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  • Former Fortis promoter Shivinder Singh arrested in case of fraud

फ्रॉड /फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर और मलविंदर सिंह धाेखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार

  • पुलिस ने गुरुवार शाम शिविंदर को और देर रात मलविंदर को 740 करोड़ रुपए के घोटाले में हिरासत में लिया
  • रेलीगेयर के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी और दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है

Moneybhaskar.com

Oct 11,2019 12:03:25 PM IST

नई दिल्ली. फोर्टिस ग्रुप के प्रमोटर रहे शिविंदर मोहन सिंह को गुरुवार को दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने गिरफ्तार कर लिया। रेलीगेयर फिनवेस्ट द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद यह गिरफ्तारी की गई है। रेलीगेयर के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी और दो अन्य लोगों को भी 740 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस इस मामले में शिविंदर के भाई मलविंदर मोहन सिंह की तलाश कर रही है। दोनों भाईयों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने और विश्वासघात करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

2016 में किया था घोटाला

रेलिगेयर के एक सीनियर मैनेजर की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने FIR दर्ज की थी। शिकायत के मुताबिक कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनी Religare Finvest Limited (RFL) से साथ धोखाधड़ी की गई थी और उसकी हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति की गलत फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के जरिए हेराफेरी की गई। इस FIR में कहा गया था कि सिंह ब्रदर्स ने दूसरे आरोपी के साथ मिलकर 2016 में इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इसमें आरोप लगाया गया है कि दोनों भाइयों ने 'सोच-विचार कर आपराधिक साजिश रची, जिसके जरिए बड़ा वित्तीय घपला किया गया। शिकायत में कहा गया था कि सिंह ब्रदर्स फरवरी 2018 तक आरईएल के प्रमोटर थे और बतौर प्रमोटर 'आरएफएल के मैनेजमेंट पर उनका बहुत ज्यादा कंट्रोल था, क्योंकि यह सब्सिडियरी कंपनी थी।'

पिछले साल उठा था मामला

सितंबर, 2018 में सिंह भाइयों में कलह शुरू हुई थी। छोटे भाई शिविंदर सिंह ने अपने बड़े भाई मलविंदर सिंह और रेलीगेयर के पूर्व चीफ सुनील गोधवानी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। शिविंदर सिंह ने इन दोनों से अलग होने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का दरवाजा भी खटखटाया था। मलविंदर ने कहा था कि उन्होंने खुद को अपने बड़े भाई के साथ किसी भी पार्टनरशिप से अलग कर लिया है। खातों में धांधली को लेकर फोर्टिस हेल्थकेयर की ओर से स्वतंत्र जांच का निर्णय लिए जाने के बीच छोटे भाई ने यह कदम उठाया था।

ऐसे शुरू हुआ घोटाले का खेल

दोनों भाइयों के पास फोर्टिस हेल्थकेयर की करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी थी। उसके देशभर में 2 दर्जन से भी ज्यादा अस्पताल हैं। परिवार का यह झगड़ा रैनबैक्सी कंपनी को जापान की दाइची सांक्यो को बेचे जाने के बाद से शुरू हुआ था। इस कंपनी को एक दशक पहले 4.6 अरब डॉलर (तक करीब 1000 हजार करोड़) में बेचा गया था। इसके बाद दोनों भाइयों ने मिलकर कई कारोबार में हाथ आजमाया, लेकिन ग्रुप भारी घाटे में आ गया और उस पर करीब 13,000 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया। समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के चलते ग्रुप की कुछ कंपनियों को अटैच कर लिया गया। इसके चलते दोनों भाइयों को फोर्टिस हैल्थकेयर की अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ी। बिक्री के बाद फोर्टिस के खातों में धांधली के आरोप लगे। कहा गया कि दोनों भाइयों ने फोर्टिस के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए ग्रुप की दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किए।

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