विवाद /13 साल पहले राहुल भाटिया और राकेश अग्रवाल ने शुरू की थी इंडिगो, अब अधिकारों को लेकर छिड़ी जंग 

  • कैसे शुरू हुआ था मतभेद
  • इस तरह राहुल भाटिया और राकेश अग्रवाल ने शुरू की थी कंपनी

Money Bhaskar

May 17,2019 02:12:03 PM IST

नई दिल्ली। जेट एयरवेज की मुश्किलें अभी तक पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, कि अब एक और एयरलाइन की मुसीबतें शुरु हो गई हैं। हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे बड़ी विमान कंपनी इंडिगो की। इंडिगो के दोनों फाउंडर्स राहुल भाटिया और राकेश अग्रवाल के बीच मनमुटाव की बात सामने आई है। इसके तुरंत बाद गुरुवार को इंडिगो के शेयर 142 रुपए की गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि गुरुवार से लेकर अभी तक इसके शेयरों में 180 रुपए का गिरावट देखी गई है। एक साल पहले 17 मई 2018 को इंडिगो के एक शेयर की कीमत 1,178 रुपए थी जबकि अब इसके एक शेयर की कीमत 1,429 रुपए हो गई है।

क्या है पूरा मामला

राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच मतभेद एयरलाइंस से जुड़ी रणनीति को लेकर है। दोनों के बीच दरार की वजह शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट में शामिल हुए कुछ खास शर्तें हैं, जो अभी पूरी तरह सामने नहीं आई हैं। इंडिगो में राहुल भाटिया के परिवार की कुल हिस्सेदारी 38.26 फीसदी है जबकि राकेश गंगवाल के परिवार की हिस्सेदारी 36.69 फीसदी है। एयरलाइन के कामकाज पर इसका असर ना पड़े इसके लिए दोनों के बीच मतभेद को खत्म करने की पूरी कोशिश की जा रही है। मतभेदों को सौहार्द्रपूर्ण ढंग से हल करने के लिए राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया क्रमशः कानूनी फर्म जे सागर एसोसिएट्स और खेतान एंड कंपनी की मदद ले रहे हैं ताकि एयरलाइन के कामकाज पर इसका असर नहीं पड़े।


दो साल पहले शुरू हुआ मतभेद


दोनों फाउंडर्स के बीच 2 साल पहले इस मतभेद की शुरुआत हुई थी। पिछले साल फरवरी में गंगवाल ने ऐलान किया था कि वित्त वर्ष 2019 में इंडिगो अपनी क्षमता में 52 फीसदी का इजाफा करेगी। इससे कंपनी के फ्लीट का साइज 155 से बढ़कर 250 हो जाता। उस वक्त मैनेजमेंट के ज्यादातर लोगों ने गंगवाल के इस ऐलान का विरोध किया था। इनमें कंपनी के प्रेसिडेंट आदित्य घोष भी शामिल थे। उस वक्त घोष ने कहा था कि क्षमता ज्यादा बढ़ने से मुश्किल हो सकती है। माना जाता है कि उस वक्त गंगवाल ने कहा था कि भारत की क्षमताओं को देखते हुए 500 से कम एयरक्राफ्ट्स को बहुत ज्यादा नहीं माना जा सकता।

भाटिया चाहते हैं कि बड़े प्लेन के साथ इंडिगो की इंटरनेशनल ड्रीम को पूरा किया जा सके। वहीं गंगवाल बजट एयरलाइन साउथवेस्ट एयरलाइंस के मॉडल पर चलना चाहते हैं। साउथवेस्ट एयरलाइंस नैरो बॉडी बोइंग 737 के साथ ही ऑपरेशन करती है। इसका मतलब है कि कंपनी लंबे रूट पर नहीं जा सकती है। गंगवाल विदेशी एयरलाइन कंपनियों के साथ कोड शेयर एग्रीमेंट करना चाहते हैं।

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.