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मैकडॉनल्ड विवाद बदल सकता है MNCs का बिजनेस मॉडल, 2 अरब डॉलर का है मार्केट

भारत के 2 अरब  डॉलर से ज्यादा के फूड और बेवरेज मार्केट में मैकडॉनल्ड से लेकर केएफसी, सबवे, पिज्जाहट, बर्गर किंग जैसी प्रमुख मल्टी नेशनल कंपनियां हैं। भारत के 2 अरब डॉलर से ज्यादा के फूड और बेवरेज मार्केट में मैकडॉनल्ड से लेकर केएफसी, सबवे, पिज्जाहट, बर्गर किंग जैसी प्रमुख मल्टी नेशनल कंपनियां हैं।
कॉरपोरेट एक्सपर्ट के अनुसार विक्रम बख्शी और मैकडॉनल्ड का विवाद दूसरी मल्टी नेशनल के लिए सबक हो सकता है। कॉरपोरेट एक्सपर्ट के अनुसार विक्रम बख्शी और मैकडॉनल्ड का विवाद दूसरी मल्टी नेशनल के लिए सबक हो सकता है।
टेक्नोपैक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया का फूड और बेवरेज मार्केट 2 अरब डॉलर का है। ये सालाना 23-24 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। टेक्नोपैक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया का फूड और बेवरेज मार्केट 2 अरब डॉलर का है। ये सालाना 23-24 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।

अमेरिकी फूड चेन कंपनी मैकडॉनल्ड्स को भारत में बड़ा झटका लगा है। कंपनी भारत में अपने फ्रेंचाइजी कनॉट प्लेस रेस्त्रां प्राइवेट लिमिटेड के प्रमुख विक्रम बख्शी से केस हार गई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने बख्शी को दोबारा एमडी पद पर बहाल कर दिया है। अब मैकडॉनल्ड्स इस मामले को उपरी अदालत में ले जाने की तैयारी में है।

moneybhaskar

Jul 18,2017 12:23:00 PM IST
नई दिल्ली.. अमेरिकी फूड चेन कंपनी मैकडॉनल्ड्स को भारत में बड़ा झटका लगा है। कंपनी भारत में अपने फ्रेंचाइजी कनॉट प्लेस रेस्त्रां प्राइवेट लिमिटेड के प्रमुख विक्रम बख्शी से केस हार गई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने बख्शी को दोबारा एमडी पद पर बहाल कर दिया है। अब मैकडॉनल्ड्स इस मामले को उपरी अदालत में ले जाने की तैयारी में है। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। भारत के 2 अरब डॉलर से ज्यादा के फूड और बेवरेज मार्केट में मैकडॉनल्ड से लेकर केएफसी, सबवे, पिज्जाहट, बर्गर किंग जैसी प्रमुख मल्टी नेशनल कंपनियां हैं। जो कि एक खास फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए भारत में बिजनेस करती है। कॉरपोरेट एक्सपर्ट के अनुसार विक्रम बख्शी और मैकडॉनल्ड का विवाद दूसरी मल्टी नेशनल के लिए सबक हो सकता है। जिसकी वजह से वह आने वाले दिनों में बिजनेस करने के नियम और शर्तों में बदलाव कर सकती है। आइए जानते हैं कि ये कंपनियां कैसे भारत में बिजनेस कर रही हैं...
ऐसा होता है इनका बिजनेस मॉडल
फास्ट फूड चेन कंपनियों का बिजनेस इंडिया में डेवलपमेंट मॉडल की तरह काम करता है। वह किसी एक या दो कंपनी के साथ टाईअप करती हैं। इंडियन कंपनी को मास्टर फ्रेंचाइजी देती हैं। इन मास्टर फ्रेंचाइजी के पास अपने आउटलेट या आगे फ्रेंचाइजी देने का अधिकार होता है। इनके ज्यादातर रेस्त्रां सेल्फ ओन्ड हैं। अगर उन्हें रेस्त्रां के लिए प्रॉपर्टी और लोकेशन अच्छी लगती है तो वह फ्रेंचाइजी भी देते हैं। वह उस केस में प्रॉपर्टी और ओनर के साथ लंबे समय के लॉकिंग पीरियड रखते हैं।
प्रमुख कंपनियों के भारतीय पार्टनर
मैकडॉनल्ड्स - इंडिया में मैकडॉनल्डस की फ्रेंचाइजी दो अलग- अगल कंपनियों ने ली है। नॉर्थ और ईस्ट की फ्रेंचाइजी कनॉट प्लाजा रेस्त्रां प्राइवेट लिमिटेड (सीपीआएल) के पास है जिसे विक्रम बख्शी संभाल रहे हैं। साउथ और वेस्ट के लिए फ्रेंचाइजी वेस्ट लाइफ डेवलपमेंट लिमिटेड के पास है जिसे अमित जाटिया संभाल रहे हैं। मैकडॉनल्ड 1996 में इंडिया आया था।
केएफसी, पिज्जा हट – अमेरिकी कंपनी पिज्जा हट और केएफसी की मास्टर फ्रेंचाइजी यम रेस्त्रां (Yum! Restaurants)के पास है।
बर्गर किंग – अमेरिकी कंपनी बर्गर किंग ने इंडिया में आने के लिए प्राइवेट इक्विटी फंड एवरस्टोन कैपिटल के साथ ज्वांइट वेंचर किया है। एवरस्टोन कैपिटल के पास मास्टर फ्रेंचाइजी है और उसके पास फ्रेंचाइजी देने का अधिकार है।
2 अरब डॉलर का है मार्केट
टेक्नोपैक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया का फूड और बेवरेज मार्केट 2 अरब डॉलर का है। ये सालाना 23-24 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। इसमें भी क्विक सर्विस रेस्त्रां (क्यूएसआर) 32 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। मैकडॉनल्ड्स , केएफसी, बर्गर किंग जैसी सभी फास्ट फूड चेन कंपनियां क्यूएसआर की कैटेगरी में आती हैं। इंडियन कंपनी इन ब्रांड को देश में लाने में करोड़ो रुपए में फ्रेंचाइजी फीस देती है। इन ब्रांड को अपने प्रोडक्ट इंडियन टेस्ट के मुताबिक बनाने पड़ते हैं।
अमेरिका प्रमोट करता है अपनी कंपनियों को
अमेरिकी सरकार का कमर्शियल सर्विस डिविजन अमेरिकन फर्म्स को ऐसे देशो में इन्वेस्ट करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जहां फास्ट फूड तेजी से बढ़ सकता है। यही कारण है कि मैकडॉनल्ड, केफससी अपना कारोबार तेजी से इंडिया में बढ़ा रही हैं। यही नहीं इनके अलावा अमेरिकी फास्ट फूड चेन चर्च चिकन, राउंड टेबल पिज्जा, सीकेई रेस्त्रां जैसी कंपनियां भी इंडिया में आना चाहती हैं।
MNC बदल सकती हैं स्ट्रेटजी
आईसीएआई के पूर्व प्रेसिडेंट अमरजीत चोपड़ा के अनुसार मैकडॉनल्ड विवाद का असर दूसरी मल्टी नेशनल कंपनियों पर भी नेगेटिव हो सकता है। जिस तरह मैकडॉनल्ड को हार मिली है उसके बाद कंपनियां भारत में बिजनेस करने के अपने नियमों और शर्तों में बदलाव कर सकती हैं। जिससे कि आने वाने दिनों में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
ब्रांड की इमेज को होता है नुकसान
ब्रांड गुरु हरीश बिजूर ने moneybhaskar.com को कहा कि आउटलेट बंद होने से मैकडॉनल्ड्स को बड़ा झटका लगेगा। ये किसी भी ब्रांड के लिए सही बात नहीं है। इससे इंडिया में उनकी ब्रांड इमेज को ही नुकसान पहुंचेगा। साथ ही आने वाले दिनों में कंपनियां भी इंडिया में बिजनेस करने से पहले अपने टर्म्स और कंडीशन को रिव्यू करके ही कॉन्ट्रेक्ट बनाएंगी।
अगली स्‍लाइड में जानिए - मैकडॉनल्ड्स के साथ क्या है विवाद
मैकडॉनल्ड्स रेस्त्रां के दिल्ली में 55 में से 43 आउटलेट बंद कर दिए गए हैं। ये आउटलेट फूड लाइसेंस रिन्यू नहीं होने के कारण रेस्त्रा बंद किए गए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका की कंपनी मैकडॉनल्ड्स और उसके 50:50 हिस्सेदारी वाले ज्वाइंट वेंचर सीपीआरएल के बीच चल रही खींचतान का असर भी पड़ा है। मैकडॉनल्ड्स और सीपीआरएल का ज्वाइंट वेंचर नॉर्थ और ईस्ट इंडिया में मैकडॉनल्ड्स के स्टोर्स ऑपरेट करती है। अगली स्लाइड में जानिए - क्या है कानूनी लड़ाईक्या है कानूनी लड़ाई अगस्त 2013 में बख्शी को सीपीआरएल के मैनेजिंग डायरेक्टर की पोस्ट से हटा दिया गया था। इसके बाद बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। बख्शी ने वर्ल्ड की सबसे बड़ी फास्ट फूड चेन कंपनी मैकडॉनल्ड्स को कंपनी लॉ बोर्ड में घसीट लिया। मैकडॉनल्ड्स लंदन कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में बख्शी के खिलाफ मुकदमा लड़ रही है। हालांकि, अभी हाल में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने बख्शी को फिर एमडी की पोस्ट पर बहाल करने के लिए कहा है।
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भारत के 2 अरब  डॉलर से ज्यादा के फूड और बेवरेज मार्केट में मैकडॉनल्ड से लेकर केएफसी, सबवे, पिज्जाहट, बर्गर किंग जैसी प्रमुख मल्टी नेशनल कंपनियां हैं।भारत के 2 अरब डॉलर से ज्यादा के फूड और बेवरेज मार्केट में मैकडॉनल्ड से लेकर केएफसी, सबवे, पिज्जाहट, बर्गर किंग जैसी प्रमुख मल्टी नेशनल कंपनियां हैं।
कॉरपोरेट एक्सपर्ट के अनुसार विक्रम बख्शी और मैकडॉनल्ड का विवाद दूसरी मल्टी नेशनल के लिए सबक हो सकता है।कॉरपोरेट एक्सपर्ट के अनुसार विक्रम बख्शी और मैकडॉनल्ड का विवाद दूसरी मल्टी नेशनल के लिए सबक हो सकता है।
टेक्नोपैक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया का फूड और बेवरेज मार्केट 2 अरब डॉलर का है। ये सालाना 23-24 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।टेक्नोपैक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया का फूड और बेवरेज मार्केट 2 अरब डॉलर का है। ये सालाना 23-24 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।

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