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प्राइवेट कर्मचारियों के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला, नौकरी से नहीं निकाल पाएंगी कंपनियां

यह नियम उन सभी कंपनियों पर लागू होगा जिनमें 100 कर्मचारी काम कर रहे हैं।

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों से पहले सरकार ने प्राइवेट नौकरी वाले लोगों को आकर्षित करने के लिए श्रम कानूनों में कुछ सुधार किए हैं इन सुधारों का प्राइवेट नौकरी वाले लोगों को काफी लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने और कंपनी बंद करने की मंजूरी देने वालों कुछ नियमों में बदलवा किया है। इसके चलते अब कर्मचारियों को नौकरी के दौरान हटाए जाने का डर नहीं सताएगा। एक मीडिया रिपोर्ट  के अनुसार, जिस  प्राइवेट कंपनी  में 100 से ज्यादा कर्मचारी होंगे उस कंपनी को कुछ भी करने से  पहले सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। 

 

कर्मचारियों को निकालने से पहले सरकार की मंजूरी लेना जरूरी

इसके साथ ही 100 से ज्यादा कर्मचारियों वाली प्राइवेट कंपनी को बंद करना आसान नहीं होगा। कंपनियों को कर्मचारियों को निकालने से पहले सरकार की मंजूरी लेना जरूरी होगा। केंद्र सरकार ने श्रमकानून में से इस विदादास्पद कानून को हटाने  का फैसला लिया है। इसके साथ ही सरकार ने  Closure, Layoff-Retrenchment क्लॉज में भी कुछ बदलाव किए हैं। सरकार  ने  कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशन के तहत नया बदलाव किया है। सरकार  ने ड्राफ्ट बिल में कर्मचारियों की संख्या 100 से 300 कर दी थी।

कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाई जा सकेगी

इससे बहुत सी कंपनियां जिनमें केवल 100 कर्मचारी थे वे इस नियम में छेड़छाड़ कर सकते थे। लेकिन अब सरकार की ओर से जारी नियम के मुताबिक 100 कर्मचारी वाली कंपनी भी अपने कर्मचारियों को नहीं निकाल पाएगी। सरकार के इस नियम से प्राइवेट कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाई जा सकेगी।  

दो से तीन हफ्तों के भीतर सरकार नए कोड को दे सकती है मंजूरी

ट्रेड यूनियन के दवाब में सरकार ने कड़े सुधारों से कदम वापस लिया था। संशोधित ड्राफ्ट बिल को सरकार ने कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा है और उम्मीद की जा रही है दो से तीन हफ्तों के भीतर सरकार नए कोड को मंजूरी दे सकती है। 

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