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सेफ्टी नियम बढ़ाएंगे कारों के दाम, नई चुनौती के लिए तैयार हो रही ऑटो कंपनियां

Industry Team

Jul 01,2015 11:19:00 AM IST
रिकवरी मोड में दिख रही ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री को आने वाले दिनों में कुछ नई चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। सरकार द्वारा लाए जा रहे रोड सेफ्टी बिल (जिसमें रिकॉल अनिवार्य होगा) और 2017 से हर कार में एयरबैग की अनिवार्यता से कार की कीमतें बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में कंपनियों के लिए नई चुनौती यह होगी कि वे कीमतों को लेकर संवेदनशील भारतीय बाजार में अपने प्रोडक्‍ट के दाम बढ़ाने का फैसला करें या फिर उसे अपने मार्जिन में कंज्‍यूम करने की कवायद करें। हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड इन चुनौतियों से निपटने में किस तरह सक्षम है और बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए वह क्‍या कदम उठा रही है। इन तमाम मुद्दों पर हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (सेल्‍स एंड मार्केटिंग) राकेश श्रीवास्‍तव ने मनीभास्‍कर के संवाददाता आशुतोष ओझा से विस्‍तार से बातचीत की। पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश:
सवाल: सरकार रोड सेफ्टी बिल लेकर आ रही है, जिसमें रिकॉल को अनिवार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही कंपनियों के लिए 2017 से सभी कारों में एयरबैग लगाना जरूरी होगा। इंडस्‍ट्री इसको कैसे देख रही है और हुंडई मोटर इंडिया इसके लिए कितनी तैयार है।
जवाब: देखिए, सेफ्टी हमारे लिए अहम है। ऑटो इं‍डस्‍ट्री के पैकिंग ऑर्डर के लिए यह काफी महत्‍वपूर्ण है। हमें खुशी है कि सरकार ने यह कदम उठाया है। हुंडई मोटर एक विश्‍वस्‍तरीय मैन्‍युफैक्‍चरर है। हम 100 देशों में मैन्‍युफैक्‍चरिंग और निर्यात कर रहे हैं। हम सरकार की तरफ से लाए जाने वाले सभी जरूरी रेगुलेशन का पालन करेंगे। हमारे पास तकनीक, क्षमता और प्रोडक्‍ट की विस्‍तृत रेंज उपलब्‍ध है। हां,सेफ्टी मानकों के लिए प्रा‍इसिंग एक इश्‍यू है। या, यूं कहे, यह एक इश्‍यू नहीं बल्कि एक चुनौती है। बाजार में उपलब्‍ध प्रोडक्‍ट की मौजूदा कीमतों पर सेफ्टी मानकों और फीचर्स की अनिवार्यता का पालन करना ऑटो कंपनियों के लिए निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। जहां तक हुंडई की बात है तो हम सेफ्टी मानकों के प्राइसिंग पर पड़ने वाले असर को ध्‍यान में रखते हुए एक उचित कीमत पर प्रोडक्‍ट लाने का प्रयास करेंगे।
सवाल: पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक व्‍हीकल्‍स के उत्‍पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार फेम (FAME) स्‍कीम लेकर आई है। क्‍या हुंडई भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक व्‍हीकल को लेकर कोई प्‍लानिंग कर रही है।
जवाब: हुंडई मोटर के पास इलेक्ट्रिक व्‍हीकल्‍स की टेक्‍नोलॉजी उपलब्‍ध है। हम अमेरिका और कोरिया में इलेक्ट्रिक व्‍हीकल बेच रहे हैं। सही समय पर हम भारतीय बाजार में इसके बारे में निर्णय करेंगे।
सवाल: बाजार में एंट्री लेवल कारों की बिक्री में नरमी दिखाई दे रही है। इसकी अहम वजह क्‍या मानते हैं और कंपनियों को इससे निपटने के लिए क्‍या कदम उठाने होंगे।
जवाब: बढ़ती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं का ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री को बड़ा लाभ होता है। खासकर एंट्री लेवल की बिक्री के मामले में यह एक अहम फैक्‍टर होता है। पिछले दो साल से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था दबाव झेल रही है। इसका असर ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री की सेल्‍स और ग्रोथ पर भी हो रहा है। इसकी वजह से इंडस्‍ट्री चुनौतीपूर्ण हालात का सामना कर रही है। यह सही है कि एक खास सेगमेंट में ही ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री में वृद्धि हो रही है। भारतीय ऑटो बाजार में 75 फीसदी हिस्‍सेदारी पैसेंजर कारों की है। इसमें वास्‍तविक ग्रोथ सेडान सेगमेंट में ही देखी जा रही है। ऑटो कंपनियां को इसे ध्‍यान में रखने की जरूरत है और उसके अनुसार प्रोडक्‍ट लाने की आवश्‍यकता है। एंट्री लेवल पर सेल्‍स बढ़ाने के लिए नए प्रोडक्‍ट के विकल्‍प ग्राहकों को उपलब्‍ध कराने होंगे। हुंडई मोटर इसको देखते हुए उचित कदम उठा रही है। हुंडई ने पिछले दो साल पांच प्रोडक्‍ट बाजार में उतारे हैं। हमारी स्‍ट्रैटजी साफ है और हम अर्थव्‍यवस्‍था की धीमी ग्रोथ के बावजूद नए प्रोडक्‍ट ला रहे हैं और निवेश कर रहे हैं। अर्थव्‍यवस्‍था में चैलेंज का असर एंट्री और कॉम्‍पैक्‍ट एंट्री लेवल पर होता है। क्‍योंकि दोपहिया वाहन चालक इस ओर रुख करता है। इसलिए इस सेगमेंट में चुनौती रहती है। जबकि टॉप वेरिएंट अच्‍छा करते हैं। इनकी हाई रिसेल वैल्‍यू होती है। कॉम्‍पैक्‍ट में सबसे बड़ा चैलेंज है।
अगली स्‍लाइड में पढ़ें- रूरल मार्केट में कैसी है हुंडई की मांग
सवाल: एंट्री लेवल कारों की बिक्री घटने का एक संदेश यह भी है कि कार कंपनियों की रूरल मार्केट में मांग कम हुई है। रूरल मार्केट की डिमांड में मानसून का अहम रोल माना जाता है। आपका क्या कहना है। जवाब: रूरल मार्केट में इंडस्ट्री के लिए डिमांड कम हो रही होगी, लेकिन हमारे लिए रूरल मार्केट में ग्रोथ बढ़ रही है। इस समय हुंडई मोटर इंडिया की कुल बिक्री में 21 फीसदी हिस्सेदारी रूरल मार्केट की है और यह लगातार बढ़ रही है। हमारे पास प्रोडक्ट की विस्तृत रेंज है। ईऑन, आई10, ग्रांड जैसे मॉडल रूरल मार्केट में ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। रूरल सेक्टर में ग्रोथ के लिए मजबूत ब्रांड और बेहतर सर्विस एश्योरेंस होना जरूरी है। हमारे पास स्ट्रांग प्रोडक्ट रेंज और सर्विस एश्योरेंस दोनों हैं। सर्विस एश्योरेंस चैनल पार्टनर से आती है। हुंडई के पास 320 रूरल सेल्स आउटलेट्स हैं। जहां तक मानसून की बात है निश्चित रूप से मानसून का असर रूरल इकोनॉमी पर पड़ता है। लोगों के पास वित्तीय उपलब्धता रूरल मार्केट की कार डिमांड में अहम रोल निभाती है। सवाल: डीजल डिरेग्युलेट होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच अंतर कम हुआ है। इससे ग्राहकों का रुझान एक बार फिर पेट्रोल मॉडल की ओर बढ़ रहा है। हुंडई इसे कैसे देख रही है और क्या इसके मद्देनजर नया प्लांट लगाने की कोई योजना है। जवाब: देखिए, कंपनियां डिमांड के अनुसार पेट्रोल और डीजल के कार मॉडल बाजार में उतारती हैं। हुंडई ग्राहक की डिमांड के अनुसार हर सेगमेंट की डिमांड पूरी करने में सक्षम है और हम उसके अनुसार वर्जन बनाएंगे। फिलहाल नया प्लांट खोलने की कोई योजना नहीं है। सवाल: क्रेटा के साथ हुंडई मास मार्केट एसयूवी सेगमेंट में कदम रखने जा रही है। इसमें निवेश, प्राइसिंग और निर्यात को लेकर कंपनी किस तरह की स्ट्रैटजी अपनाएगी। नए प्रोडक्ट लाने की क्या योजना है। जवाब: वर्ल्ड क्लॉस प्रोडक्ट बनाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है। क्रेटा पर हमने करीब 1000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। क्रेटा 90 फीसदी लोकलाइज्ड प्रोडक्ट है। सप्लाई चेन पर भी हमने अच्छा निवेश किया है। जहां तक प्राइसिंग का मामला है तो वह प्रोडक्ट की पोजिशन और फीचर पर निर्भर करती है। क्रेटा एक वर्ल्ड क्लास और फुली स्ट्रांग एसयूवी है। इसकी प्राइसिंग को लेकर हमारा रुख एग्रेसिव रहेगा। इसमें वैल्यू प्रपोजिशन को ध्यान में रखा गया है। वैल्यू दो तरह से तय होती है। पहला, फीचर और दूसरा रॉ मटीरियल, आरएंडडी व डिजाइन। हुंडई की क्रेटा में ये दोनों हैं। क्रेटा चार मीटर से अधिक की एसयूवी होगी। ग्राहक फुल एसयूवी चाहते हैं। खासकर स्पेस और सेफ्टी के लिहाज से। हम क्रेटा के जरिए के फुल और मॉर्डन और प्रीमियम एसयूवी फील देंगे। निर्यात हमारी बिजनेस स्ट्रैटजी का अहम हिस्सा है। सात साल से हम टॉप एक्सपोर्टर बने हुए हैं। क्रेटा का भी निर्यात किया जाएगा। लेकिन, अभी हमारा फोकस घरेलू बाजार पर है। हुंडई हर साल कम से कम दो प्रोडक्ट ला रही है।
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