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  • By defeating ITC, Tata has renamed its 'Taj' for 33 years

नीलामी /ITC को मात देकर टाटा ने 33 साल के लिए फिर अपने नाम कर लिया 'ताज'

  • टाटा समूह वर्ष 1978 से लुटियन क्षेत्र स्थित होटल ताज मानसिंह का कर रहा था संचालन
  • लीज खत्म होने के बाद हुई नीलामी में टाटा ने सबसे ज्यादा बोली लगाकर फिर से अपने कब्जे में किया 

money bhaskar

Apr 13,2019 10:49:00 AM IST

नई दिल्ली. टाटा और होटल ताज की कई कहानियां है। टाटा का ताज से लगाव ही कुछ ऐसा है लेकिन इस बार ताज दिल्ली का था। लिहाजा दोगुनी फीस अदा कर टाटा ने इसे अपने कब्जे में कर लिया। जानिए पूरा मामला...

33 साल के लिया हुआ टाटा का ताज


वर्ष 1978 में दिल्ली के लुटियन क्षेत्र स्थित होटल ताज मानसिंह को 33 साल के पट्टे पर टाटा समूह को दिया गया था। यह समयसीमा 2011 में समाप्त हो गई थी। तब से लेकर कंपनी को नौ बार समयसीमा का विस्तार दिया गया।कानूनी विवाद में उलझने के कारण एनडीएमसी संपत्ति की नीलामी नहीं कर पाई थी। काफी विलंब के बाद पिछले साल सितंबर में होटल के लिये सार्वजनिक तौर पर नीलामी का आयोजन किया गया था। एनडीएमसी के साथ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पिछले साल हुई ई-नीलामी में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड को फिर से 33 साल के लिए ताज मानसिंह होटल का पट्टा मिला। ई-नीलामी में टाटा समूह की कंपनी को आईटीसी होटल्स से कड़ी टक्कर मिली।

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हर महीने सात करोड़ की फीस देना होगा


टाटा समूह ने आखिरकार ताज मानसिंह के संचालन के लिए नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के साथ औपचारिक समझौता कर लिया है। एनडीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'संशोधित समझौते पर को हस्ताक्षर किए गए। 11 अप्रैल से एनडीएमसी को 17.25 प्रतिशत की बजाय 32.5 प्रतिशत अधिक राजस्व मिलेगा। अधिकारी ने कहा कि यह हम लोगों के लिए उपलब्धि है कि हमने सार्वजनिक नीलामी की योजना बनाई। कानूनी मुकदमे को निराकरण किया और संपत्ति की नीलामी की। अब आखिर में उसे जमीन पर उतार रहे हैं। टाटा समूह ने हर महीने 7.03 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस पर इस होटल संपत्ति को अपने पास बनाये रखने में सफलता पाई। इससे पहले वह हर महीने 3.94 करोड़ रुपये का लाइसेंस शुल्क भुगतान कर रही थी।

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