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आखिरकार बदल गया किलोग्राम, 2019 में हो सकता है लागू, जानें किन पर होगा असर

50 से ज्यादा देशों ने अपना फैसला सुनाया

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नई दिल्ली. फ्रांस के वर्सेल्स में किलोग्राम की परिभाषा बदल दी  गई है। 50 से ज्यादा देशों की सहमति के बाद इस फैसले का ऐलान किया गया। नए किलोग्राम के 2019 तक आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसे इलेक्ट्रॉन पंप की मदद से नापा जाएगा। यह एक बार में प्रवाहित विद्युत से औसत करंट पैदा करता है और विद्युत की गणना करता है। 1889 में पहली बार एक किलोग्राम का वैश्विक पैमाना तय किया गया था। 19वीं शताब्दी में फ्रांस के अंतर्राष्ट्र्रीय ब्यूरो ऑफ वेट एंड मेजर्स (BIPM) के दफ्तर में एक कांच के कटोरे में  प्लेटिनम इरीडियम धातु का एक टुकड़ा रखा गया था। इसका आकार सिलिंडर के जैसा है। 

सभी वैज्ञनिकों ने संयुक्त रूप से लिया फैसला

इस सिलिंडर का वजन किलोग्राम के बराबर है। शुक्रवार को फ्रांस के वर्सेल्स में एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें 50 से अधिक देशों के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने किलोग्राम की परिभाषा बदलने के लिए वोट किया था। इसके बाद सभी ने एक फैसला लिया गया जिस पर मुहर लगा दी गई। बहुत से वैज्ञानिक चाहते थे कि किलोग्राम को यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा से मापा जाए। किलोग्राम में हुए बदलाव का लोगों के सामान्य जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।  इसका सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों में पड़ेगा जहां एक माइक्रोग्राम (1 ग्राम का 10 लाखवां हिस्सा) का वजन भी मायने रखता है। किलोग्राम अंतर्राष्ट्रीय मानक प्रणाली में 7 यूनिट्स में से एक है। किलोग्राम में 90 पर्सेंट प्लेटिनम और 10 पर्सेंट इरिडियम है। यह 4 सेंटीमीटर का सिलेंडर है। 

 

किब्बल या वाट बैलेंस में मापा जाएगा किलोग्राम
आने  वाले समय में अब किलोग्राम को किब्बल या वाट बैलेंस में मापा जाएगा। यह एक ऐसा उपकरण  है जो विद्युत चुंबकीय ऊर्जा के इस्तेमाल से सटीक गणना बताएगी। इसके बाद किलोग्राम की परिभाषा को कोई नहीं बदल पाएगा और ना नही कोई इसे नुकसान पहुंचा पाएगा। यह नया मानक पूरी दुनिया में वैज्ञानिकों को सटीक माप उपलब्ध कराएगा। इसे एक बार लागू करने के बाद सभी एसआई यूनिट फंडामेंटल  कंस्टेंट की प्रकृति पर आधारित होंगी, जिसके मायने हमेशा के लिए तय हो जाएंगे और ये और भी अधिक सटीक पैमाइश कर पाएगा।

 

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माप की पूरी वैश्विक प्रणाली में आएगा बदलाव
इसमें थोड़े से बदलाव से माप की पूरी वैश्विक प्रणाली में बदलाव आएगा। जिस प्रकार से एनर्जी को मापने के लिए Planck's constant का इस्तेमाल किया जाता है उसी प्रकार वैज्ञानिक चाहते हैं कि किलोग्राम को मापने के लिए किसी धातु का इसेतमाल ना करके lanck's constant का ही इस्तेमाल किया जाए। जिस प्रकार दूरी को मापने के लिए मीटर को निर्धारित किया गया है उसी तरह से किलोग्राम को भी निर्धारित करने के बारे में सोचा जा रहा है। 

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भारत के पास भी है नंबर 57
पेरिस में रखे गए इस धातु की एक कॉपी भारत के पास भी है। लेकिन इसे भारत में नंबर 57 कहा जाता है। नंबर 57 भारत का सटीक किलोग्राम है। नंबर 57 को कुछ सालों के अंतराल में पेरिस भेजा जाता है और वहीं इसे तौला जाता है। भारत में किसी भी चीज को नंबर 57 के हसाब से ही तौला जाता है। आज होने वाले किलोग्राम के फैसले से आम लोगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा लोग पहले की ही तरह खरीदारी करेंगे। 

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