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धीरूभाई अंबानी, स्टीव जॉब्स जैसे सफल लोगों के बि‍जनेस मंत्र, आपको भी मिल सकता है फायदा

उन्‍होंने अपना सबकुछ दांव पर लगा दि‍या था। बि‍ना यह सोचे कि‍ उसका अंजाम क्‍या होगा।

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नई दि‍ल्‍ली. ज्‍यादातर सफल व्‍यक्‍ति‍ आपको बताएंगे कि‍ वह जीवन में एक बार उस मोड़ पर पहुंच गए थे जहां उन्‍हें लगा कि वे बुरी तरह से असफल होने वाले हैं। ऐसा आत्म विश्वास की कमी की वजह से नहीं हुआ, बल्कि इसकी वजह यह थी कि उन्‍होंने नतीजों की चिंता किए बगैर अपना सबकुछ दांव पर लगा दि‍या था। धीरूभाई अंबानी से लेकर स्‍टीव जॉब्‍स तक ने अपनी सोच और अलग वि‍चारों को अपना बि‍जनेस मंत्र बनाया। इन मंत्रों का फायदा आज भी कई लोग उठा रहे हैं और आप भी इसका फायदा उठा सकते हैं। 

 

धीरूभाई अंबानी
 
‘आपके पास मुनाफा कमाने के लि‍ए नि‍मंत्रण नहीं आएगा’ - धीरूभाई
 
धीरूभाई अंबानी ने यमन को ऐसे वक्‍त पर छोड़ने का फैसला लि‍या, जब उनकी जिंदगी बेहतर हो गई थी। धीरूभाई ने यमन छोड़ा और भारत आकर रि‍लायंस की शुरुआत की। 1952 में धीरूभाई ने 15 हजार रुपए की रकम के साथ रि‍लायंस कमर्शि‍यल कॉरपोरेशन की शुरुआत की। उनकी कंपनी का पहला बि‍जनेस पॉलिएस्टर के सूत का आयात और मसालों का निर्यात करना था।

 

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वॉल्‍ट डि‍ज्‍नी
 
वॉल्‍ट डि‍ज्‍नी ने अपने पहले स्‍टूडि‍यो लाफ-ओ-ग्राम के दि‍वालि‍या होने के बाद भी काम नहीं छोड़ा। स्‍टूडि‍यो पर कर्ज बढ़ गया था। ऐसे में डि‍ज्नी को इसे बंद करना पड़ा। उन्‍होंने हॉलीवुड जाने का फैसला लि‍या। 1928 में वॉल्‍ट डि‍ज्‍नी ने मि‍क्‍की माउस नाम का नया कि‍रदार बनाया। इसके बाद डि‍ज्‍नी पूरी दुनि‍या में पॉपुलर हो गए।

 

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हैनरी फोर्ड

दुनि‍या की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनि‍यों में से एक फोर्ड के फाउंडर हैनरी फोर्ड ने अपने मॉडल T की कीमतें इतनी कम कर दी थीं कि‍ वह दि‍वालि‍या होने के कगार पर पहुंच गए। डि‍मांड को देखते हुए फोर्ड अगले लेवल पर चले गए थे और उनके लिए 'करो या मरो' जैसे हालात बन गए थे। हैरानी की बात तो यह थी कि‍ हैनरी फोर्ड इससे पहले भी दो बार दि‍वालि‍या हो चुके थे। 

 

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बि‍ल गेट्स

 
बि‍ल गेट्स ने कंप्‍यूटर बनाने के अपने वि‍जन पर बेस्‍ड माइक्रोसॉफ्ट को शुरू करने में बड़ा जोखि‍म उठाया था। गेट्स अपनी कंपनी को सफल करने के लि‍ए कुछ भी करने और कहीं भी जाने के लि‍ए तैयार थे। इतना ही नहीं वह स्‍टीव जॉब्‍स के खि‍लाफ भी खड़े हो गए थे और दूसरी टेक कंपनि‍यों से आइडि‍या कॉपी करने में नहीं डरे।

 

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स्‍टीव जॉब्‍स
स्‍टीव जॉब्‍स ने असली मैचि‍टोश (जि‍से 1998 में Mac का नाम दि‍या गया) को लॉन्‍च करने में अपना सबकुछ दांव कर लगा दि‍या था। स्‍टीव जॉब्‍स और उनकी टीम ने इसे लॉन्‍च करने से पहले इसके हार्डवेयर को तीन बार रीडि‍जाइन कि‍या था। लॉन्‍च से पहले टीम ने सोचा था कि‍ इसमें भी पहले कंप्‍यूटर लीजा की तहर बड़ी ड्राइव लगाई जाएगी, लेकि‍न अंति‍म समय में इसमें डि‍स्‍क ड्राइव लगाई गई।

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