नुकसान /बाबा रामदेव मल्टीनेशनल कंपनियों को नहीं करा सके कपालभाति, पतंजलि की बिक्री बढ़ने की बजाय 10 प्रतिशत घटी

Moneybhaskar.com

Jun 19,2019 08:19:00 PM IST

नई दिल्ली. योग गुरू से कारोबारी बने बाबा रामदेव को व्यापार रास नहीं आ रहा है। मल्टीनेशनल कंपनियों को कपालभाति कराने की उनकी मंशा के उलट खुद की कंपनी पतंजलि की मुश्किल में आ गई है। रामदेव ने वर्ष 2018-19 तक बीस हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था लेकिन उलटा बिक्री बीते साल से भी 10 प्रतिशत कम हो गई। कंपनी की बिक्री 10 हजार करोड़ रुपए से घटकर करीब 8.1 हजार करोड़ रुपए हो गई है। विदेशी समाचार एजेंसी रायटर्स की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

बाबा रामदेव को था बिक्री 200 अरब पहुंच जाने का भरोसा

सफलता की लहरों पर सवार रामदेव ने 2017 में कहा था, "बिक्री के आंकड़े बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कपालभाति करने को मजबूर कर देंगे." उन्होंने मार्च 2018 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में कंपनी (पतंजलि) की बिक्री दोगुनी यानी 200 अरब रुपये पहुंच जाने का भरोसा जताया था। लेकिन, सालाना वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की बिक्री इस दौरान 10 फीसदी घटकर 81 अरब रुपये रही। कंपनी के सूत्रों और विश्लेषकों का कहना है कि पिछले वित्त वर्ष में बिक्री में और गिरावट आने का अनुमान है। केयर रेटिंग्स ने अप्रैल में कहा था कि अस्थायी आंकड़ों से कंपनी की बिक्री 31 दिसंबर तक खत्म 9 महीनों में घटकर सिर्फ 47 अरब रुपये रह गई है। यह आंकड़ा पतंजलि से मिली जानकारी पर आधारित है।

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कई गलत कदमों से कंपनी के प्रदर्शन पर लगी चोट


पतंजलि के पूर्व और मौजूदा कर्माचारियों, डिस्ट्रिब्यूटर्स, स्टोर मैनेजर्स और उपभोक्ताओं से की गई बातचीत से पता चलता है कि कई गलत कदमों से पतंजलि की महत्वाकांक्षा पर चोट पहुंची है। खासकर बहुत जल्द विस्तार की कोशिश से कंपनी के उत्पादों की क्वालिटी में गिरावट आई।

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नोटबंदी और जीएसटी ने भी डाला बिक्री पर असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2016 में नोटबंदी के कदम से भी पतंजलि पर असर पड़ा। इसके बाद 2017 में जीएसटी लागू होने का भी असर कंपनी की बिक्री पर पड़ा। मोदी सरकार के इन दोनों कदमों से आर्थिक गतिविधियों में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।

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गांव-गांव तक में मौजदू हैं

कंपनी के स्टोर पतंजलि का कहना है कि इसके डिस्ट्रिब्यूटर्स की संख्या 3,500 है, जो देशभर में 47,000 रिटेल काउंटर्स को उत्पादों की आपूर्ति करते हैं। पंतजलि की दुकाने मैंगी कैंडी से लेकर आयुर्वेदिक दवाइयां तक बेचती हैं। कंपनी का दावा है कि उसकी दवाएं जोड़ों के दर्द को ठीक करती हैं। ये दवाएं ज्यादार ग्रामीण इलाकों में काफी लोकप्रिय हैं।

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आचार्य बालकृष्ण के पास हैं सबसे ज्यादा शेयर

पतंजलि की स्थापना 2006 में हुई थी। तब से बाबा रामदेव कंपनी का चेहरा रहे हैं। टीवी पर आने वाले योग के कार्यक्रमों ने करोड़ों लोगों तक उनकी पहुंच बनाई हैं। गावों तक में आपको उनके मुस्कराते चेहरे वाले विज्ञापन दिख जाएंगे। कंपनी में उनके पार्टनर आचार्य बालकृष्ण की हिस्सेदारी है। बालकृष्ण से उनकी मुलाकात करीब तीन दशक पहले एक संस्कृत स्कूल में हुई थी। उनके पास कंपनी के 98.55 फीसदी शेयर हैं। 2018 में कंपनी द्वारा दिए गए आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।

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