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    Home »Industry »Companies» Government Has Written Letter To 62 Stent Makers For Submit Production, Import And Supply Report

    स्टेंट पर सरकार सख्त : 62 मैन्युफैक्चरर्स को लिखा लेटर, कहा- कम न होने पाए स्टेंट की सप्लाई

    नई दिल्ली। स्टेंट की कमी की रिपोर्ट आने के बाद से अब सरकार ने स्टेंट कंपनियों पर सख्‍ती की है। डिपार्टमेंट ऑफ फॉर्मास्युटिकल्स (डीओपी) ने भारत में स्टेंट सप्लाई करने वाली सभी 62 स्टेंट कंपनियों को अलग-अलग लेटर लिखकर ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर लागू किए जाने की जानकारी दी है। डीओपी ने कहा है कि मैन्युफैक्चरर्स स्टेंट प्राइस कैपिंग का अनुपालन करें और यह सुनिश्चित करें कि स्टेंट की सप्लाई कम न होने पाए। वे प्रोडक्शन, इंपोर्ट और सप्लाई की पूरी रिपोर्ट हेल्थ मिनिस्ट्री को सौंपे। 
    बता दें कि सरकार द्वारा एंजियोप्लास्टी में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट की कीमतें 85 फीसदी तक घटाए जाने के बाद से अस्पतालों में स्टेंट की कमी की लगातार रिपोर्ट आ रही हैं। जिसके बाद अब डिपार्टमेंट ऑफ फॉर्मास्युटिकल्स ने भी सख्‍ती की है। जिन कंपनियों को लेटर लिखा गया है, उनमें अबॉट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, टर्मो इंडिया प्रा. लि., बॉस्टन साइंटिफिक, बॉयोट्रॉनिक मेडिकल डिवाइस प्रा. लि., इंडिसा मेडट्रॉनिक प्रा. लि., ट्रांसलुमिना थेराप्यूरिक्स एलएलपी और मेरिल लाइफ साइंस प्रा. लि. सहित 62 कंपनियां हैं।
     
    सरकार करेगी पावर का इस्तेमाल
    डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल ने अबॉट हेल्थ केयर को लिखे लेटर में कहा है कि मार्केट और अस्पतालों में स्टेंट की कमी की लगातार रिपोर्ट आ रही है। इस वजह से सरकार ने तय किया है कि स्टेंट की सप्लाई मेनटेन करने के लिए डीपीसीओ-2013 के सेक्शन 3.1 के तहत मिले पावर का इस्तेमाल किया जाएगा। बता दें कि स्टेंट की कमी से निपटने के लिए सरकार ने ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर लागू कर दिया है। 
     
    सरकार को क्या है पावर
    डीपीसीओ-2013 के सेक्शन 3.1 के जरिए मिले पावर के तहत सरकार को पब्लिक इंट्रेस्ट में या जब जरूरत महसूस हो या एमरजेंसी में ड्रग डिस्ट्रिब्यूशन को रेगुलेट करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों से प्रोडक्शन और सप्लाई बढ़ाने को कह सकती है। यही बात स्टेंट के मामले में भी लागू होगा। 
     
    एनपीपीए की स्टेंट कंपनियों के साथ होगी मीटिंग
    एनपीपीए अगले हफ्ते 7 मार्च को स्टेंट कंपनियों के साथ मीटिंग करने जा रहा है, जिसमें स्टेंट की प्राइसिंग के साथ उपलब्धता पर बात होगी।  
     
    हॉर्ट के ऑपरेशन तक टाले गए
    स्टेंट की कीमतें कम होने के बाद से कई कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर ने एमआरपी की नई कीमतें लगाने के नाम पर अस्पतालों से स्टेंट का स्टॉक वापस ले लिया। स्टेंट की कमी होने की वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है और उन्हें मजबूरी में तय रेट का गई गुना देकर मार्केट से स्टेंट लेना पड़ रहा है। एनपीपीए ने कई बार कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और अस्पतालों को वार्न किया। इसके बाद भी लगातार स्टेंट की कमी की रिपोर्ट आ रही हैं। हालात यहां तक पहुंच गए है कि कई अस्पतालों में स्टेंट की कमी के चलते हार्ट के ऑपरेशन तक टालने पड़े हैं।
     
    कीमतों पर 8 फीसदी मार्जिन शामिल
    सरकार ने साफ किया है कि कोरोनरी स्टेंट की जो कीमत तय हुई हैं, उसमें 8 फीसदी मार्जिन शामिल है। ऐसे में मरीजों से स्टेंट पर लोकल सेल्स टैक्स और वैट के अलावा किसी तरह का एडिशनल चार्ज नहीं लिया जा सकता है। नोटिफाई की गई कीमतों पर लोकल सेल्स टैक्स और वैट के अलावा कोई चार्ज नहीं लिया जा सकता है। कोरोनरी स्टेंट के हाई एंड मार्केट वैल्यू को कंशीडर करते हुए इस 8 फीसदी के ट्रेड मार्जिन में ट्रेड चैनल्स, मैन्युफैक्चरर्स, इंपोर्टर्स से लेकर मरीजों तक का मार्जिन शामिल है। इसके अलावा इस 8 फीसदी मार्जिन में अस्पतालों काके रखरखाव आदि का खर्च भी निकल जाएगा।
     
    कितनी कम हुईं स्टेंट की कीमतें
    बेयर मेटल स्टेंट की कीमत 7260 रुपए और ड्रग इल्यूटिंग स्टेंट की कीमत 29,600 रुपए तय की गई हैं। पहले स्टेंट मेकर्स, डीलर्स और अस्पतालों की मिली-भगत से इनकी कीमतें करीब 45 हजार रुपए और 1.25 लाख रुपए तक वसूली जाती थीं। इसी को देखते हुए स्टेंट को जरूरी दवाओं की लिस्ट में शामिल किया गया था। 
     
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