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जिसे 30 बार नौकरी से किया गया रिजेक्ट, वही बना एशिया का सबसे अमीर

Jack Ma ने 10 सितंबर को Alibaba से रिटायर होने का फैसला लिया है

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नई दिल्ली. चीन की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी Alibaba के फाउंडर Jack Ma एशिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं। वह लंबे समय तक दुनिया के सबसे बड़े अमीर भी रहे हैं। ब्लूमबर्ग बिलिनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, उनकी कुल वेल्थ में 40 अरब डॉलर (2.88 लाख करोड़ रुपए) हो गई है। वहीं, उनकी कंपनी अलीबाबा की वैल्यू 420 अरब डॉलर है। लेकिन अब अब जैक मा ने रिटारमेंट लेने का फैसला लिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि रिटायर होने के बाद वह अपना समय एजुकेशन पर केंद्रित फिलान्थ्रॉपी (समाज सेवा) में देंगे। अलीबाबा में सोमवार यानी 10 सितंबर को उनका अंतिम दिन होगा। हैरानी की बात यह है कि एशिया के सबसे अमीर शख्स बनने से पहले उन्हें 30 बार नौकरी से रिजेक्ट किया गया। यूनिवर्सिटी ऑफ नैरोबी में जैक मा ने कहा कि रिजेक्शन की वजह से उन्हें बिजनेस का एक अहम सबक मिला कि 'आपको असफलता के लिए तैयार रहना चाहिए।'  

 

एक नहीं 30 बार हुए रिजेक्ट

कॉलेज के बाद जैक मा ने 30 जगह नौकरी करने की कोशिश कि लेकिन हर जगह से रिजेक्ट हो गए। जब जैक मा के शहर में KFC ने अपनी ब्रांच खोली तो जैक ने उस जॉब के लिए भी अप्लाई किया। वहां 24 में से 23 लोगों को नौकरी मिल गई। वह अकेले ऐसे शख्स थे, जिन्हें रिजेक्ट किया गया। वह पुलिस में भर्ती होना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अप्लाई भी किया, लेकिन वहां भी उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था।

 

एक बार तो अपने भाई की वजह से भी नौकरी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि मैं और मेरा कजन मेरे शहर में एक 4 स्टार होटल में वेेटर की नौकरी के लिए लंबी लाइन में दो घंटे तक इंतजार करते रहे, उस दिन बेहद गर्मी थी। मेरे कजन का स्कोर मुझसे काफी कम था, लेकिन उसे नौकरी मिल गई और मैं रिजेक्ट हो गया। इतना ही नहीं,  प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें 10 बार रिजेक्ट किया।

 

 

1999 में 21 फरवरी को रखी थी अलीबाबा की नींव

21 फरवरी 1999 को जैक मा ने अलीबाबा की नींव रखी और इसके लिए अपने 17 दोस्तों को तैयार किया। हालांकि, जैक मा पढ़ाई में बिल्कुल अच्छे नहीं थे, वो पांचवीं कक्षा में ही दो बार फेल हो गए थे। वह आठवीं कक्षा में भी 3 बार फेल हो गए थे। आज उनकी कंपनी दुनिया के ई-कॉमर्स बाजार में सबसे आगे है।

 

 

कभी ठग समझते थे लोग

उनकी जीवनी पर आधारित किताब ‘अलीबाबा: द हाउस दैट जैक मा बिल्ट’ में बताया गया है कि जब जैक ने 1999 में हांगझू के अपने अपार्टमेंट में अलीबाबा कंपनी का कामकाज शुरू किया तो लोग उन्हें शक की नजरों से देखते थे। उन्हें लोग तीन साल तक ठग ही समझते रहे। बाद में जाकर लोगों को यकीन हुआ कि वे तो उनकी जिंदगी आसान करने वाले व्यक्ति हैं।

 

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टीचर की नौकरी छोड़ शुरू की थी कंपनी
 
बिल गेट्स या स्टीव जॉब्स की तरह जैक मा के पास कम्प्यूटर साइंस की भी कोई पृष्ठभूमि नहीं रही। बचपन में कभी उन्होंने कम्प्यूटर इस्तेमाल नहीं किया। गणित के पेपर में एक बार उन्हें 120 में से केवल एक अंक मिला, ऐसे में उनकी कामयाबी की कहानी और भी हैरान करती है। 1980 में वह अपने शहर में स्कूल टीचर की नौकरी करने लगे। तीन साल बाद उन्होंने इस नौकरी को छोड़ अनुवाद करने वाली एक कंपनी खोली।

 

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मिस्टर इंटरनेट के नाम से थे मशहूर
 
1994 में जब वह अपने बिजनेस के सिलसिले में अमेरिका गए हुए थे, तो वहां इंटरनेट देखकर हैरान रह गए। उन्हें यह बात करामाती लगी कि कैसे घर बैठे लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से इंटरनेट के जरिए जुड़ सकते हैं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने 'चाइना पेज' लॉन्च किया। यह देश की पहली ऑनलाइन डायरेक्टरी थी।

 

इसकी कामयाबी से मा चीन में 'मिस्टर इंटरनेट' के नाम से मशहूर हो गए। लेकिन आगे रास्ता आसान नहीं था। चीन में इंटरनेट लाने के लिए यह जरूरी था कि वह सरकार का ध्यान इस ओर खींचें। यह इंटरनेट का शुरुआती चरण था और बहुत ही कम घरों में कम्प्यूटर देखने को मिलता था। लगातार कई नाकामियों के बाद मा ने चाइना पेज बंद कर दिया और अपने नए प्रोजेक्ट अलीबाबा की तैयारी में लग गए।

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