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अनिल अंबानी ही नहीं ये छोटे भाई भी बिजनेस में रह गए पीछे

अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने में अनिल अंबानी अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी से बहुत पीछे रह गए।

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नई दिल्ली. अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने में अनिल अंबानी अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी से बहुत पीछे रह गए। इंडियन कॉरपोरेट वर्ल्ड में सिर्फ अनिल अंबानी ही नहीं कई दूसरे बिजनेसमैन भी हैं, जो कारोबार के मामले में अपने बड़े भाई से पीछे रह गए। आइए जानते हैं कॉरपोरेट वर्ल्ड के ऐसे ही छोटे भाईयों के बारे में...

 

 

बड़े भाई सज्जन जिंदल से पिछड़े नवीन जिंदल

 

नवीन जिंदल की कंपनी जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के स्टील और पावर बिजनेस पर कोयले की कमी के कारण बुरा असर पड़ा जिसके कारण उनकी कंपनी पर लगातार कर्ज का दबाव बढ़ रहा था। छोटे भाई को कर्ज से उबारने और कारोबार को सहारा देने के लिए नवीन जिंदल के बड़े भाई सज्जन जिंदल ने मदद की। सज्जन जिंदल की कंपनी जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड ने जिंदल पावर लिमिटेड का छत्तीसगढ़ के 1,000 मेगावाट पावर प्लांट खरीदा। ऐसा माना जाता है कि यह सौदा करीब 6,500 करोड़ रुपए में हुआ।

 

नवीन जिंदल ने कर्ज के कारण बेचा प्लांट

 

स्टील के दाम में गिरावट और कर्ज बढ़ने के चलते जेएसपीएल को कैश की कमी का सामना करना पड़ रहा था। डील के तहत इस प्लांट का कुछ कर्ज जेएसडब्ल्यू पर शिफ्ट हुआ। बीते साल जेएसपीएल पर है 49 हजार करोड़ का कर्ज था। कारोबार में सफलता की बात की जाए तो नवीन जिंदल अपने बड़े भाई सज्जन जिंदल की तुलना में उतना अच्छा नहीं कर पाए।

 

आगे पढ़े - शापूर जी मिस्त्री और साइरस मिस्त्री के बारे में..

साइरस मिस्त्री अपने बड़े भाई शापूर जी मिस्त्री रह गए पीछे..

 

पालोनजी मिस्त्री के बड़े बेटे और साइरस मिस्त्री के बड़े भाई शापूरजी मिस्त्री काफी लो-प्रोफाइल रहते हैं। वह मीडिया में भी कम ही नजर जाते हैं। वह 4.2 अरब डॉलर रेवेन्यू वाले शापोरजी पालोनजी ग्रुप के चेयरमैन हैं। शापूरजी मिस्त्री 47 साल के हैं। शापूरजी की तुलना में साइरस मिस्त्री खबरों में ज्यादा बने रहते हैं। हालांकि, अगर कारोबार में सफलता की बात करें तो साइरस मिस्त्री टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया लेकिन बाद में उन्हें इस पद से हटा दिया गया। अभी साइरस मिस्त्री का टाटा संस और शापोरजी पालोनजी ग्रुप में कोई पद नहीं है.

 

 

आगे पढ़े - रतन और नोएल टाटा के बारे में.. 

रतन टाटा जितने नहीं सफल हुए नोएल टाटा

 

जेआरडी टाटा ने टाटा ग्रुप को इंडिया के बड़े कॉरपोरेट हाउस के तौर पर खड़ा किया। रतन टाटा ने इससे आगे जाकर एक ग्लोबल पहचान दी। उन्होंने साल 1961 में ग्रुप को ज्वाइन किया और 1991 में वह टाटा संस के चेयरमैन बने। वह 21 साल तक चेयरमैन के पद पर रहे। उनके टर्म कें ग्रुप का रेवेन्यू 40 गुना और प्रॉफिट 50 गुना बढ़ा। कोरस, जेगुआर और लैंड रोवर, टेटली टी जैसी ग्लोबल ब्रांड को टाटा ग्रुप ने खरीदा।

 

नोएल टाटा रह गए पीछे

 

वहीं टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के छोटे सौतेले भाई नोएल टाटा ट्रेंट लिमिटेड के वाइज चेयरमैन है। कारोबार को आगे बढ़ाने में नोएल अपने बड़े भाई रतन टाटा जितना आगे नहीं बढ़ पाए।

 

आगे पढ़े - अपने बड़े भाई मुकेश से कितना पीछे रह गए अनिल अंबानी 

अपने बड़े भाई से बहुत पीछे रह गए अनिल अंबानी

 

साल 2002 में धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद दोनों भाइयों में बिजनेस को लेकर खींचतान होने लगी, जिसके कारण अंबानी परिवार साल 2005 में दो हिस्सों में बंट गया। आखिर में उनकी मां कोकिलाबेन को सेटलमेंट करना पड़ा। जब दोनों भाई अलग हुए, तब मुकेश अंबानी का रेवेन्यू अपने छोटे भाई की कंपनी की तुलना में 4.5 गुना अधिक था।

 

- अब अलग होने के 12 साल बाद मुकेश अंबानी 38 बिलियन डॉलर नेटवर्थ के साथ देश के सबसे अमीर बिजनेसमैन हैं। - - अनिल अंबानी 2.2 बिलियन डॉलर की नेटवर्थ के साथ देश के 45वें अमीर कारोबारी है।

 

- अनिल अंबानी की कंपनी आर-कॉम के शेयर बुधवार को 10 रुपए से नीचे आ गए। आर-कॉम पर कुल 45,000 करोड़ रुपए का कर्ज है।

- अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) की कंपनियों में इन्वेस्टर के करीब 4,104 करोड़ रुपए डूब चुके हैं।

 

 

 

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