लोकसभा चुनाव /जेट जमीं पर किराया आसमान में लेकिन नेताजी के हवाई सफर पर कोई फर्क नहीं, रोजाना पौने चार करोड़ रुपए खर्च

  • चुनाव के लिए दलों की ड्यूटी में 150 पायलट, अमित शाह-राहुल गांधी जेट को देते हैं तरजीह 
  • जेट एयरवेज के संचालन बंद होने के बाद से एयर फेयर में 50 से 100 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है लेकिन नेताओं पर कोई फर्क नहीं पड़ा
     

money bhaskar

Apr 20,2019 12:57:17 PM IST

नई दिल्ली. चुनाव का रंग चढ़ने लगा है। धूप के साथ चुनावी तपिश भी बढ़ रही है। चुनाव प्रचार की आपाधापी है। जनता के बीच ज्यादा से ज्यादा पहुंचने की चुनौती भी। लिहाजा, हर नेता, हर पार्टी की पूरी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा हवाई सफर हो सके। चुनाव के इस मौसम में रोजाना 50 हेलिकॉप्टर और 25 जेट प्लेन नेताओं के लिए उड़ान भर रहे हैं। इनके किराए पर ही रोजाना 3.70 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इसमें से 1.25 करोड़ का खर्च तो अकेले फ्यूल का ही है।

इधर, जेट संकट की वजह से बढ़ा किराया, आम आदमी का फूला दम

चुनाव में व्यस्त नेताओं ने तो पहले से ही प्राइवेट जेट, हेलीकॉप्टर की बुकिंग कर रखी थी। इसलिए जेट एयरवेज संकट से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। जबकि जेट की फ्लाइट बंद होने से आम आदमी के लिए किराया जरूर महंगा हो गया। जेट एयरवेज के संचालन बंद होने के बाद से एयर फेयर में 50 से 100 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। वहीं, जेट एयरवेज के बंद होने की वजह से हजारों कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

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अमित शाह-राहुल गांधी जेट को देते हैं तरजीह


एविएशन कंपनियों के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनावी रैलियों में लंबी दूरी तय करने के लिए हेलिकॉप्टर की बजाय जेट एयरक्राफ्ट लेते हैं।

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नेताओं के लिए ऑन कॉल हेलीकॉप्टर उपलब्ध

राष्ट्रीय दल पूरी ताकत से प्रचार में जुटे हुए हैं। रैली और सभाओं के लिए नेता इन दिनों जमकर हेलिकॉप्टर एवं जेट एयरक्राफ्ट का उपयोग कर रहे हैं। इन चुनावों में हेलिकॉप्टर और जेट प्लेन की मांग को पूरा करने के लिए एविएशन कंपनियां विदेशों से हेलिकॉप्टर और जेट 3 से 6 महीने की लीज पर लेकर आ रही हैं। ज्यादातर पार्टियों ने चुनाव घोषित होने से 3 महीने पहले ही इनकी बुकिंग करा ली थी।हवाई यात्रा के इस कारोबार में कुछ जनरल एविएशन कंपनियां सिर्फ एक-एक पार्टी को और ऑन कॉल भी हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराती हैं। चुनाव के दौरान इनकी डिमांड करीब 10 फीसदी बढ़ जाती है ।

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ऐसे मिलते हैं किराए पर हवाई जहाज

बिजनेस एयरक्रॉफ्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके बाली बताते हैं कि हेलिकॉप्टर दो तरह से किराए पर लिए जाते हैं। पहले में पार्टियां एडवांस बुकिंग कर शेड्यूल भेज देती हैं। हालांकि इस शेड्यूल में समय तय नहीं होता। पर यह तय होता है कि 45 दिन तक रोजाना 2 से 3 घंटे की उड़ान भरनी है। दूसरे तरीके में जरूरत पड़ने पर जनरल एविएशन कंपनी से किराए पर हेलिकॉप्टर-जेट एयरक्राफ्ट लिए जाते हैं। देशभर में 51 चार्टर्ड कंपनियां रजिस्टर्ड हैं और पिछले कुछ सालों से 3 से 4 चार्टर्ड ब्रोकर भी यह काम कर रहे हैं ।
देशभर में करीब 275 सिविलियन हेलिकॉप्टर और जेट एयरक्रॉफ्ट रजिस्टर्ड हैं। इनमें कमर्शियल इस्तेमाल के हेलिकॉप्टर-जेट केवल 75 निजी कंपनियों के पास हैं। इनका इस्तेमाल राजनीतिक पार्टियां कर रही हैं। इनमें से करीब 50 हेलिकॉप्टर सिंगल- डबल इंजन वाले 2 से लेकर 10 सीटर (4 और 6 विंगवाले) हैं और करीब 25 जेट एयरक्रॉफ्ट 5 से 12 सीटर हैं। यह डबल इंजन वाले हैं । इनमें लीज पर विदेशों से मंगाए हेलिकॉप्टर भी शामिल हैं। बाली बताते हैं कि ज्यादातर हेलिकॉप्टर दुबई और सिंगापुर से मंगाए जाते हैं। हालांकि इन्हें उड़ाने वाले पायलट भारतीय ही होते हैं। सिंगल इंजन हेलिकॉप्टर में एक पायलट और डबल इंजन हेलिकाॅप्टर और जेट एयरक्रॉफ्ट में 2-2 पायलट होते हैं। कंपनियां चुनाव के मौसम में अतिरिक्त पायलट भी रखती हैं ताकि इमरजेंसी के हालात में भी उड़ान प्रभावित ना हो। इस वक्त करीब 150 पायलट ड्यूटी पर हैं।

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इस तरह समझें दलों का हवाई खर्च


हेलिकॉप्टर: सारथी एविएशन के चेयरमैन गुलाब सिंह बताते हैं कि एक औसत उड़ान 2.30 घंटे की और किराया प्रति घंटा 60 हजार से 3 लाख तक है। 1.75 लाख प्रतिघंटे के हिसाब से देखें तो रोजाना का किराया 4.5 लाख रुपए है। 50 हेलिकॉप्टरों पर करीब 2.20 करोड़ खर्च हो रहे हैं।

जेट: 25 जेट एयरक्राॅफ्ट रोजाना औसतन 3 घंटे उड़ान भर रहे हैं। इनमें से प्रत्येक का किराया प्रतिघंटा 60 हजार से 3.5 लाख तक है। इस तरह एक एयरक्राफ्ट पर करीब 6 लाख रोजाना किराया खर्च हो रहा है। 25 जेट एयरक्राफ्ट पर रोजाना 1.50 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।

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