मामला /कर्नाटक उच्च न्यायालय में अमेज़न की सीसीआई जांच के खिलाफ बहस

  • अमेजन ने एफडीआई पॉलिसी का किया उल्लंघन : खंडेलवाल 

Moneybhaskar.com

Feb 13,2020 12:09:00 PM IST

नई दिल्ली. अमेजन की ओर से कर्नाटक उच्च न्यायालय में दायर याचिका में प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच के आदेश पर रोक लगाने का मामला पहुंचा। इसके लिए अमेज़न की तरफ से वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने सीसीआई जांच रोकने के लिए अंतरिम स्थगन आदेश के लिए जोर दिया। अमेज़न ने अपनी याचिका में प्रतिस्पर्धा आयोग, दिल्ली व्यापर महासंघ और फ्लिपकार्ट इंटरनेट सर्विसेज (पी) लिमिटेड को प्रतिवादी बनाया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने भी इस मामले में पार्टी बनाने के लिए एक याचिका दायर की है।

कोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई की कही बात

सुब्रमण्यन ने बहस करते हुए कहा कि अमेज़न ने कोई भी समझौता नहीं किया है और पसंदीदा विक्रेताओं की कोई अवधारणा उनके पोर्टल में नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि अमेज़न का अपने प्लेटफॉर्म पर विक्रेताओं के कामकाज पर कोई नियंत्रण नहीं है क्योंकि वे अलग-अलग विक्रेता हैं जो अमेज़न पर अपना व्यापार करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान आदेश बिना किसी तथ्यात्मक समर्थन के केवल एक अनुमान है। उन्होंने न्यायालय में यह भी जोर दिया कि आयोग को आदेश पारित करने से पहले संबंधित पक्षों को बुलाया जाना चाहिए था। इस मामले को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अदालत ने कहा है कि वह किसी भी आदेश को पारित करने से पहले संबंधित पक्षों की सुनवाई करेगी।

अमेजन ने एफडीआई पॉलिसी का किया उल्लंघन

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा है कि न केवल अमेजन ने व्यावसायिक दुर्भावनाओं और एफडीआई पालिसी का उल्लंघन किया है बल्कि कहा कि वे किसी भी प्रारंभिक बिक्री समझौते में प्रवेश नहीं करते हैं और किसी भी सूची को नियंत्रित नहीं करते हैं, लेकिन उनके वकील ने कोर्ट को यह कहकर बरगलाने की कोशिश कि यह अमेज़ॅन को बदनाम करने के लिए कैट के नेतृत्व में एक षड्यंत्र है।

खंडेलवाल ने अमेज़न को कानून के न्यायालय में इस तरह के निराधार झूठ बोलने के लिए लताड़ लगाई। यह स्पष्ट है कि अमेज़ॅन ने भारत के एफडीआई पालिसी और विरोधी प्रतिस्पर्धात्मक कानूनों का उल्लंघन किया है और पूर्ववर्ती मूल्य निर्धारण और गहरी छूट में अपने कारोबार को लिप्त किया हैं। उन्होंने कहा कि जब वे खुले तौर पर कह रहे हैं कि वे सभी कानूनों का पूरी तरह से अनुपालन कर रहे हैं, तो जांच होने दें। खंडेलवाल ने आगे कहा कि हमें भारत की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करता है जो इन कंपनियों के गलत कामों का पर्दाफाश करेगा।

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