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  • Falling economy increases mental stress among senior executives of companies

चिंता /गिरती अर्थव्यवस्था ने बढ़ाया बड़ी कंपनियों के सीनियर अधिकारियों में मानसिक तनाव

  • मनोचिकित्सकों के पास इन दिनों पहले की अपेक्षा आ रहे कई गुना कॉल
  • लोगों में काम के दबाव, अवास्तविक टार्गेट और नौकरी खोने के डर से बढ़ रहा तनाव

Moneybhaskar.com

Sep 17,2019 01:24:19 PM IST

नई दिल्ली. देश की अर्थव्यवस्था में आया स्लोडाउन बड़ी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा रहा है। हाल ही में सामने आईं कई रिपोर्ट्स से यह साफ हुआ है कि अर्थव्यवस्था की डांवाडोल स्थिति के चलते भारतीय कंपनियों का सीनियर प्रबंधन मानसिक तनाव से जूझ रहा है। मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के पास इन दिनों पहले की अपेक्षा कई गुना लोग नौकरी के दबाव, अवास्तविक टार्गेट और नौकरी खोने के डर को लेकर कॉल कर रहे हैं।

लोगों में बढ़ रही हैं डिप्रेशन और चिंता संबंधी बीमारियां

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कई अध्ययनों से पता चला है कि पिछले छह महीनों में लोगों में डिप्रेशन और चिंता संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। कॉसमॉस इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंस (CIMBS) के मुताबिक, कंपनियों के वरिष्ठ कर्मचारियों में तीन गुना तेजी से मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई है। कंपनियों को एम्पलॉयी असिस्टेंस प्रोग्राम प्रदान करने वाली कंपनी Optum के मुताबिक, कर्मचारियों की तरफ से मानसिक तनाव को लेकर मिलने वाली शिकायतें 2018 के मुकाबले दोगुनी होकर 2019 में 16 फीसदी हो गई हैं।

सबसे बड़ी चिंताएं

-आर्थिक संकट
-नौकरी खोने का डर
-बिजनेस बंद होने का डर
-आर्थिक अनिश्चितता

इंटरप्रेन्योर्स भी गुजर रहे तनाव से

CIMBS की मनोचिकित्सक शोभना मित्तल के मुताबिक, काम से जुड़ा स्ट्रेस या पैसों को लेकर परेशानी से होने वाली चिंता संबंधी बीमारियों से न सिर्फ संस्थाओं में काम करने वाले लोग जूझ रहे हैं, बल्कि सेल्फ इम्पलॉयड इंटरप्रेन्योर्स और उनके पति/पत्नी भी जूझ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई मामलों में आर्थिक नुकसान और उससे पैदा होने वाले तनाव के चलते लोगों के मन में आत्महत्या करने का विचार भी आया है।

नहीं हैं कोई निश्चित उपाय

ओप्टम इंटरनेशनल के हेड ऑफ बिजनेस ने बताया कि उनकी सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ गई है। काउंसिलर्स और मेंटल हेर्ल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो सेक्टर आर्थिक मंदी की मार झेल रहे हैं उनसे बड़ी संख्या में कॉल आ रहे हैं, जैसे ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सर्विसेज। यह अच्छी बात है कि लोग अपने तनाव को लेकर सलाह मांग रहे हैं, लेकिन इस समस्या के लिए कोई निश्चित उपाय नहीं है। इससे बाहर आने के लिए लोगों को खुद रास्ते ढूंढने होंगे।

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