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नौकरी छोड़ इस लड़की ने शुरू किया अनोखा बिजनेस, आज कमा रही हैं लाखों

उत्‍तराखंड के एक लड़की की है जो गांव की नेचुरल रिर्सोसेज का इस्‍तेमाल करके दूसरों के लिए आगे बढ़ने का रास्‍ता दिखा रही रही है।

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नई दिल्‍ली। आमतौर पर लोग विकास का पैमाना शहरों को मानते हैं, लेकिन, अब ऐसा नहीं है। देश के दूर-दराज इलाकों और पहाड़ों के बीच रहने वाली युवा पीढ़ी विकास की नई कहानी अपने मेहनत के दम पर लिख रही है। एग्रीकल्‍चर के क्षेत्र में भी लोग मौके खोज रहे हैं और कामयाबी हासिल कर रहे हैं। सफलता की ऐसी ही कहानी उत्‍तराखंड के एक लड़की की है जो गांव की नेचुरल रिर्सोसेज का इस्‍तेमाल करके दूसरों के लिए आगे बढ़ने का रास्‍ता दिखा रही रही है। ऐसे में आइए जानते हैं मशरूम गर्ल के नाम से फेमस दिव्‍या रावत की सफलता की कहानी के बारे में….
 
दिव्‍या रावत ने Moneybhaskar को बताया कि इस कारोबार की शुरुआत हमने 3 लाख रुपए से शुरु की थी। पिछले साल कंपनी का टर्नओवर 30 लाख रुपए था, जो कि आने वाले फाइनेंशियल ईयर में करीब 1 करोड़ रुपए का हो जाएगा। दिव्‍या ने कहा कि आज की युवापीढ़ी लग्‍जरियस लाइफ जीने की आदी हो गई है उसे थोड़ा चैलेंज स्‍वीकार करना चाहिए। यदि आप कोई काम करने की सोच लें तो सफलता अवश्‍य आपकी कदम चुमेगी।
 
अगली स्‍लाइड में पढ़े, दिव्‍या रावत की सफलता की कहानी के बारे में विस्‍तार से….
 
जॉब छोड़कर शुरू किया था कारोबार
 
उत्‍तराखंड में मशरूम लेडी के नाम से फेमस दिव्या रावत ने नोएडा के एमिटी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद मोटी सैलरी की जॉब छोड़ गांव का रुख किया। दिव्या को बचपन से ही खेती करने में बहुत दिलचस्पी थी। अपनी इसी दिलचस्‍पी की वजह से दिव्‍या ने एक छोटे से कमरे में 100 बैग मशरूम प्रोडक्‍शन का कारोबार शुरू किया। आज दिव्‍या अपने कारोबार में सफलता पाने के साथ यहां रहने वाले किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत भी हैं। दिव्‍या रावत की इस अनूठे पहल से यहां पलायन में कमी आई है।
 
 
मशरूम गर्ल के नाम से फेमस हैं दिव्‍या
 
मशरूम गर्ल के नाम से मशहूर दिव्‍या रावत कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। दिव्या ने बताया कि एमिटी यूनिर्वसिटी नोएडा से बीएचडब्ल्यू में उच्च शिक्षा और इसके बाद इग्नू से सोशल वर्क में मास्टर डिग्री लेने के बाद शक्ति वाहिनी एनजीओ में कुछ दिनों तक जॉब भी किया। अपना बिजनेस शुरू करने से पहले डिपार्टमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर, देहरादून से एक हफ्ते का मशरूम प्रोडक्‍शन का ट्रेनिंग भी लिया। दिव्‍या ने कहा कि, हमने यही सीखा, पहले अपना काम खुद करो, फिर दूसरों को सीख दो। 
 
खंडहर पड़े मकान से शुरू किया बिजनेस  
 
दिव्या रावत के इस फैसले से उनके घर वाले भी हैरान थे। दिव्या ने सबसे अलग पहाड़ों में खंडहर पड़े मकानों से अपने मशरूम का कारोबार शुरू किया। आज इनकी कंपनी का प्लांट कई बहुमंजिला ईमारतों का सफ़र तय कर चुकी हैं। इतना ही नहीं अब दिव्‍या की ये कंपनी मिनिस्‍टरी ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स को 31 मार्च, 2016 को बैलेंस सीट फाइल की है।
 
किसानों को दिया सफल होने का मंत्र  
 
दिव्‍या ने ऐसे समय में इस करोबार की शुरुआत की जब किसान आलू 8 से 10 रुपए प्रति किलो की दर से बेंच रहे थे। दिव्‍या से प्रेरणा लेकर यहां के अधिकांश किसान अब मशरूम का उत्‍पादन करके 150 से 200 रुपए प्रति किलो की दर पर इसको मार्केट में बेंच रहे हैं।
 
सौम्‍य फूड नाम से शुरू किया कंपनी
 
दिव्या ने शुरुआती सफलता के बाद 23 सितंबर, 2013 को सौम्य फ़ूड प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी बनाई। इसके बाद एक ‘सौम्‍य फूड’ नाम से एक ब्रांड का प्रोडक्‍शन शुरू किया।  दरअसल मशरूम के उत्पादन के लिए बड़े बुनियादी ढांचे की जरूरत पड़ती है। लेकिन, दिव्या ने इन ढांचों में कुछ सकारात्मक बदलाव किए। इसकी वजह से अब कोई भी 30 हजार रुपए का निवेश कर इस कारोबार को शुरू कर सकता है। इसके लिए दिव्‍या की कंपनी मदद करती है और ट्रेनिंग भी देती है।
 
 
प्रेक्टिकल ट्रेनिंग भी देती हैं दिव्‍या 
 
मशरूम लेडी के नाम से मशहूर देहरादून की छोटी कद काठी की दिव्‍या रावत आज बड़े-बड़ों को बिजनेस का हुनर सीखा रही है। दिव्या का घर न सिर्फ मशरूम की प्रयोगशाला है, बल्कि सीखने वालों के लिए किसी उच्च कोटि के संस्थान से भी कम नहीं। जहां, वह सीखने वालों को न सिर्फ प्रेक्टिकल ज्ञान देती हैं, बल्कि थ्योरी भी समझाती है। इस प्लांट में सालभर में तीन तरह का मशरूम उत्पादित किया जाता है। दिव्‍या ने कहा कि मैं कोई असाधारण काम नही कर रही हूं। मैं बस एक सामाजिक दायित्व को निभा रही हूं, जिससे लोगों की जीविका और रोजगार जैसे सामाजिक चुनौतीओं का मुकाबला किया जा सके। 
 
 
महिलाओं को भी बनाया स्वावलंबी
 
दिव्या ने मोथरोवाला स्थित अपने घर में सौ बैग से काम शुरू किया था। मेहनत के बल पर यह कारोबार रफ्तार पकड़ ली। इसके बाद दिव्‍या ने अपने पैतृक गांव कंडारा, चमोली गढ़वाल जाकर महिलाओं को मशरूम उत्‍पादन का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाने की ओर हाथ बढ़ाया। दिव्या रावत 35 से 40 डिग्री तापमान में मशरूम उत्पादन कर इस क्षेत्र में रोजगार की नई संभावनाओं को जन्म दिया है। जबकि आम धारणा यही है कि मशरूम उत्पादन कम तापमान (20 से 22 डिग्री) में ही संभव है। 
 
 
दिव्‍या की पहल से पलायान पर अंकुश  
 
दिव्या रावत का मानना है कि युवाओं को रोजगार के लिए शहर में भटकने की बजाय ख़ुद का करोबार शुरू करना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो हम जैसे युवाओं को रोजगार की तलाश में शहर नही जाना पड़ेगा। दिव्‍या ने कई ऐसे किसानों और युवाओं को मदद की है जो लोग रोजगार की तलाश में शहरों की
ओर पलायन कर रहे थे। 
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