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अब छत पर बनेगा मिनरल वाटर, आ रही है नई टेक्‍नोलॉजी

अमेरिका में एक शख्‍स ने ऐसी टेक्‍नोलॉजी ईजाद की है, जिससे आप छत पर मिनरल वाटर बना सकते हैं और यह पूरी तरह सेफ होता है।

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नई दिल्‍ली. अब तक छत पर सोलर पैनल से बिजली बनती थी लेकिन अब इनसे मिनरल वाटर भी बन सकेगा। जी हां अमेरिका में एक शख्‍स ने ऐसी टेक्‍नोलॉजी ईजाद की है, जिससे आप छत पर मिनरल वाटर बना सकते हैं और यह पूरी तरह सेफ होता है। बिजनेस वेबसाइट फोर्ब्‍स ने पीने का पानी बनाने वाली इस टेक्‍नोलॉजी और इसकी प्रोसेस पर एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेक्‍नोलॉजी को अमेरिका के एरिजोना में रहने वाले कोडी फ्रिसन ने ईजाद किया है। फ्रिसन केवल अपने घर की छत पर ही नहीं बल्कि अमेरिका के कई इलाकों समेत 8 अन्‍य देशों में भी इस वाटर मेकिंग सिस्‍टम को इन्‍स्‍टॉल कर चुके हैं। साथ ही उनके स्‍टार्टअप जीरो मास वाटर ने इसकी बिक्री भी शुरू कर दी है। 

 

आइए आपको बताते हैं कि इस टेक्‍नोलॉजी से कैसे बनता है पानी और अभी कितनी है इसकी लागत-

कौन हैं कोडी फ्रिसन 


- कोडी फ्रिसन एक मैटेरियल साइंटिस्‍ट हैं और एरिजोना स्‍टेट यूनि‍वर्सिटी में इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं। 
- फ्रिसन ने 2014 में जीरो मास वाटर स्‍टार्टअप शुरू किया था, जो इस तरह का सिस्‍टम बनाता है। 

 

आगे पढ़ें- कैसे बनता है पानी

हवा से बनता है वाटर

 
- इस सिस्‍टम में छत पर दो डिवाइस लगाई जाती हैं, जिन्‍हें सोर्स हाइड्रोपैनल कहा जाता है। ये पैनल्‍स सोलर पैनल्‍स की तरह ही होते हैं। 
- यह सिस्‍टम हवा से मॉइश्‍चर लेता है और उससे पानी बनाता है। 
- इस सिस्‍टम से 5 लीटर प्रतिदिन की दर से पानी हासिल किया जा सकता है। 

 

आगे पढ़ें- केवल पीने का पानी बना सकने की है क्षमता 

केवल पीने के पानी के लिए है टेक्‍नोलॉजी 


- फ्रिसन का कहना है कि यह टेक्‍नोलॉजी केवल पीने के पानी के लिए है। इससे इतना पानी नहीं बन सकता कि घर और इंडस्ट्रियल यूज के बाकी के काम किए जा सकें। 
- फ्रिसन का मानना है कि जल्‍द ही इस सिस्‍टम से घरों, स्‍कूलों और कॉरपोरेट बिल्डिंग्‍स में साफ, गुणवत्‍तापूर्ण पीने का पानी मुहैया हो सकेगा। इससे न केवल शहरों में बल्कि गांवों, सूखाग्रस्‍त क्षेत्रों आदि में भी पानी उपलब्‍ध हो सकेगा। 

 

आगे पढ़ें- कहां लग चुके हैं सिस्‍टम 

फ्रिसन कहां-कहां लगा चुके हैं सिस्‍टम 


- फ्रिसन इस वाटर मेकिंग सिस्‍टम को इक्‍वाडोर, जॉर्डन, मेक्सिको और फिलीपींस समेत 8 देशों में इन्‍स्‍टॉल कर चुके हैं। अमेरिका में उनके पैनल्‍स नॉर्थ कैरोलिना के ड्यूक एनर्जी फैसिलिटी, कैलिफोर्निया में सैंटा मोनिका की एक ऑफिस बिल्डिंग, खाड़ी क्षेत्र के और एरिजोना के कुछ घरों व स्‍कूलों में लगे हुए हैं। 
- जीरो मास में इन्‍वेस्‍टर्स के 155.9 करोड़ रुपए लगे हैं और इसने अमेरिका में इस वाटर मेकिंग सिस्‍टम की बिक्री शुरू कर दी है।

  

आगे पढ़ें- कितनी पड़ेगी लागत 

कितनी है इस सिस्‍टम की लागत 


- घर में इस वाटर मेकिंग सिस्‍टम को लगाने की लागत 2.92 लाख रुपए पड़ेगी। 
- अमेरिका में हर रोज बॉटल्‍ड वाटर खरीदने वालों के द्वारा खर्च किए जाने वाले पैसों के हिसाब से यह 5 सालों का खर्च है। 
- इसके अलावा दो पैनल्‍स के जरिए 70,000 प्‍लास्टिक बोतल का इस्‍तेमाल घट जाएगा। 
- साथ ही स्‍कूलों में यह सिस्‍टम लगाना मौजूदा पानी साफ करने वाले सिस्‍टम्‍स से सस्‍ता पड़ेगा। 

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