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  • Government may be able to levy more tax on multinational companies like Google Facebook

प्रस्ताव /गूगल, फेसबुक जैसी मल्टीनेशनल कंपनियाें पर ज्यादा टैक्स लगा पाएगी सरकार

  • देश के बाहर से संचालन करने वाली डिजिटल कंपनियों को भी चुकाना होगा टैक्स

Moneybhaskar.com

Oct 10,2019 11:42:00 AM IST

नई दिल्ली. जल्द ही भारत समेत कई देश अपनी क्षेत्रीय सीमाओं के अंदर व्यापार करने वाली गूगल, एपल और फेसबुक जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों से ज्यादा टैक्स वसूल पाएंगी। ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने मल्टीनेशनल कंपनियों, खासतौर पर बड़ी इंटरनेट कंपनियों पर टैक्स लगाने के सरकार के अधिकारों को बढ़ाने के लिए नए उपायों को लागू करने का प्रस्ताव दिया है। 130 से अधिक देशों और क्षेत्रों ने ओईसीडी को प्रस्ताव लाने को कहा है।

देश के बाहर से संचालन करने वाली कंपनियों को चुकाना होगा टैक्स

इस नियम के लागू होने पर दुनियाभर की डिजिटल कंपनियों को ज्यादा टैक्स चुकाना होगा। भारत में यह टैक्स कितना होगा, अभी यह तय नहीं हुआ है। भारत सरकार पहले ही सिग्निफिकेंट इकोनॉमिक प्रिजेंस (SEP) फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है, जहां देश में मौजूद डिजिटल कंपनियों को टैक्स किया जा जा सकेगा, भले ही उनके पास स्थायी दफ्तर हो या न हो। इसका यह मतलब हुआ कि ऐसी कंपनियां जिनका भारत में एक भी ऑफिस या कर्मचारी न हो, उन्हें भी टैक्स चुकाना पड़ेगा।

डिजिटल कंपनियों का कामकाम होगा प्रभावित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेसबुक, गूगल, ट्विटर, लिंक्डइन और एयरबीएनबी ओईसीडी के प्रस्तावों और भारत में उनके रेवेन्यू पर पड़ने वाले असर के बारे में टैक्स एक्सपर्ट्स से चर्चा कर रहे हैं। भारत ने डिजिटल कंपनियों पर टैक्स लगाने के लिए अपने नियम पेश किए थे। ओईसीडी ने भी अपने प्रस्ताव में टैक्स लगाने के अधिकार को सही ठहराया है, ऐसे में सीबीडीटी पर निर्भर करता है कि वह मुनाफा कमाने के नियमों को कब लागू करता है। इससे देश में काम कर रही कई डिजिटल कंपनियों के कामकाज पर असर पड़ेगा।

टैक्स हेवेन में अपना बेस सेट-अप करती हैं कंपनियां

पिछले साल सरकार ने कहा था कि वैश्विक डिजिटल कंपनियों का बड़ा कंज्यूमर बेस होने के बाद भी वे घरेलू तौर पर पर्याप्त टैक्स नहीं चुका रही हैं। ऐसे में इन दिग्गज कंपनियों को लोकल टैक्स के दायरे में लाने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। कई कंपनियां टैक्स चुकाने से बचने के लिए आयरलैंड जैसे कम टैक्स दायरे वाले देशों में स्थापित करती हैं। इससे वे अधिक मुनाफा कमा पाती हैं और पेटेंट जैसे असेट भी अपने पास रख पाती हैं।

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