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राहत / देश के 1.5 करोड़ स्मार्टफोन से फिलहाल गायब नहीं होगा गूगल और जीमेल

गूगल और एंड्रायड की सेवा हुआवे के लिए बंद करने के ऐलान से खड़ा हुआ संकट

Google and Gmail will not disappear from Huawei's Smartphones
  • हुआवे के कस्टमर केयर के मुताबिक पहले से चल रहे फोन में नहीं होगी दिक्कत।

  • नए फोन में भी एंड्रायड एवं गूगल की सेवा जारी रखने के लिए कंपनी की कवायद।

  • अमेरिका भारत पर हुआवे से संबंध तोड़ने के लिए दबाव बना रहा है।

नई दिल्ली।

देश में लगभग 1.5 करोड़ हुआवे स्मार्टफोन धारकों के लिए फिलहाल राहत की खबर है। हुआवे को अमेरिकी सरकार की तरफ से अगले 90 दिनों के लिए गूगल एवं एंड्रायड के इस्तेमाल की राहत दे दी गई है। अमेरिकी सरकार के कहने पर गूगल एवं एंड्रायड ने हुआवे से रिश्ता तोड़ने का ऐलान किया था। हालांकि भारत स्थित हुआवे के कस्टमर केयर सेंटर ने मनी भास्कर को बताया कि हुआवे के जो फोन पहले से चल रहे हैं, उनमें फिलहाल कोई दिक्कत नहीं आएगी और गूगल, जीमेल एवं एंड्रायड पहले की तरह काम करते रहेंगे।

 

नए फोन में हो सकती है कुछ दिक्कतें

कस्टमर केयर की तरफ से मनी भास्कर को बताया कि जो नए फोन आएंगे, उनमें गूगल की सपोर्ट सेवा की दिक्कत होगी जिसे दूर करने के लिए कंपनी की तरफ कवायद की जा रही है। दूरसंचार विभाग के मुताबिक भारत में फिलहाल लगभग 40 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन है। आईडीसी के आंकड़ों के मुताबिक भारत में स्मार्टफोन के बाजार में हुआवे की हिस्सेदारी 4.5 फीसदी है जबकि काउंटरपार्ट रिसर्च के मुताबिक हुआवे की हिस्सेदारी 3.5 फीसदी है।

 

क्या है पूरा मसला

हुआवे चीनी कंपनी है। इसके चलते हुआवे को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तकरार बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच पहले से ही ट्रेड वॉर चल रहा है। अमेरिका को आशंका है कि हुआवे अपने फोन के जरिए जासूसी करने का काम करती है। यही वजह है कि हुआवे को चिप और अन्य हार्डवेयर की सप्लाई करने वाली अमेरिकी कंपनियों ने भी हुआवे से संबंध तोड़ने का ऐलान किया है। हुआवे की तरफ से कहा गया है कि भारत में उनके स्मार्टफोन धारकों को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी और उन्हें हर प्रकार से सपोर्ट करने के लिए कंपनी तैयार है। दूसरी तरफ अमेरिका भारत पर हुआवे से संबंध तोड़ने के लिए दबाव बना रहा है।

 

भारत नहीं बनना चाहता लड़ाई का हिस्सा

भारत ने हुआवे को लेकर अभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन समझा जा रहा है कि भारत अमेरिका और चीन के बीच की इस लड़ाई का हिस्सा नहीं बनना चाहता है, इसलिए भारत हुआवे के खिलाफ फिलहाल कोई फैसला नहीं करने जा रहा है।

 

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