संकट /जेट एयरवेज के रिवाइवल की कोशिशें नाकाम, बैंकों ने NCLT में भेजने का लिया फैसला

  • अभी तक नहीं मिला कोई ठोस प्रस्ताव, लेंडर्स ने एयरलाइन को NCLT में भेजने का लिया फैसला 

Moneybhaskar.com

Jun 17,2019 06:40:00 PM IST

मुंबई. स्टेट बैंक (SBI) की अगुआई वाले कंसोर्टियम ने आखिरकार जेट एयरवेज (Jet Airways) के रिवाइवल की आस छोड़ दी। कंसोर्टियम ने अभी तक कोई ठोस प्रस्ताव नहीं मिलने के बाद सोमवार को ग्राउंडेड एयरलाइन को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में भेजने का फैसला ले लिया। लेंडर्स की एक बैठक के बाद यह फैसला लिया गया।
एसबीआई (SBI) ने एक बयान में कहा, ‘विचार-विमर्श के बाद लेंडर्स ने कहा कि अभी तक सिर्फ एक ही सशर्त बिड मिली, जिसके बाद जेट एयरवेज को बैंकरप्सी कोड के तहत रिजॉल्युशन निकालने का फैसला लिया गया है।’

सेबी से छूट चाहते हैं संभावित निवेशक

बयान में कहा गया कि संभावित निवेशक डील पर सेबी से कुछ छूट चाहता है, जिस पर आईबीसी (इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरपब्सी कोड) के तहत बेहतर काम किया जा सकता है। बैंक ने कहा कि लेंडर्स ने आईबीसी के बाहर एयरलाइन के लिए समाधान निकालने के तमाम प्रयास किए, लेकिन अब आईबीसी के तहत ही समाधान निकालने का फैसला किया गया।

दो क्रेडिटर्स ने की थी बैंकरप्सी प्रोसीडिंग्स की मांग

गौरतलब है कि 10 जून को दो ऑपरेशनल क्रेडिटर्स शमन व्हील्स और गागर एंटरप्राइजेज ने एनसीएलटी में अपील करके एयरलाइन के खिलाफ बैंकरप्सी की प्रोसीडिंग्स शुरू करने की मांग की थी और ट्रिब्यूनल ने 13 जून को इस मामले में 20 जून को सुनवाई करने का फैसला किया।

17 अप्रैल से बंद है परिचालन

ट्रिब्यूनल ने इन पक्षों से जेट एयरवेज को लीगल नोटिस भेजने के लिए कहा था। एयरलाइन का परिचालन 17 अप्रैल से बंद है। उसे शमान व्हील्स को 8.74 करोड़ रुपए और गागर को 53 लाख रुपए चुकाने हैं। जेट एयरवेज पर एसबीआई की अगुआई वाले लेंडर्स की कुल 8 हजार करोड़ रुपए की देनदारी है। कंपनी को 13 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है और उसे वेंडर्स के 10 हजार करोड़ रुपए व सैलरी के 3 हजार करोड़ रुपए भी चुकाने हैं।


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