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पैसे के लिए दो अरबपति भाइयों में छिड़ी जंग, कभी दुनिया के लिए थे मिसाल

कहानी में आया ‘मर्डर’ का ट्विस्ट, 10 हजार Cr. में कंपनी बेचकर जमाई थी धाक

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नई दिल्ली. लगभग एक दशक पहले भारत की लीडिंग फार्मा कंपनी रैनबैक्सी (Ranbaxy) को बेचकर दुनिया में धाक जमाने वाले सिंह ब्रदर्स अब एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं। दरअसल आर्थिक गड़बड़ियों के आरोपों से घिरे दोनों भाइयों में तलवार खिंच गई है। बड़े भाई मलविंदर सिंह (malvinder singh) ने एक क्रिमिनल केस फाइल करके अपने छोटे भाई शिविंदर सिंह (shivinder singh), राधा स्वामी सत्संग के आध्यात्मिक गुरु गुरिंदर सिंह ढिल्लो व अन्य पर फाइनेंशियल फ्रॉड्स और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले छोटे भाई शिविंदर सिंह भी बड़े भाई पर मारपीट का आरोप लगा चुके हैं। हालांकि पहले मां के समझाने पर दोनों भाइयों में समझौता हो गया था।

 

मलविंदर सिंह ने की यह शिकायत

मलविंदर सिंह (malvinder singh) ने इकोनॉमिक ऑफेंस विंग में शिकायत फाइल करके आरोप लगाया है कि गुरिंदर सिंह ढिल्लो या बाबा ने अपने वकील फेरिदा चोपड़ा के माध्यम से उन्हें जान से मारने की धमकी दी है। शिकायत के मुताबिक, ‘ढिल्लो ने अपने वकील फेरिदा चोपड़ा के माध्यम से धमकी दी कि यदि वह गुरिंदर सिंह ढिल्लो की मांग मानने के लिए राजी नहीं हुए तो उन्हें राधा स्वामी सत्संग से जुड़े द्वारा रास्ते से हटा दिया जाएगा।’ शिकायत में शिविंदर मोहन सिंह (shivinder singh) और उनके करीबियों पर फंड की हेराफेरी का आरोप भी लगाया गया है।

 

दोनों भाई पहले भी लगा चुके हैं आरोप

इससे पहले दोनों भाई एक-दूसरे पर हमले का आरोप लगा चुके हैं। दिसंबर, 2018 में बड़े भाई मलविंदर ने आरोप लगाया था कि शिविंदर ने उन पर हमला किया। उधर, शिविंदर ने उल्टा आरोप लगाते हुए कहा कि मलविंदर ने उनसे मारपीट की। 
मलविंदर (malvinder singh) का कहना है कि शिविंदर (shivinder singh) प्रियस रियल एस्टेट कंपनी की बोर्ड मीटिंग में दखल देने की कोशिश कर रहे थे। ये मीटिंग ढिल्लन ग्रुप से पैसे की रिकवरी के लिए बुलाई गई थी। मलविंदर का कहना है कि सूचना मिलने पर वे ऑफिस पहुंचे जहां शिविंदर ने उन पर हमला कर दिया। शिविंदर का कहना है कि मलविंदर के आरोप झूठे और बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि मलविंदर ने ही उन पर हमला किया था। उन्होंने पुलिस में भी शिकायत की थी। हालांकि, मां और परिवार के दूसरे सदस्यों के कहने पर शिकायत वापस ले ली। कभी कही जाती थी करण-अर्जुन की जोड़ी...

 

 

कभी दोनों के भाईचारे की दी जाती थी मिसाल

बता दें कि किसी दौर में सिंह भाइयों की आपसी साझीदारी के किस्से फेमस थे। दोनों को एक दूसरे का हम साया तक कहा जाता था। NCLT में दी याचिका में शिविंदर ने कहा था कि 2 दशक से लोग मलविंदर और मुझे एक दूसरे का पर्याय समझते थे। हकीकत यह है कि मैं हमेशा उनका समर्थन करने वाले छोटे भाई की तरह थे।

 

सब कुछ बड़े भाई को दे बन गए संत

यही नहीं 2015 में शिविंदर सब कुछ अपने बड़े भाई मलविंदर के हाथों में सौंप कर राधा स्वामी सत्संग ब्यास में संत बन गए। यहां तक की उन्होंने फोर्टिस हेल्थकेयर के एग्जीक्यूटिव पद को भी छोड़ दिया था। उन्हें लगा कि वह भरोसेमंद हाथों में कंपनी छोड़ कर जा रहे हैं। ब्यास धार्मिक गतिविधि से जुड़ा संगठन है। उत्तर भारत में काफी संख्या में इसके अनुयायी हैं। ब्यास और सिंह भाइयों के पारिवारिक संबंध भी हैं।

 

वापिस लौटे तो बदल गई तस्वीर

शिविंदर को लौटने पर कुछ भी पहले जैसा नहीं मिला। शिविंदर सिंह ने अपने बड़े भाई मलविंदर सिंह और सुनील गोधवानी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। शिविंदर सिंह ने मलविंदर और सुनील गोधवानी के खिलाफ आरएचसी होल्डिंग, रेलिगेयर और फोर्टिस में उत्पीड़न और कुप्रबंधन को लेकर NCLT में मामला दायर किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने बड़े भाई को कारोबारी भागीदारी से भी अलग कर दिया है।

 

 
10 साल पुरानी है विवाद की जड़ 

रैनबैक्सी, फोर्टिस हेल्थकेयर और रेलीगेयर जैसी नामी कंपनियों के प्रमोटर रहे सिंह भाइयों की कलह कई साल पुरानी है। परिवार का यह झगड़ा रैनबैक्सी कंपनी को जापान की दाइची सांक्यो को बेचे जाने के बाद से शुरू हुआ था। इस कंपनी को एक दशक पहले 4.6 अरब डॉलर (तक करीब 1000 हजार करोड़) में बेचा गया था। इसके बाद दोनों भाइयों ने मिलकर कई कारोबार में हाथ आजमाया, लेकिन ग्रुप भारी घाटे में आ गया और उस पर करीब 13,000 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया। समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के चलते ग्रुप की कुछ कंपनियों को अटैच कर लिया गया। इसके चलते दोनों भाइयों को फोर्टिस हैल्थकेयर की अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ी। बिक्री के बाद फोर्टिस के खातों में धांधली के आरोप लगे। कहा गया कि दोनों भाइयों ने फोर्टिस के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए ग्रुप की दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किए।

 

15 साल पहले कारोबार की दुनिया में रखा था कदम

43 साल के शिविंदर अपने बड़े भाई मलविंदर से 3 साल छोटे हैं। दोनों भाइयों के पास फोर्टिस हेल्थकेयर की करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी थी। उसके देशभर में 2 दर्जन से भी ज्यादा अस्पताल हैं। ड्यूक यूनिवर्सिटी से बिजनेस ऐडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद शिविंदर ने करीब 18 साल पहले कारोबार की दुनिया में एंट्री की थी। सिंह ने मैथमैटिक्स में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की है। वह आंकड़ों में बेहद तेज माने जाते हैं। वह दून स्कूल व स्टीफंस कालेज के छात्र रहे हैं।

 

कभी थे दवाई कंपनी रैनबैक्सी के मालिक

शिविंदर सिंह के दादा मोहन सिंह ने 1950 में रैनबैक्सी की कमान संभाली थी, जिसकी विरासत बाद में उनके बेटे परविंदर सिंह को मिली। परविंदर के बेटे मलविंदर और शिविंदर ने रैनबैक्सी को कुछ साल पहले बेचकर हॉस्पिटल्स, टेस्ट लैबोरेटरीज, फाइनैंस और अन्य सेक्टर्स में डायवर्सिफाई किया। दोनों भाइयों ने करीब 10 हजार करोड़ में रैनबैक्सी को एक जापानी कंपनी दाइची सांक्यो को बेच दिया। आज ग्रुप पर करीब 13 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ चुका है। कॉरपोरेट जगत के जानकार समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर करीब 23 हजार करोड़ की रकम का सिंह भाइयों ने किया क्या?

 

मां के बीच में आने पर रुक गया था झगड़ा

दोनों सिंह भाइयों में कलह में नया मोड़ तब आया जब उनकी मां ने बीच-बचाव कराया। अपने बड़े भाई मलविंदर सिंह धोखाधड़ी का आरोप लगाने वाले छोटे भाई शिविंदर सिंह ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT)से केस वापस लेने की घोषणा भी कर दी। यही नहीं NCLT ने उन्हें इस बात की इजाजत भी दे दी है कि वह अपने भाई के खिलाफ केस वापस ले लें। शिविंदर की बीमार मां चाहती थी कि इस मामले को मध्यस्थता के जरिए घरेलू मंच पर ही सुलझाया जाए। वह दोनों भाई अब आपसी बातचीत से मामला सुलझा रहे थे कि अब उनकी हाथापाई की खबरें आ रही हैं।

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