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कोई नहीं कॉपी कर पाया बोरोलिन का नुस्‍खा, आजादी मिली तो बंटी थी मुफ्त

आजादी के समय मुफ्ट बंटी थी बोरोलिन, 87 साल पुराने फॉर्मूले से आज भी हिट, अंग्रेजों से लोहा लेने को शुरू हुई थी कंपनी पर आज तक नहीं है कर्ज

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नई दिल्‍ली। सर्दियों का मौसम शूरू होने वाला है। ऐसे में बॉडी को खुश्‍की से बचाने के लिए ज्‍यादातर लोग क्रीम यूज करेंगे। इस लिस्‍ट में जिस क्रीम का नाम सबसे पहले आता है वह है बोरोलिन। कभी अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए गांधी जी के आह्वान पर शुरू की गई यह क्रीम आज भी लगभग हर घर में देखने को मिल जाएगी। यही नहीं देश जब आजाद हुआ तो कंपनी ने इस खुशी में लोगों के बीच बोरोलिन के एक लाख ट्यूब मुफ्त बांटे थे। आइए बताते हैं इससे जुड़े कुछ रोचक फैक्‍ट के बारे में...
 
एक देश एक क्रीम
  • बोरोलिन एक ऐसी क्रीम है, जिसका यूज कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक होता है। मतलब यह कहा जा सकता है कि यह क्रीम देश को एक करती है।
  • कश्‍मीर के लोग जहां सर्दी में त्‍वचा को खुश्‍की से बचाने के लिए इस क्रीम का यूज करते हैं, वहीं केरल और तमिलनाडु जैसे सुदूर के राज्‍य झुलसती गर्मी से अपनी त्‍वचा को बचाने के लिए यह क्रीम लगाते हैं।
  • हालांकि क्रीम का फॉर्मूला एक ही है, जो भारी गर्मी और सर्दी दोनों में काम आ जाता है। 
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फॉर्मूला ऐसा जो कश्‍मीर की सर्दी और केरल की गर्मी दोनो से राहत दिलाए
  • बोरोलिन का फॉर्मूला ऐसा है तो उत्‍तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम देश के हर हिस्‍से में काम आता है।
  • बोरोलिन को बोरिक पावडर, लैनोलिन और जिंक एसिड की मदद से बनाया जाता है।
  • इसमें बोरिक पावडर एंटीसेप्टिक का काम करता है, जिसके चलते इसे दक्षिण के लोग भी यूज कर लेते हैं।
  • वहीं लैनोलिन कटी छिली त्‍वचा को नरम बनाने का काम करती है।
  • जबकि जिंक एसिड गर्मी से त्‍वचा की रक्षा करता है।
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महात्‍मा गांधी की सोच से बना प्रोडक्‍ट
  • बोरोलिन की शुरुआत करीब 87 साल पहले 1929 में महात्‍मा गांधी की स्‍वदेशी अपनाने के आह्वान पर हुई।
  • एक ब्‍लॉग के मुताबिक, 1920 के आसपास गांधी जी के कहने पर अंग्रोजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन का आगाज हुआ। इसमें ब्रिटिश रूल और विदेशी कंपनियों के खिलाफ लोगों में भारी गुस्‍सा था।
  • जगह-जगह विदेशी कपड़ों की होली जलाई जा रही थी। ऐसे में इस बात की जरूरत महसूस की जाने लगी कि विदेशी प्रोडक्‍ट के खिलाफ देसी कंपनियां भी खड़ी होनी चाहिए।
  • इसी से प्रेरित होकर 1929 में गौर मोहन दत्ता ने जीडी फार्मास्यूटिकल्स की कलकत्ता में नींव डाली।
  • इसी कंपनी ने बोरोलिन का प्रोडक्‍शन शुरू किया और एक दौर ऐसा आया जब यह क्रीम देश के घर घर में पहचानी जाने लगी।
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लॉन्चिंग के साथ ही लोगों ने लिया हाथों-हाथ
  • उस दौर में देश में जयादातर क्रीम को इम्‍पोर्ट किया जाता था, या फिर लोग लोग घरेलू तरीके से आयुर्वेदिक क्रीम बनाते थे, लेकिन लॉन्चिंग के साथ ही बोरोलिन ने तेजी से पॉपुलैरिटी बटोरी और धीरे-धीरे अपनी पहचान घर-घर में बना ली।
  • एक ब्‍लॉग के मुताबिक, उस दौर में बोरोलीन की बढ़ती लोकप्रियता से ब्रिटिश कंपनियां परेशान हुईं और उनके मालिकों के कहने पर ब्रिटिश सरकार ने औद्यौगिक सुविधाओं की राह में रोड़े अटकाने की कोशिश की।
  • हालांकि इसके बाद भी कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और स्‍वदेशी के हथियार से अंग्रेजों का मुकाबला करती रही।
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87 साल का सफर और एक भी कर्ज नहीं
  • बोरोलिन की शुरुआत हुए करीब 87 साल हो गए हैं, मगर आज भी कंपनी की माली हालत पर कोई असर नहीं है।
  • अंबानी, माल्‍या और अडाणी जैसे बड़े औद्यौगिक घरानों की कंपनिया जहां आज हजारों करोड़ के कर्ज में डूबी हैं वहीं स्वदेशी मॉडल की इस कंपनी पर सरकार का एक रुपया भी कर्ज नहीं है।
  • बिना किसी मार्केटिंग तामझाम के भी यह कंपनी 2015-16 में 105 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू हासिल करने में सफल रही। बोरोलिन प्रोडक्ट की लोकप्रियता का ही नतीजा है।
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न क्वालिटी से समझौता किया न फॉर्मूला बदला
  • कोलकाता के जोका इलाके में स्थित 28 एकड़ की फैक्ट्री से बनने वाली बोरोलिन 87 साल बाद भी लोकप्रिय है तो इसका क्वालिटी कंट्रोल।
  • कंपनी ने क्रीम की गुणवत्ता से कभी समझौता नही किया। फॉर्म्युला भी पहले जैसा रहा। मुख्य रूप से बोरिक पाउडर, जिंक आक्साइड, जरूरी तेल, पैराफिन के फार्मूले से बोरीलीन तैयार होता है।
  •  1929 में शुरू हुए जीडी फार्मास्युटिकल्स की पहचान यूं तो बोरोलीन से ही है, काफी समय बाद 1990 में कंपनी ने Eleen hair oil शुरू किया।
  • फिर 2003 में कंपनी ने स्किन लिक्विड Suthol  लॉन्‍च किया। मगर GD Pharmaceuticals Pvt. Ltd  की पहचान बोरोलीन से ही आज तक कायम है।
आगे पढ़ें- तीसरी पीढ़ी चला रही कंपनी
 
तीसरी पीढ़ी चला रही कंपनी
 
  • बोरोलिन की शुरुआत करीब 87 साल पहले हुए थी और गौर मोहन दत्‍ता ने इसकी शुरुआत की थी।
  • मौजूदा दौर में उनके पौत्र 44 वर्षीय देबाशीष दत्‍ता अब कंपनी को चला रहे हैं।
  • इससे पहले देबाशीष के पिता के कंपनी चलाया करते थे।
आगे की स्‍लाइड में पढ़ें- जवाहर लाल नेहरू से लेकर राज कुमार तक लगाते थे बोरोलिन
 
जवाहर लाल नेहरू से लेकर राज कुमार तक लगाते थे बोरोलिन
  • बोरोलिन को पॉपुलैरिटी यूं तो धीरे धीरे मिलनी शुरू हो चुकी थी। लेकिन इसे सबसे ज्‍यादा पॉपुलर दो लोगों ने बनाया।
  • इनमें पहला नाम अभिनेता राजकुमार और दूसरा नाम देश का पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू का है।
  • इन दोनों हस्तियों की ओर से यूज किए जाने के बाद बोरोलिन को तेजी से पॉपुलैरिटी मिली।  
आगे पढ़ें- देश को आजादी मिली तो फ्री में बांटी 1 लाख बोरोलिन 
 
देश को आजादी मिली तो फ्री में बांटी 1 लाख बोरोलिन 
 
  • जीडी फार्मा एक राष्‍ट्रवादी कंपनी थी। यही कारण है कि देश जब 15 अगस्‍त 1947 को आजाद हुआ तो कंपनी ने इसे अपने तरीके से सेलिब्रेट किया।
  • मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तब गौर मोहन दत्‍ता के बेटे कंपनी के एमडी थे।
  • उन्‍होंने आजादी के मौके पर बोरोलिन की 1 लाख ट्यूब मुफ्त में बंटवाई थी। 
आगे की स्‍लाइड में देखें- कंपनी का पिछले 3 साल का प्रॉफिट 
 
कोई भी नहीं कॉपी कर पाया फॉर्मूला
  • बोरोलिन का फॉर्मूला ऐसा है कि आज तक इसे कोई भी कॉपी नहीं कर पाया है।
  • जीडी फॉर्मा  के एमडी देबाशीष दत्‍ता कहते हैं कि उनके इस प्रोडक्‍ट को कॉपी करने की बहुत सी कोशिशें हुई, लेकिन आज तक कोई इसमें कामयाब नहीं हो पाया।
  • दत्‍ता के मुताबिक, इसका फॉर्मूला यूं तो बेहद सिंपल है, लेकिन इसके बाद भी असरदार है।
  • यही कारण है कि हमने आजतक इसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया।  
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