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53 लाख रुपए है इस छोटी सी झोपड़ी की कीमत, खासियत ऐसी कि हर कोई खरीदने को बेकरार

झोपड़ी की कीमत वास्तव में किसी महल से कम नहीं

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नई दिल्ली। बहुत से ऐसे नेचर प्रेमी लोग हैं जिन्हें शांत जगह पर रहना अच्छा लगता है कि नदी के किनारे झोपड़ी में रहना और सिर्च पानी और पक्षियों का शोर। इसकी बात ही अलग होती है। लेकिन अगर इसी झोपड़ी की कीमत 53 लाख रुपए हो तो क्या आप यहां रहना चाहेंगे? जी हां, आज हम आपको एक ऐसी झोपड़ी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी कीमत वास्तव में किसी महल से कम नहीं है। यह झोपड़ी न्यूजीलैंड की वाकामरीना नामक नदी के तट पर है। यह नदी बेहद ही खूबसूरत है। इस झोपड़ी की कीमत इसलिए इतनी ज्यादा है क्योंकि इस नदी में सोना मिलने की संभावना है।

 

नदी में खनन का लाइसेंस जनवरी, 2026 तक के लिए मान्य 

इस झोपड़ी के मौजूदा मालिक  ने  इसकी कीमत  75 हजार डॉलर (लगभग 53 लाख रुपये) की कीमत लगाई है। झोपड़ी को बेचने के पीछे कारण यह है कि झोपड़ी के मौजूदा मालिक काफी बूढ़े हो चुके हैं। इसलिए वह इस झोपड़ी को बेचना चाहते हैं। कहा जाता है कि इस नदी में सोने की खान है तो जो कोई भी इस झोपड़ी को खरीदेगा उसकी किस्मत पलट सकती है। ट्रेड मी नाम की एक वेबसाइट पर यह झोपड़ी नीलामी के लिए उपलब्ध है। जो भी इसकी जितनी ज्यादा बोली लगाएगा उसे यह झोपड़ी मिल जाएगी।  Trade Me की साइट के अनुसार इस नदी से अब भी सोना निकलता है। इसमें बताया गया है कि झोपड़ी और नदी में खनन का लाइसेंस जनवरी, 2026 तक के लिए मान्य होगा। इसके बाद इसकी फिर से नीलामी की जाएगी।  

भारत में भी सोना उगलने वाली नदी

आपको बता दें कि न्यूजीलैंड की ही तरह भारत  में भी एक ऐसी नदी है जिसे सोना उगलने वाली नदी कहा जाता है। यह नदी भारत के झारखंड राज्य में है। माना जाता है कि इस नदी में सोने के कण पाए जाते हैं। ये नदी देश के झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ इलाकों में बहती है। नदी का नाम स्वर्ण रेखा है। कहीं-कही इसे सुबर्ण रेखा के नाम से भी पुकारते हैं। नदी का उद्गम रांची से करीब 16 किमी दूर है। इसकी कुल लंबाई 474 किमी है। ये एक ऐसी नदी है जिसकी रेत से सैकड़ों साल से सोना निकाला जा रहा है। 

हालांकि, आजतक रेत में सोने के कण मिलने की सही वजह का पता नहीं लग पाया है। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि नदी तमाम चट्टानों से होकर गुजरती है। इसी दौरान घर्षण की वजह से सोने के कण इसमें घुल जाते हैं। स्वर्ण रेखा और उसकी एक सहायक नदी ‘करकरी’ की रेत में सोने के कण पाए जाते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि स्वर्ण रेखा में सोने का कण, करकरी नदी से ही बहकर पहुंचता है।

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