने केंद्रित प्रयासों से स्पाइस मनी ने एक समानांतर और कम खर्चीले वित्तीय सशक्तिकरण नेटवर्क की शुरुआत कर राष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने में अग्रणी योगदान दिया है।


डिजिस्पाइस के चेयरमैन दिलीप मोदी ने कहा, "स्पाइस मनी के प्रयासों का उद्देश्य 'भारत' और 'इंडिया' के बीच की खाई को खत्म करना है। हमारे माइक्रो-एटीएम और एईपीएस सिस्टम ने लोगों को अपनी सुविधानुसार खातों में पैसा डालने के लिए सक्षम किया है और उन्हें लेन-देन करने में पहले से अधिक सक्षम किया है। यह तकनीकी रूप से उन्नत समाधानों जैसे कि एडवांस एनालिटिक्स, एआई, और नए वितरण प्लेटफार्मों की शक्ति के माध्यम से ही संभव हो सका है जिनसे वास्तव में आर्थिक रूप से समावेशी भारत का सपना हासिल किया जा सकता है। इससे ‘भारत’ को शेष भारत की ही तरह सशक्त और आकांक्षी बनाया जा सकता है!"
भारत इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर है और 2022 तक यहां 450 मिलियन से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता होने की उम्मीद है। इसे ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक वित्तीय समावेशन प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका डिजिटल प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करना और प्रत्येक व्यक्ति को एक संभावित बैंक बनाना है। ताकि उन्हें एटीएम का सिर्फ पता लगाने के लिए 15-20 किमी की यात्रा न करनी पड़े।

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