विज्ञापन
Home » Industry » CompaniesCrisis in IndiGo as promoters Rahul Bhatia, Rakesh Gangwal

विवाद / 13 साल पहले राहुल भाटिया और राकेश अग्रवाल ने शुरू की थी इंडिगो, अब अधिकारों को लेकर छिड़ी जंग 

भारत की सबसे बड़ी और सस्ती विमानन कंपनी है इंडिगो

1 of

नई दिल्ली। जेट एयरवेज की मुश्किलें अभी तक पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, कि अब एक और एयरलाइन की मुसीबतें शुरु हो गई हैं। हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे बड़ी विमान कंपनी इंडिगो की। इंडिगो के दोनों फाउंडर्स राहुल भाटिया और राकेश अग्रवाल के बीच मनमुटाव की बात सामने आई है। इसके तुरंत बाद गुरुवार को इंडिगो के शेयर 142 रुपए की गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि गुरुवार से लेकर अभी तक इसके शेयरों में 180 रुपए का गिरावट देखी गई है। एक साल पहले 17 मई 2018 को इंडिगो के एक शेयर की कीमत 1,178 रुपए थी जबकि अब इसके एक शेयर की कीमत 1,429 रुपए हो गई है। 

क्या है पूरा मामला

राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच मतभेद एयरलाइंस से जुड़ी रणनीति को लेकर है। दोनों के बीच दरार की वजह शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट में शामिल हुए कुछ खास शर्तें हैं, जो अभी पूरी तरह सामने नहीं आई हैं। इंडिगो में राहुल भाटिया के परिवार की कुल हिस्सेदारी 38.26 फीसदी  है जबकि राकेश गंगवाल के परिवार की हिस्सेदारी 36.69 फीसदी है। एयरलाइन के कामकाज पर इसका असर ना पड़े इसके लिए दोनों के बीच मतभेद को खत्म करने की पूरी कोशिश की जा रही है। मतभेदों को सौहार्द्रपूर्ण ढंग से हल करने के लिए राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया क्रमशः कानूनी फर्म जे सागर एसोसिएट्स और खेतान एंड कंपनी की मदद ले रहे हैं ताकि एयरलाइन के कामकाज पर इसका असर नहीं पड़े।


दो साल पहले शुरू हुआ मतभेद


दोनों फाउंडर्स के बीच 2 साल पहले इस मतभेद की शुरुआत हुई थी। पिछले साल फरवरी में गंगवाल ने ऐलान किया था कि वित्त वर्ष 2019 में इंडिगो अपनी क्षमता में 52 फीसदी का इजाफा करेगी। इससे कंपनी के फ्लीट का साइज 155 से बढ़कर 250 हो जाता। उस वक्त मैनेजमेंट के ज्यादातर लोगों ने गंगवाल के इस ऐलान का विरोध किया था। इनमें कंपनी के प्रेसिडेंट आदित्य घोष भी शामिल थे। उस वक्त घोष ने कहा था कि क्षमता ज्यादा बढ़ने से मुश्किल हो सकती है। माना जाता है कि उस वक्त गंगवाल ने कहा था कि भारत की क्षमताओं को देखते हुए 500 से कम एयरक्राफ्ट्स को बहुत ज्यादा नहीं माना जा सकता।

भाटिया चाहते हैं कि बड़े प्लेन के साथ इंडिगो की इंटरनेशनल ड्रीम को पूरा किया जा सके। वहीं गंगवाल बजट एयरलाइन साउथवेस्ट एयरलाइंस के मॉडल पर चलना चाहते हैं। साउथवेस्ट एयरलाइंस नैरो बॉडी बोइंग 737 के साथ ही ऑपरेशन करती है। इसका मतलब है कि कंपनी लंबे रूट पर नहीं जा सकती है। गंगवाल विदेशी एयरलाइन कंपनियों के साथ कोड शेयर एग्रीमेंट करना चाहते हैं। 

कौन है राकेश गंगवाल
राकेश गंगवाल अमेरिकी नागरिक हैं। वैश्विक उड्डयन उद्योग में उनका अनुभव 30 सालों का है। इंडिगो कंपनी में वह गैर-कार्यकारी निदेशक के पद पर हैं। गंगवाल 1984 से अमेरिका में रह रहे हैं। वहां उन्होंने एयर फ्रांस में बतौर ईवीपी का पद संभाला था। इसके बाद वे अमेरिकी एयरवेज ग्रुप से जुड़े और बाद में अमेरिकी एयरवेज में अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर नवंबर 2001 तक बने रहे। वह इंडिगो एयरलाइन के को-फाउंडर हैं। यूएस एयरवेज में शामिल होने से पहले, उन्होंने एयर फ्रांस के कार्यकारी उपाध्यक्ष के रूप में नवंबर, 1994 काम शुरू किया। एयरलाइन उद्योग के साथ उनका जुड़ाव सितंबर, 1980 में शुरू हुआ, जब बूज एलन एंड हैमिल्टन, इंक के सहयोगी के रूप में, उन्होंने बारीकी से यूनाइटेड एयरलाइंस के साथ काम किया।

कौन है राहुल भाटिया
राहुल भाटिया एक भारतीय व्यापारी और कम लागत वाले कैरियर इंडिगो के सह-संस्थापक और गैर-कार्यकारी निदेशक और इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। 4 अगस्त 2006 में इंडिगो एयरलाइंस ने परिचालन शुरू किया और अक्टूबर 2015 में इसा आईपीओ लॉन्च किया था। भारतीय शेयर बाजारों बीएसई और एनएसई पर एयरलाइन की लिस्टिंग के बाद, फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें उनके पिता के साथ संयुक्त रूप से भारत का बीसवां सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था। उनकी कुल संपत्ति 3.1 बिलियन डॉलर है। इंडिया टुडे पत्रिका ने उन्हें 2017 की सूची के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों में 17 वें स्थान पर रखा गया था।

24 करोड़ रुपए है रेवेन्यू

इसका मुख्यालय भारत के गुडगांव में स्थित है। मार्च 2017 के आकड़ों के मुताबिक इंडिगो में कुल 14,604 कर्मचारी काम करते हैं। जून 2018 तक घरेलू बाजार में इसकी हिस्सेदारी 41.3 फीसदी थी। एयरलाइन 66 रूटों - 51 घरेलू और 15 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करती है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इसका प्राथमिक केंद्र है। 2017 -18 के आंकड़ों के मुताबिक इंडिगो कंपनी की कुल आय 2,243 करोड़ रुपए है। जबकि कंपनी का कुल रेवेन्यू 2017-18 के आंकड़ों के मुताबिक 23,968 करोड़ रुपए है। 

 

ऐसे शुरू हुई कंपनी

- 1991 में अपनी डिग्री के दम पर राहुल ने आईटी कंपनी इंटरग्लोब शुरू की।

- लंबे समय तक इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने अपने गहरे दोस्त राकेश गंगवाल से एक एयरलाइन शुरू करने की बात की। काफी सोच-विचार के बाद 2004 में एयरलाइन लाइसेंस के लिए अर्जी दे दी गई और इंडिगो एयरलाइन की नींव पड़ी।

- 2004 में लाइसेंस हासिल करने के बाद 2006 तक यह कंपनी उड़ान नहीं भर पाई थी।  उस दौर में एविएशन फ्यूल की कीमतें आसमान पर थीं। इंडस्ट्री को लीड करने वाली किंगफिशर, स्पाइस जेट और जेट तक दिक्कत का सामना कर रही थीं।

- सन 2005 के ऐसे विपरीत माहौल में इस कंपनी ने पेरिस एअर शो में 100 विमानों की शॉपिंग की। जेब में केवल 100 करोड़ रुपए थे। यहां राकेश गंगवाल की साख काम आई जो 35 साल से एयरलाइन बिजनेस में इज्जत कमा चुके थे।

- एयरबस ने तमाम शर्तें मानते हुए बेहद कम एडवांस पर बड़ा ऑर्डर स्वीकारा था। पहले विमान की डिलिवरी 28 जुलाई 2006 को मिली और 4 अगस्त 2006 से कंपनी ने अपनी उड़ान शुरू की।

- 2007 तक 15 विमान का बेड़ा इनके पास था। 2010 तक मार्केट शेयर 17.3 प्रतिशत हो चुका था और एयर इंडिया को पीछे कर यह तीसरी बड़ी कंपनी बन चुकी थी।

- 2011 में कंपनी ने तब चौंकाया जब एअरबस को 180 विमानों का ऑर्डर दिया। इसी साल इंटरनेशनल फ्लाइट्स भी शुरू कर दीं।  फिर कंपनी का 3200 करोड़ रुपए का आईपीओ आया और यह आगे बढ़ती चली गई।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन
Don't Miss