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आयुर्वेद है डाबर का डीएनए, अब है अगले 150 साल की तैयारी : चुटानी

डाबर इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर कृष्ण कुमार चुटानी का कहना है कि आयुर्वेदिक उत्पादों को समय की जरूरत के मुताबिक डेवलप करने और नये उत्पाद पेश करने की कंपनी की रणनीति से ही यह संभव हो रहा है।

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नई दिल्ली। इंडिया लिमिटेड का कारोबार आठ हजार करोड़ रुपये को पार कर गया है। डाबर इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर कृष्ण कुमार चुटानी का कहना है कि आयुर्वेदिक उत्पादों को समय की जरूरत के मुताबिक डेवलप करने और नये उत्पाद पेश करने की कंपनी की रणनीति से ही यह संभव हो रहा है। हम हर उत्पाद को हेल्थकेयर उत्पाद के रूप में पेश करते हैं जो लोगों के स्वास्थ्य को फायदा पहुंचाता है। बाबा रामदेव के पतंजली के बढ़ते कारोबार को वह अपने लिए प्रतिस्पर्धा न मानकर फायदेमंद बताते हुए कहते हैं कि इससे देश में आयुर्वेद की लोकप्रियता बढ़ रही है। डाबर के बिजनेस और आयुर्वेद उत्पादों के बढ़ते बाजार समेत तमाम मुद्दों पर कृष्ण कुमार चुटानी ने मनीभास्कर के संपादक हरवीर सिंह से लंबी बातचीत की।
पूरेे इंटरव्यू के लिए देखें वीडियो: 
 
सवाल – डाबर इंडिया 132 साल पुरानी आयुर्वेदिक कंपनी है। इतने लंबे समय तक किसी भी कंपनी को लोगों के बीच कामयाब बनाए रखना आसान काम नहीं है। आप मौजूदा परिवेश में डाबर और आयुर्वेद को किस तरीके से आगे जाते हुए देखते हैं।
 
जवाब – मैं इस पर दो बात कहना चाहूंगा। पहला, एक तो हर जनरेशन अपनेआप को पिछली जनरेशन से ज्यादा समझदार और टेक्नोलॉजी में आगे मानती है। डाबर 132 साल से हर जनरेशन को आयुर्वेद के साथ जोड़ पाई है। दूसरा, हम वही इंडियन चीजें, आयुर्वेद, योग और खादी अपना रहे हैं जिसे भूल गए थे। पूरा वर्ल्ड घूमने के बाद आयुर्वेद एक बार फिर से इंडिया में आया है। मौजूदा समय में डाबर आयुर्वेद में लीडरशिप पोजिशन लेने के लिए तैयार है। यहीं नहीं हम अगले 150 साल की तैयारी कर रहे हैं ताकि इतने सालों में डाबर की उपयोगिता बनी रहे।
 
सवाल - आज डाबर इंडिया देश की एक प्रमुख एफएमसीजी कंपनी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। आप पर्सलन केयर से लेकर फ्रूट जूस में है। आप डाबर इंडिया की पहचान किस तरह की कंपनी के तौर पर बताना चाहेंगे।
 
जवाब – डाबर एक हेल्थकेयर कंपनी है जिसका डीएनए आयुर्वेद है। हमारे प्रॉडक्ट की 5-6 केटेगरी है। हेल्थकेयर प्रॉडक्ट में ओटीसी और दवाइयां हैं। पर्सनल केयर में हेयर ऑयल, शैंपू, टूथपेस्ट हैं। बाकी कॉस्मेटिक कंपनी लुक गुड की बात करती हैं। हम लुक गुड के साथ बेनेफिट की बात करते हैं। हम अपने प्रॉडक्ट में नेचुरल और आयुर्वेद के आयाम को जरूर लेकर आते हैं।
 
सवाल - कंपनी हेल्थ, पर्सनल केयर, आयुर्वेदिक और फूड सेगमेंट में प्रमुख रुप से बिजनेस कर रही है। अभी सबसे ज्यादा ग्रोथ किस सेगमेंट में हो रही है।
 
जवाब – हमारा फूड, होमकेयर, स्किनकेयर, ओटीसी बिजनेस अच्छा कर रहा है।इसके अलावा हेल्थकेयर सेगमेंट में तेजी से डिमांड बढ़ी है। इसकी एक प्रमुख वजह से लोगों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ना है। ऐसा होने पर लोग लाइफस्टाइल और हेल्थ पर खर्च बढ़ाते हैं। तीन दशक पहले तक रोटी, कपड़ा, मकान मेन फोकस था। लेकिन अब एजुकेशन पर खर्च बढ़ा है। पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए हर वह चीज चाह रहे हैं जिससे उनकी नींव मजबूत हो और उनका फ्युचर अच्छा बने। सोसाइटी में ये परिवर्तन आ रहे हैं।
 
सवाल – क्या डाबर के ऐसे प्रॉडक्ट हैं जिनका नाम डाबर से बड़ा हो गया है। अब उन्हें डाबर ब्रांड की जरूरत नहीं हैं, वह प्रॉडक्ट अपने आप में ही ब्रांड बन चुके हैं।
 
जवाब – डाबर ने कई ब्रांड पैदा किए हैं। जैसे वाटिका हमने 1994 में लॉन्च किया था। तब ये डाबर वाटिका था। आज वाटिका अपने आप में बड़ा ब्रांड है कि जिसके नीचे नए प्रोडक्ट लॉन्च किए जा सकते हैं। रियल फ्रूट जूस को डाबर ने मैन्युफैक्चर किया। लेकिन आज ये बिना कंपनी के नाम के बड़ा मार्केट लीडर ब्रांड बन चुका है। फेम, ओडोनिल अलग ब्रांड है, जो बिना डाबर की मदद के बड़े बने हैं।
 
अगली स्लाइड में जानें – कैसे डाबर हनी बना बड़ा ब्रांड 
सवाल – आपके कुछ प्रोडक्ट हैं जो आपने दूसरी कंपनियों से खरीदे हैं जिसमें ओडोमॉस, ओडोनिल, फेम है। आपने इन्हें डाबर की प्रोफाइलिंग में कैसे जोड़ा या वो जैसे आए थे या उसे वैसे ही चला रहे हैं।
 
जवाब – ब्रांड और कंपनी के अनुसार बहुत सारे बदलाव किए गए। दो ऑर्गनाइजेशन की कल्चर अलग होती है। हमने दूसरी ऑर्गनाइजेशन के लोगों का वेल्कम किया। उन्हें अपनी कल्चर में ढाला। ये काफी अच्छे ब्रांड थे जिन्हें हमने लिया। कंपनी ने इनको बस थोड़ा और बेहतर बनाने की कोशिश की है।
 
सवाल – शहद में आपको कैसे बड़ा मौका दिखा क्योंकि पहले इसे एक दवाई समझा जाता था लेकिन अब ये लोगों की दिनचर्या में शामिल हो गया है। आप इसे एक्सपोर्ट भी करते हैं। साथ ही कई दूसरी कंपनियां इसके बिजनेस में आ गई हैं। 
 
जवाब – आज से 20 साल पहले जब डाबर ने इस कमोडिटी के बारे में सोचा तब ये एक अनऑर्गनाइज्ड मार्केट था। पहले शहद को दवाई माना जाता था। शहद किचन की अलमारी में या दवाई के बॉक्स में होता था। डाबर ने सोचा कि इसे मेन फूड में लाया जाए और इसे किचन के किसी कोने से निकालकर डाइनिंग टेबल पर लेकर आया जाए, जिससे इसकी कंजप्शन बढ़े। इंटरनेशनल और घरेलू मार्केट में आज से 10-15 साल पहले चीनी का इस्तेमाल कम होने का ट्रेंड आया। हमने इस मौके का फायदा उठाने के बारे में सोचा और इसे हेल्थ के लिए रिपोजिशन किया। 
सवाल - लेकिन अब तो शहद के बाजार में कड़ा कंपिटीशन बढ़ गया है। कई बार क्वालिटी पर सवाल उठे हैं इससे आपने कैसे पार पाया।
 
जवाब – हर कंपिटीशन आपको मजबूत बनाता है और यह होना भी चाहिए। पर्सनली मैं एक बात मानता हूं कि मार्केटिंग आपके प्रॉडक्ट को सिर्फ एक बार बेच सकती है। बार-बार कस्टमर आपका प्रॉडक्ट खरीदे इसके लिए प्रॉडक्ट की क्वालिटी अच्छी होनी जरूरी है। हम अपनी क्वालिटी पर बहुत ज्यादा इन्वेस्ट करते हैं। हनी की क्वालिटी चेक करने के लिए हमारे पास ऐसी मशीनें हैं, जो देश में किसी के पास नहीं है। हम इंडिया में सबसे ज्यादा हनी खरीदते और बेचते हैं। हमारा एक-एक बैच चेक होता है। हम एफएसएसएआई के सभी स्टैंडर्ड पर खरे उतरते हैं।
 
सवाल – पिछले 10 साल में आयुर्वेद का चलन काफी तेजी से बढ़ा है। यंग जनरेशन भी इसे एडॉप्ट कर रही है। कंपनी अपने आर एंड डी पर कितना खर्च कर रही है।
 
जवाब – आयुर्वेद आज से 2500 साल पहले लिखा गया है। अब उन स्क्रिप्ट को पढ़ना, समझना और फिर कन्ज्यूमर के लिए प्रॉड्क्ट के रूप में ढालना। ये सब डाबर में साइटिंस्ट कर रहे हैं। हमारे पास मैन्युफैक्चरिंग और आर एंड डी में 200 से अधिक साइंटिस्ट हैं। हम आर एंड डी पर अच्छा खासा इन्वेस्ट कर रहे हैं।
 
सवाल – आपके प्रॉडक्ट में प्लांट और हर्ब्स हैं। आप इन्हें कैसे और कहां सेजुटाते हैं। इससे किसानों को क्या फायदा हो रहा है।
 
जवाब – हमने ये महसूस किया कि कुछ प्लांट और हर्ब खत्म हो रहे हैं। हमने इनके विकल्प तलाशने शुरू किए। इन हर्ब्स को उगाने को लेकर काम किया। डाबर इस क्षेत्र में 15-20 साल से काम कर रहा है। हमारे करीब 3,000 एकड़ की फार्मिंग है। यहां डाबर अपनी और कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग कर रहा हैं। हम किसानों को भी बेस्ट हर्ब्स को उगाने के लिए शिक्षित करते हैं। अभी हम 1,250 किसानों के साथ सीधे काम कर रहे हैं और इसे 3,000 किसानों तक लेकर जाना चाहते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से लाखों की तादाद में लोग हमसे जुड़े हुए हैं क्योंकि हम हनी, आंवला, हर्ब्स सब खरीदते हैं।
 
सवाल – कंपनी की बिजनेस ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले कैसी रही है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में आपका प्रॉफिट और टर्नओवर कितना रहा है। वहीं चालू साल के पहले क्वार्टर में क्या ग्रोथ रही?
 
 
जवाब – पिछले साल कंपनी कीटर्नओवर 8,500 करोड़ रुपए रही जिसमें 8.1 फीसदी ग्रोथ रही है। प्रॉफिट 1,952 करोड़ रुपए रहा थी और यह 17.5 फीसदी बढ़ा था। इस साल के पहले क्वार्टर में टर्नओवर में चार फीसदी और प्रॉफिट में 11.8 प्रॉफिट ग्रोथ रही है।
 
सवाल – आप साल 2016-17 को कारोबार के लिहाज से किस तरह से देख रहे हैं।
 
जवाब – पूरी इंडस्ट्री में डिमांड थोड़ी कम है क्योंकि पिछले दो-तीन साल से मानसून अच्छा नहीं रहा। लॉन्ग टर्म में इसमें सुधार आएगा क्योंकि इस साल मानसून अच्छा रहा है। इस साल सेंटीमेंट पॉजिटिव होंगे। फसल कटेगी, इनकम आएगी और किसान अपने कर्ज कम करेंगे, तो रूरल मार्केट में डिमांड बढ़ेगी। डाबर का रूरल मार्केट काफी बड़ा है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि फेस्टिव सीजन शुरू होगा तो एफएमसीजी सेक्टर में डिमांड बढ़ेगी।
 
अगली स्लाइड में जानें – कंपनी की आगे के लिए क्या है स्ट्रैटजी
 
सवाल – कंपनी की अपना मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए क्या स्ट्रैटजी है।
 
जवाब – हमने सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बेहतर किया है। हम छोटे से छोटे गांव में उपलब्ध होने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरा हमारा आयुर्वेद पर काफी फोकस है और उसे लेकर स्ट्रैटजी बना रहे हैं।
सवाल – कंपनी के बिजनेस में इंटरनेशनल मार्केट की हिस्सेदारी क्या है। डाबर के इंटरनेशनल बिजनेस में कौन सी अहम मार्केट हैं।
 
जवाब – हमारा करीब एक तिहाई बिजनेस इंटरनेशनल मार्केट से आता है। सार्क कंट्री, दुबई, अफ्रीका और अमेरिका इसमें अहम हैं। हमारे सात देशों में प्रोडक्शन बेस है। नेपाल, श्रीलंका में जूस बनाते हैं। बांग्लादेश में पर्सनलकेयर और हेल्थकेयर है। दुबई और टर्की में पर्सनलकेयर प्रॉडक्ट्स की फैक्ट्री है।
सवाल - आयुर्वेदिक सेगमेंट में  बाबा रामदेव के पतंजलि से आपको चैलेंज मिल रहा है। पतंजलि 5,000 करोड़ के बिजनेस का दावा कर रही है और काफी तेजी से बढ़ कर रही है। क्या ये आपके मार्केट को डेंट कर रही है। क्या आप पतंजलि कोई थ्रेट मानते हैं।
जवाब – मुझे लगता है कि आयुर्वेदिक से ज्यादा फोकस उनका स्वदेशी है क्योंकि डिटर्जेंट प्रॉडक्ट आयुर्वेद नहीं हैं। उनकी स्ट्रैटजी अलग है। हां, उनके आने से आयुर्वेद को लेकर लोग और जागरूक हो गए हैं। पहले डाबर या एक- दो और कंपनी थी। हमारे प्रॉडक्ट पर पतंजलि का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। चाहे वह टूथपेस्ट हो या अन्य प्रॉडक्ट वह काफी बढ़ रहे हैं। पतंजलि से हमें कोई डर नहीं है। बल्कि, मेरे हिसाब से वो हमारे सहायक बन रहे हैं क्योंकि वह आयुर्वेद को बढ़ा रहे हैं।
 
 सवाल – आज की जेनरेशन डिजिटल जनरेशन है। इसे आप कैसे केटर कर रहे हैं।
 
जवाब – अब हम उन्हें मोबाइल और वेबसाइट पर ज्यादा टारगेट कर रहे हैं। इस जनरेशन ने नॉन डिजिटल देखा ही नहीं है। ये उठने के साथ और सोने से पहले ऑनलाइन होते हैं। ऑफलाइन कोई चीज होती ही नहीं है। उनके लिए डाबर उनके हिसाब से वेबसाइट लॉन्च कर रहे हैं।
 
 
 
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