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122 पावर प्लांट में कोयले की भारी किल्लत, त्योहार में हो सकती है बिजली की दिक्कत

कोयला सचिव ने कोल इंडिया के चेयरमैन को पत्र लिख गहरी चिंता जाहिर की

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राजीव कुमार

नई दिल्ली.  त्योहार में बिजली की दिक्कत झेलनी पड़ सकती है। क्योंकि देश के 122 पावर प्लांट में कोयले की भारी किल्लत हो गई है। बारिश खत्म होने के बाद भी कोयले की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ है। खुद कोयला सचिव इंद्रजीत सिंह ने इस पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए कोल इंडिया के सीएमडी को पत्र लिखा है। मनी भास्कर के पास इस पत्र की प्रति मौजूद है।


10 पावर प्लांट में कोयले का कोई स्टॉक नहीं

कोयला सचिव सिंह ने कोल इंडिया के सीएमडी को लिखे पत्र में कहा है कि 3 अक्टूबर, 2018 के आंकड़ों के मुताबिक 10 थर्मल पावर प्लांट ऐसे थे जहां कोयले का कोई स्टॉक नहीं बचा था। कोयला सचिव के मुताबिक 46 पावर प्लांट ऐसे थे जिनके पास सिर्फ 1 से 3 दिनों के लिए कोयले का स्टॉक था। 20 पावर प्लांट के पास 6 दिनों तक के कोयले का स्टॉक पाया गया। वहीं 31 पावर प्लांट के पास 7 से 15 दिनों के लिए कोयले का स्टॉक था।

 

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कोयले के उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जरूरत 

सिंह ने कोल इंडिया के सीएमडी से कहा है कि यह काफी गंभीर विषय है और हालात पर काबू पाने के लिए कोयले के उत्पादन में  रोजाना स्तर पर कम से कम 20 लाख टन की बढ़ोतरी होनी चाहिए। चालू वित्त वर्ष 2018-19 में कोयले के उत्पादन का लक्ष्य 65.22 करोड़ टन है तो कोयले के उठाव (ऑफटेक) का लक्ष्य 68.12 करोड़ टन रखा गया है। कोयला सचिव ने कहा है कि कोल इंडिया एवं उसकी सभी सब्सिडियरी कंपनियों को कोयले के उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए तत्काल रूप से बैठक कर रणनीति बनानी चाहिए। 

 

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122 पावर प्लांट दिक्कत में

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिपोर्ट के मुताबिक 122 पावर प्लांट के कोयले के स्टॉक में सितंबर माह के मुकाबले कमी आई है।  सितंबर में इन 122 पावर प्लांट के पास 1.45 करोड़ टन कोयले का स्टॉक था जो कि 10 दिनों तक के बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त होता है। अक्टूबर में यह स्टॉक कम होकर 1.03 करोड़ टन रह गया है जिनसे अधिक से अधिक 6 दिनों के लिए बिजली का उत्पादन हो सकता है।

 

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मांग से ज्यादा हो रही है खपत

रिपोर्ट में कहा गया कि जहां तक कोल इंडिया के उत्पादन का सवाल है तो चालू वुित्त वर्ष 2018-19 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में कोयले के उत्पादन में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 10.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बताया जा रहा है कि बिजली की अधिक मांग निकलने से कोयले की अधिक खपत हो रही है। 

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