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जीएसटी /एफएमसीजी कंपनियों ने सरकार से की डीलर डिस्काउंट पर टैक्स हटाने की मांग

  • डीलर डिस्काउंट पर टैक्स के चलते बढ़ रहा है दुकानदारों पर बोझ
  • रिटलेर्स-डिस्ट्रीब्यूटर्स नहीं बेच पा रहे हैं अपना माल

Moneybhaskar.com

Aug 09,2019 04:20:34 PM IST

नई दिल्ली. देश के फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) उद्योग ने सरकार से अपील की है कि वह उत्पादों की बिक्री को रफ्तार देने के लिए डीलर डिस्काउंट पर लगने वाला टैक्स हटा दे। ग्राहकों को दिए गए डिस्काउंट और प्रमोशनल प्रोग्राम में खर्च किए गए पैसों के रीइंबर्समेंट के तौर पर डीलरों और रिटेलरों को मिलने वाला धन गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के घेरे में आता है। डीलर इसे हटाने के लिए सरकार से मांग कर रहे हैं, जिससे वे डिस्काउंट देना जारी रख सकें और सेल्स में बढ़ोतरी हो सके।

इंडस्ट्री में है असंतोष की भावना

जून के अंत में सरकार ने एक सर्कुलर जारी करके कहा था कि, किसी उत्पाद को उसकी कीमत से कम दाम में बेचने के लिए डीलर को सप्लायर से जो राशि मिलती है, वह जीएसटी के दायरे में आएगी। इसके बाद से ही इंडस्ट्री में असंतोष बढ़ गया था। अब इंडस्ट्री ने इस मुद्दे को सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स के सामने जाहिर किया है।

ऐसे सेल बढ़ाते हैं डीलर्स

प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने के लिए उनकी एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य, MRP) पर एफएमसीजी मैन्युफैक्चरर्स की तरफ से डिस्काउंट ऑफर किया जाता है। रिटेल स्तर पर ग्राहकों को यह डिस्काउंट रिटेलर्स या डीलर्स की तरफ से दिया जाता है। एमआरपी और डिस्काउंट के बीच का फर्क कंपनी वहन करती है और रिटेलर्स और डीलर्स को यह पैसा वापस किया जाता है। अब सरकार के निर्देश के मुताबिक दुकानदारों को इस पैसे पर जीएसटी चुकाना पड़ रहा है।

बढ़ रही है दुकानदारों की मुश्किल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीलरों को डिस्काउंट समेत एमआरपी पर जीएसटी चुकाना पड़ रहा है। इसके ऊपर उन्हें डिस्काउंट पर दिए गए टैक्स के बदले क्रेडिट भी नहीं मिलता है। इसके चलते रिटेलर्स अपना माल नहीं बेच पा रहे हैं, जिसका खामियाजा डिस्ट्रीब्यूटर्स को भुगतना पड़ रहा है, जो रिटेलर्स को माल की सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। जब तक पुराना स्टॉक खत्म नहीं होता, तब तक डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी से नया माल नहीं लेंगे। यही कारण है कि कंपनियां डिस्ट्रीब्यूटर्स को अतिरिक्त डिस्काउंट दे रही हैं, जिससे वे अपनी इन्वेंट्री खाली कर सकें।

सरकार को करने चाहिए बदलाव

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि, सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो, कानून में बदलाव भी करने चाहिए। सरकार को इसके लिए इंडस्ट्री के लोगों से बात करनी चाहिए और सभी पहलुओं पर गौर करना चाहिए।

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