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विदेश में हुआ था ‘अपमान’, 9 साल बाद रतन टाटा ने ऐसे लिया बदला

पलटी कहानी, फिर रतन टाटा ने FORD पर किया अहसान

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नई दिल्ली.
बात लगभग 19 साल पहले यानी 1999 की है, जब टाटा ग्रुप के रतन टाटा (Ratan Tata) और उनकी टीम को विदेश में 'अपमान' का सामना करना पड़ा था। यह घटना तब हुई थी, जब रतन टाटा (Ratan Tata) अपने ऑटो बिजनेस को बेचने के लिए फोर्ड के पास गए थे। लेकिन वक्त ने ऐसी पलटी खाई और नौ साल बाद उन्हें बदला लेने का मौका मिला। टाटा समूह (Tata Group) ने इस अमेरिकी कंपनी के प्रमुख ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर (JLR) को खरीद लिया। दिलचस्प बात रही कि फोर्ट ने इसे टाटा का अपने ऊपर अहसान माना। टाटा ग्रुप के एक अन्य अधिकारी प्रवीण काडले ने वर्ष 2014 में हुए एक कार्यक्रम के दौरान रतन टाटा के अपमान का किस्सा सुनाया।

 


क्या था मामला

 

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टाटा ने 9 साल बाद लिया बदला

टाटा मोटर्स की टीम ने उसी शाम न्यूयॉर्क लौटने का फैसला किया। ग्रुप के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा वापसी की उड़ान के दौरान उदास दिखे। इस घटना के ठीक नौ साल बाद ही टाटा ग्रुप ने अमेरिकी कंपनी के प्रमुख ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर को खरीद लिया था, जिसने कभी टाटा को ताना मारा था। टाटा कैपिटल के प्रमुख और उस वक्त टीम का हिस्सा रहे प्रवीन काडले ने कहा, 'यह बात 1999 की थी और 2008 में फोर्ड की जेएलआर को हमने खरीद लिया।’ कैसे फोर्ड को मानना पड़ा अहसान....
 


फोर्ड को मानना पड़ा अहसान

टाटा के JLR को खरीदने के बाद उस समय फोर्ड के चेयरमैन बिल बोर्ड ने टाटा को धन्यवाद दिया और कहा कि जेएलआर को खरीदकर आपने हम पर बड़ा अहसान किया है। काडले के मुताबिक, उनकी इस बात पर खूब तालियां बजी थी।

 

नहीं चली इंडिका तो बनाया था बेचने का मन

रतन टाटा ने 1998 में अपनी पहली कार हैचबैक इंडिका पेश की लेकिन इसको अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे निराश कंपनी ने एक साल के भीतर ही कार कारोबार, फोर्ड मोटर्स को बेचने का मन बनाया था। टाटा ग्रुप के कार बिजनेस को शुरू में बाजार में सफलता नहीं मिलने के बाद कुछ लोगों ने चेयरमैन रतन टाटा को इसे बेचने की सलाह दी।
 
 
 

 

3 घंटे की मीटिंग में किया था अपमान

काडले के मुताबिक, 1999 में फोर्ड के ही ऑफिसर्स हमारे हेडक्वॉर्टर बॉम्बे हाउस आए थे और कार डिपार्टमेंट को खरीदने में रुचि दिखाई थी। टाटा मोटर्स की कायापलट और उसकी ग्रोथ में अहम भूमिका निभाने वाले काडले के मुताबिक, उन्हें व टीम के अन्य सदस्यों को चर्चा के लिए डेट्रॉयट बुलाया गया था और रतन टाटा भी बतौर चेयरमैन साथ थे। लगभग 3 घंटे की बातचीत के बाद फोर्ड ने टाटा का 'अपमान' किया।
 

 

2008 में किया फोर्ड पर अहसान

टाटा मोटर्स में अपने कार्यकाल के दौरान काडले ने टॉप लीडरशिप के साथ मिलकर साउथ कोरिया की देवू, ब्रिटेन की इनकॉट टैक्नॉलजीज तथा बाद में ब्रिटेन की जैगवार-लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। काडले ने पुरानी बातों को याद करते हुए कहा कि 'अपमान' के 9 साल बाद हालात पूरी तरह बदल गए और 2008 के ग्लोबल आर्थिक संकट में फोर्ड दिवालिया होने के कगार पर आ गई। ऐसे में टाटा ग्रुप ने फोर्ड से जगुआर लैंड रोवर (JLR) ब्रांड 2.3 अरब डॉलर में खरीदकर उदारता दिखाई। इस अधिग्रहण के कुछ साल बाद में जेएलआर ब्रांड को मजबूती मिली और आज यह टाटा मोटर्स का बड़ा ब्रांड बन चुका है। 

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