Loksabha Election 2019 /गाड़ियों को मॉडिफाइ कर बुलेट प्रूफ बनाने और स्लोगन रचने वाली कंपनियों की चांदी, झंडे पोस्टर का धंधा मंदा 

  • चुनाव में इस बार 50 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान 
  • चुनाव प्रचार के लिए नेताओं को लक्जरी प्राइवेज जेट भा रहे हैं तो रैली के लिए गाड़ियां मॉडिफाइ हो रही हैं।

 

money bhaskar

May 08,2019 12:52:29 PM IST

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2019 में कई नए ट्रेंड भी सामने आ रहे हैं। चुनाव प्रचार के लिए नेताओं को लक्जरी प्राइवेज जेट भा रहे हैं तो रैली के लिए गाड़ियां मॉडिफाइ हो रही हैं। यही नहीं, गाड़ियों को बुलेट प्रूफ बनाने वाली कंपनियों की भी चांदी हो गई है। इस सबसे इतर पारंपरिक तरीके से चुनाव प्रचार का धंधा मंदा है। झंडे, बैनर, पोस्टर अब गायब हैं। इसकी जगह सोशल मीडिया में स्लोगन लिखने वाली कंपनियों ने ले ली है। चुनावी मौसम में इसी बात की तफ्तीश करती यह खास रिपोर्ट।

रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसदी ज्यादा खर्च होगी रकम


सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज की रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार 40% ज्यादा रकम खर्च हो रहा है। इस चुनाव में करीब 50 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। जाहिर है इतनी बड़ी रकम में हिस्सा पाने के लिए कई तरह की कंपनियां प्रोडक्ट और सर्विसेज के साथ होड़ कर रही हैं। चुनावी मौसम में बड़ा मुनाफा कमा रही ऐसी ही कंपनियों पर एक नजर डालते हैं। गौरतलब है कि अलग-अलग पार्टियां 90 करोड़ वोटरों को रिझाने के लिए मैदान में डटी हुई हैं। इसे दुनिया का अब तक का सबसे खर्चीला चुनाव भी माना जा रहा है।

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एक कार मॉडिफाई करने में 6 से 40 लाख रु. का खर्च


चुनाव में छोटे-बड़े हजारों नेता जनसंपर्क और रैलियां कर रहे हैं। इसके लिए गाड़ियां भी बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रही हैं। गाड़ियां ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित हों इसके लिए उन्हें बुलेट प्रूफ बनाने का ट्रेंड भी जोरों पर है। बुलेट प्रूफिंग का काम करने वाली करीब 30 कंपनियों के कर्मचारी चुनाव से कुछ महीने पहले से ही ओवरटाइम कर रहे हैं। ऐसी ही एक कंपनी लैगर इंडस्ट्रीज है। इस कंपनी ने अब तक 35 गाड़ियों को बुलेट प्रूफ बनाया है। कंपनी के डायरेक्टर संचित सोबती ने कहा कि मॉडल के हिसाब से बुलेट प्रूफिंग के लिए 6 लाख से 40 लाख रुपए तक चार्ज किया जाता है।

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हेलीकॉप्टर: 1 घंटे का किराया 1.5 लाख से शुरू


लोकसभा चुनावों में यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर और प्राइवेट प्लेन की मांग भी काफी बढ़ जाती है। बड़े कद के नेताओं को कम समय में ज्यादा से ज्यादा इलाकों को कवर करना होता है। हेलीकॉप्टर का प्रति घंटा किराया करीब 1.5 से 2.5 लाख रुपए होता है। वहीं, प्लेन का किराया 4.5 लाख रुपए प्रति घंटा तक हो सकता है।

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इमेज मेकिंग: स्लोगन बनाकर उसे ट्वीट करने तक का काम


कई कंसल्टेंसी फर्म नेताओं की इमेज चमकाने के काम में लगे हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट को मैनेज किया जाता है। उनके लिए ट्वीट से लेकर स्पीच तक तैयार की जाती है। यहां तक कि कब-कहां-क्या बोलना है इसकी रणनीति भी तैयार होती है। पूरी स्ट्रैटजी की फीस कुछ हजार रुपए से लेकर लाखों में हो सकती है।

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झंडे, पोस्टर का धंधा मंदा, लागत निकालना मुश्किल


भारत में हाल तक झंडे, पोस्टर, टोपी, बैज और टी-शर्ट बनाना चुनावों में काफी फायदेमंद होता था। लेकिन, इस बार इंटरनेट और सोशल मीडिया में आए बूम की वजह से यह सेक्टर पिछड़ रहा है। इस काम में लगी कंपनियों के लिए इस बार लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। इनका कारोबार 50% तक कम हुआ है।

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