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एक पैसा कमाता है तो दूसरा दुआएं, ऐसी है अंबानी के बेटे और बहू की जोड़ी

आकाश अंबानी और श्‍लोका मेहता अगर पति पत्‍नी बनते हैं तो दोनों की जोड़ी बेहद अलग होगी...

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नई दिल्‍ली. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी जल्‍द ही शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। उनकी शादी हीरा कारोबारी और रोजी ब्लू के ओनर रसेल मेहता की बेटी श्लोका मेहता से होने जा रही है। दोनों की शादी इस साल दिसंबर में हो सकती है। फिलहाल इस बारे में न तो अंबानी परिवार और न ही मेहता परिवार की ओर से अभी तक कुछ कहा गया है। सूत्रों का यह भी दावा है कि 24 मार्च को दोनों की सगाई हो सकती है। आइए जानते हैं कि आकाश अंबानी और श्‍लोका मेहना से जुड़े कुछ रोचक फैक्‍ट्स के बारे में... 

एक पैसा कमाता है तो दूसरा दुआएं
आकाश अंबानी और श्‍लोका मेहता अगर पति पत्‍नी बनते हैं तो दोनों की जोड़ी बेहद अलग होगी। बिजनेस फैमिली से आने के बाद भी श्‍लोका मेहता ने फैमिली बिजनेस ज्‍वाइन नहीं किया है। वह परोपकार के काम में लगी हैं। इंडियन कॉरपोरेट वर्ल्‍ड में श्‍लोका मेहता को ऐसी रिच किड के रूप में जाना जाता है, जो अपने बिजनेस नहीं बल्कि अपने ठोस चैरिटी और फिलेंथ्रोपी वर्क के लिए ज्‍यादा मशहूर हैं। उनके फिलेंथ्रॉफी वर्क पर कई मीडिया रिपोर्ट्स भी छप चुकी हैं। वहीं आकाश अंबानी अपना पारिवारिक बिजनेस आगे बढ़ा रहे हैं। उनके आने के बाद आरआईएल की वैल्‍यू में लगतार इजाफा हो रहा है।  

 

सोर्स: मीडिया रिपोर्ट 

 

 

 

 

 

जियो की सफलता के पीछे आकाश अंबानी 
यह तो सभी जानते हैं कि देखते-देखते जियो को देश के टॉप टेंलिकॉम कंपनी बनाने में आकाश अंबानी का बड़ा रोल रहा है। यह बात मुकेश अंबानी खुद भी कई बार स्‍वीकार कर चुके हैं। यह उन्‍हीं की मेहनत का नजीता है कि पिछले क्‍वाटर्र में जियो ने करीब 500 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया था। 

रोजी ब्लू फाउंडेशन की निदेशक हैं श्लोका
श्‍लोका मेहजी ब्लू फाउंडेशन की निदेशक हैं। रोजी ब्लू फाउंडेशन उनकी पारिवारिक कंपनी रोजी ब्‍लू डायमंड की परोपकार से जुड़ी इकाई है। उन्‍हें 2014 में एग्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर बनने से पहले श्‍लोक के पास फिलेंथ्रोफी का कोई अनुभव नहीं था। यह फाउंडेशन शिक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन और सस्‍टेनेबिलिटी पर फोकस करता है। श्लोका ने 2009 में धीरूभाई अंबानी इंटरनेशन स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से मानवशास्त्र की पढ़ाई की। इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से विधि शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। 

पैसे कमाने से ज्‍यादा परोपकार पर फोकस 
करीब 3 साल पहले अंग्रेजी बिजनेस डेली मिंट से बातचीत में श्‍लोका ने बताया था कि बिजनेस फैमिली से आने के बाद भी उनका फोकस पैसे कमाने से ज्‍यादा परोपकार पर था। बकौल श्‍लोका जब उन्‍होंने अपने ग्रैंड फादर अरुणकुमार रमनिकलाल मेहता से फाउंडेशन से जुड़ने ही बात बताई तो उन्‍होंने साफ सलाह दी कि तुम इस फाउंडेशन से जुड़कर दिमागी संतुष्‍टी तो हासिल कर सकती है, तो बहुत कमाई की उम्‍मीद मत करना। 

सिर्फ एक काम पर फोकस करो 
श्‍लोका के ग्रैंड फादर अरुणकुमार मेहता के मुताबिक, उन्‍होंने अपनी नातिन से साफ कहा था कि एक साथ कई प्रोजेक्‍ट पर काम करने की बजाय सिर्फ एक या दो प्रोजेक्‍ट  पर काम करना बेहतर होता है। जब एक प्रोजेक्‍ट पूरा हो जाए तभी दूसरे प्रोजेक्‍ट पर हाथ डालो। अरुण खुद भी सलाह देते हुए कहते हैं कि उनकी नातिन को एजुकेशन के क्षेत्र में काम करना चाहिए, न कि हेल्‍थेकयर के क्षेत्र में। 

 

 

बदल गई सोच 
श्‍लोक के मुताबिक, शुरू शुरू में उन्‍होंने लगता था कि बिना पैसे के चैरिटी या फिलेंथ्रोपी शायद मुश्किल होती है। हालांकि अब उनकी सोच बदल चुकी है। श्‍लोका के मुताबिक, पैसा निश्चित तौर पर आपका बड़ा साथी है, लेकिन लेकिन इंसानी रिसोर्स की वैल्‍यू कहीं ज्‍यादा है। परोपकार दूसरों की  मुश्किलें आसान करने के लिए होता है और इसे आप अपना समय देकर भी कर सकते हैं 

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