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TV के सामने था सबसे बड़ा चैलेंज, इस कंपनी ने बना दिया उसी को बिजनेस

नई दिल्‍ली. अक्‍सर माना जाता है कि मुश्किल मुसीबत लेकर आती है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो मुश्किल को ही बिजनेस में तब्‍दील कर देते हैं। यह कहानी KA श्र‍ीनिवासन, श्रीविद्या श्रीनिवासन और भास्‍कर सुब्रमण्‍यन की है। इन्‍होंने टेलिविजन इंडस्‍ट्री की सबसे जटिल मुसीबत को अपने बिजनेस का आइडिया बना डाला और 2008 में अपनी कंपनी खोली। आज उनकी कंपनी देश के टॉप न्‍यूज और टीवी चैनल की मदद कर रही है। कंपनी के प्रमोटर्स ने अपनी कहानी भास्‍कर डॉटकॉम के साथ साझा की। 
 
मुश्किल में थी टीवी इंडस्‍ट्री 

यूं तो TV को मीडिया का सबसे मजबूत माध्‍यम माना जाता है। हालांकि कमाई के हिसाब से देखा जाए तो यह आज भी पारंपरिक प्रिंट मीडिया से आगे नहीं निकल पाया है। इसके चलते गली मुहल्‍ले और नुक्‍कड़ों से आपको अखबार या मैगजीन निकलते तो दिख जाएंगे, लेकिन टीवी चैनल आपको गिनती के ही मिलेंगे। दरअसल इसके पीछे इन्‍वेस्‍टमेंट से ज्‍यादा एड (विज्ञापन) का खेल है। सिर्फ एक ही विंडो होने के चलते टीवी के पास एड दिखाने की गुंजाइश बेहद कम है। ज्‍यादा एड दिखाने पर जहां दर्शक रिमोट बदल सकता है। बिना एड के किसी चैनल का मार्केट में टिके रहना बेहद मुशिकल हो जाता है।

 

मुश्किल को बनाया बिजनेस 
भास्‍कर और उनके साथियों को इसी मुसीबत से एक आइडिया आया। उन्‍होंने टीवी में जियो टार्गेटिंग की नई तकनीक पर काम शुरू किया। इसके तहत कंपनी एक ही टीवी चैनल पर एक ही समय में अलग-अगल रीजन में अलग-अलग एड ब्रॉडकास्‍ट कराती है। मतलब आप अगर दिल्‍ली और मुंबई में बैठकर एक समय में एक ही चैनल पर कोई प्रोग्राम देख रहे हैं तो दोनों शहरों में प्रोग्राम तो एक ही दिखाई पड़ेगा, लेकिन ब्रेक के दौरान जो एड आएंगे, वो अलग-अलग होंगे। मतबल एक ही समय में चैलर दो अलग-अलग रीजन में अलग-अलग कंपनियों के एड चला सकता है। इसी प्रोसेस को जियो टार्गेटिंग कहते हैं। कंपनी का दावा है कि उसके पास पेटेंट टेक्‍नोलॉजी है। 

 

ऐसे काम करती है कंपनी 
भास्‍कर के मुताबिक, अमागी 2 तरीके से काम करती है। कंपनी ब्रॉडकास्टर्स से नेशनल एड की इन्वेंट्री खरीदती है। इस इन्वेंट्री को रीजनल बेसिस पर डिट्रीब्‍यूट कर देते है। इसके चलते किसी भी ब्रॉड कास्‍टर के पास पहले के मुकाबले ज्‍यादा विज्ञापन आ जाते हैं। साथ ही कंपनी ब्रॉड कॉस्‍टर को अपनी सर्विस भी देती है। इसके तहत कंपनी जियो टार्गेटिंग सपोर्ट मुहैया करती है और एड का काम ब्राड कॉस्‍टर के पास ही रहता है। 

 

 

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