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पीएम मोदी के इस बड़े फैसले ने तोड़ी बेरोजगारों की कमर, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

बेरोजगारी ने पिछले 4 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया

unemployment rise four year high during demonetisation

नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों का सिलसिला जल्द ही शुरू होने वाला है। ऐसे में यदि मोदी सरकार के  पिछले कामों पर नजर दौड़ी जाए तो कुछ कामों का लोगों पर अच्छा असर पड़ा और कुछ ने लोगों की  मुश्किलें काफी हद तक बढ़ा दी। उनमें से एक है नोटबंदी। लेबर ब्यूरो के एक ताजा सर्वे के मुताबिक, देश में नोटबंदी के बाद से  बेरोजगारी ने 4 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश में बेरोजगारी का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।  इस सर्वे में खुलासा हुआ कि बेरोजगारी ने पिछले 4 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया साथ ही नोटबंदी से नौकरियों पर बुरा असर देखने को मिला।

 

नोटबंदी से कई सेक्टरों में लोगों की छंटनी

नोटबंदी से ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम  सेक्टर, एयरलाइंस, कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टरों में लोगों की छंटनी भी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-17 में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत थी, जबकि 2015-16 में यह 3.7 थी। वहीं, 2013-14 में बेरोजगारी दर 3.4 प्रतिशत थी। बेरोजगारी दर से मतलब है कि एक खास अनुपात में श्रमबल उपलब्ध है, लेकिन उसे नौकरियां नहीं मिल रही हैं। 

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अब  NSSO की तरफ से किए जाएंगे सर्वे

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह  लेबर ब्यूरो का अंतिम सर्वे है इसकी जगह अब नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) की तरफ से इस तरह के सर्वे किए जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, शहरी इलाकों में पुरुषों के बीच रोजगार दर ज्यादा कम हुए हैं। पिछले साल की तीन फीसदी की तुलना में इस साल यह 3.8 फीसदी हो गई। हालांकि, महिलाओं के बीच यह 10.8 फीसदी से बढ़कर 11.2 फीसदी हो गई।

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