ट्रेंड /पांच साल में भारतीय व्हिस्की की मांग 50 प्रतिशत बढ़ी, नोटबंदी बेअसर रही

Moneybhaskar.com

Jun 19,2019 07:12:29 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय व्हिस्की ने बीते पांच साल में 50 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। यही नहीं, हाइवे के आसपास 500 मीटर के दायरे वाले बैन, नोटबंदी और ऐसी ही कई मुश्किलों के बाद भी बीते साल बिक्री में 11 फीसदी का इजाफा हुआ है। खास बात यह है कि वैश्विक स्तर बिकने वाली पर हर पांच में तीन भारतीय ब्रांड की व्हिस्की है।

भारत में व्हिस्की का मतलब ही शराब

इंटरनेशनल वाइन और स्प्रिट रिसर्च (IWSR) के नए आंकड़ों के अनुसार व्हिस्की, वोदका, जिन, रम और ब्रांडी में से एक भारतीय संस्करण का ब्रांड है। एलाइड ब्लेंडर्स के एक्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन दीपक रॉय ने कहा कि इंडियन ड्रिंक्स ज्यादा स्ट्रांग होते हैं इसलिए लोगों को पसंद आ रहे हैं। 34 मिलियन लीटर से ज्यादा की बिक्री वाले ऑफिसर्स च्वाइस के निर्माता कहते हैं कि व्हिस्की भारत में शराब का डिफ़ॉल्ट विकल्प है। इसमें दक्षिण भारत अपवाद हैं। वहां ब्रांडी ज्यादा पसंद की जाती है। इसके अलावा जिन और वोदका आम तौर पर कॉकटेल से जुड़ी होती हैं। इसलिए व्हिस्की की बिक्री ज्यादा है।

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पर रूसी वोदका की तरह पहचान नहीं

हालांकि भारत में चीन के बैजू या रूसी वोदका की तरह कोई प्रमुख देशी शराब नहीं बिकती है। भारत में यूरीपीय स्प्रिट से ही भारत निर्मित विदेशी शराब बनाई जाती है। यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (USL) और Pernod Ricard के स्वामित्व वाले ब्रांडों का 90 प्रतिशत बाजार पर कब्जा है।

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पांच साल में भारत में व्हिस्की का कारोबार( खपत मिलियन लीटर)


श्रेणी

वर्ष 2014

वर्ष 2015

वर्ष 2016

वर्ष 2017

वर्ष 2018

भारतीय व्हिस्की

115

156

160

158

170

स्कॉच व्हिस्की

66

66

66

68

70

अमेरिकन व्हिस्की

25

26

27

28

30

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बीते साल यह व्हिस्की टॉप पर रही


ब्रांड

वर्ष 2018

इजाफा

ऑफिसर च्वाइस

34

6%

मैकडॉवेल नंबर वन

29

10%

इंपीरियल ब्लू

22.7

19%

रॉयल स्टेग

21.6

19%

ऑरिजनल च्वाइस

11.5

5 %

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