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अरबों की दौलत छोड़कर बन गया था संत, लौटा तो चारों तरफ से बरस रही आफत

सिंह ब्रदर्स पर लगा 2 हजार करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप

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नई दिल्ली. भारत के टॉप अमीरों में शुमार यह शख्स तीन साल पहले जब अपनी अरबों की दौलत छोड़ कर संत बनने चला गया था, तो हर कोई हैरान रह गया था। उस समय दोनों भाइयों के प्यार और आपसी समझ की मिसाल दी जाती थीं। लेकिन अब जब वह लौटा तो उसके ऊपर चारों तरफ से आफत बरसने लगी। इतना ही नहीं उसे अपने भाई के खिलाफ कोर्ट की शरण में जाना पड़ गया। यहीं नहीं लौटने के बाद अभी तक उनकी मुसीबतों का अंत नहीं हुआ है। हम बात कर रहे फोर्टिस के फाउंडर शिविंदर सिंह की, जो 2015 में अपनी अरबों की दौलत छोड़कर राधास्वामी सत्संग ब्यास से जुड़ गए थे। हाल में उनके खिलाफ एक और बड़ा आरोप लगा है।

 

2 हजार करोड़ की हेराफेरी का आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिविंदर सिंह और मलविंदर सिंह की कंपनी रैनबैक्सी को कई साल पहले खरीदने वाली जापानी कंपनी दाइची सैंक्यो ने उनके खिलाफ अपनी ग्रुप कंपनियों के साथ 2 हजार करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया है। जापानी कंपनी ने कहा कि उन्होंने अपनी 25 ग्रुप कंपनियों को उनकी नेटवर्थ से ज्यादा के कर्ज दिए थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और इन कंपनियों को कोर्ट की कार्यवाही में शामिल करने का फैसला किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। इन कंपनियों को नोटिस भी भेजे जाएंगे।

 

अपने कंट्रोल वाली कंपनियों को दिए कर्ज

दाइची के वकीलों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सिंह ब्रदर्स साल 2012 से फरवरी 2018 के बीच फंड की हेराफेरी में शामिल थे। यह हेराफेरी उन कंपनियों के जरिये की गई, जिनसे दोनों प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हुए थे। सिंह बंधुओं के कंट्रोल वाली आरएचसी होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड और एएनआर सिक्युरिटीज जैसी कंपनियों ने इस मामले में शिमल हेल्थकेयर और प्रियस रियल एस्टेट को कर्ज दिया, जिसके बाद उन्होंने यह रकम अपनी डाउनस्ट्रीम सब्सिडियरीज में ट्रांसफर की। वहीं, प्रियस के वकील ने अदालत को बताया कि रियल एस्टेट कंपनी पर सिंह बंधुओं का मालिकाना हक नहीं है और ना ही यह ग्रुप की डाउनस्ट्रीम कंपनी है। मलविंदर सिंह के वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर इन 25 कंपनियों की ओर से कोई कोई वादा नहीं कर सकते, जो इस मुकदमे में पक्ष नहीं हैं।

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कभी करोड़ों का कारोबार भाई के हवाले कर संत बन गए थे शिविंदर

बता दें कि किसी दौर में सिंह भाइयों की अंडरस्टैंडिंग के किस्से फेमस थे। दोनों को एक दूसरे का हमसाया तक कहा जाता था और कॉरपोरेट जगत में उनकी मिसाल भी दी जाती थी। यही नहीं 2015 में शिविंदर सबकुछ अपने बड़े भाई  मलविंदर के हाथों में सौंप कर राधा स्वामी सतसंग ब्यास में संत बन गए थे। यहां तक की उन्होंने फोर्टिस हेल्थकेयर के एग्जीक्यूटिव पद को भी छोड़ दिया था। ब्यास धार्मिक गतिविधि से जुड़ा संगठन है। उत्तर भारत में काफी संख्या में इसके अनुयायी हैं। ब्यास और सिंह भाइयों के पारिवारिक संबंध  भी हैं।


आगे पढ़ें- एक दूसरे की परछाई की तरह थे   

 

 

 

एक दूसरे की परछाई की तरह थे   

NCLT में हाल में याचिका दायर करने के बाद शिविंदर ने कहा कि 2 दशक से लोग मलविंदर और मुझे एक दूसरे का पर्याय समझते थे। हकीकत यह है कि मैं हमेशा उनका समर्थन करने वाले छोटे भाई की तरह था। मैंने सिर्फ फोर्टिस के लिए काम किया। 2015 में राधास्वामी सत्संग, ब्यास से जुड़ गया। मैं भरोसेमंद हाथों में कंपनी छोड़ गया था। लेकिन दो साल में ही कंपनी की हालत खराब हो गई। परिवार की प्रतिष्ठा के कारण अब तक चुप रहा। ब्यास से लौटने के बाद कई महीनों से कंपनी संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन विफल रहा।

आगे पढ़ें-करीब 15 साल पहले कारोबार की दुनिया में रखा था कदम

 

 

 

करीब 15 साल पहले कारोबार की दुनिया में रखा था कदम

43 साल के शिविंदर अपने भाई मलविंदर से 3 साल छोटे हैं। दोनों भाइयों के पास फोर्टिस हेल्थकेयर की करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी थी। उसके देशभर में 2  दर्जन से भी ज्यादा अस्पताल हैं। ड्यूक यूनिवर्सिटी से बिजनेस ऐडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद शिविंदर ने करीब 18 साल पहले कारोबार की दुनिया में एंट्री की थी। सिंह ने मैथमैटिक्स में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की है। वह आंकड़ों में बेहद तेज माने जाते हैं। वह दून स्कूल व स्टीफंस कालेज के छात्र रहे हैं।  

आगे पढ़ें- ये हैं सिंह भाइयों की पूरी कुंडली  

 

 

 

ये हैं सिंह भाइयों की पूरी कुंडली  

शिविंदर सिंह के दादा मोहन सिंह ने 1950 में रैनबैक्सी की  कमान संभाली थी, जिसकी विरासत बाद में उनके बेटे परविंदर सिंह को मिली। परविंदर के बेटे मलविंदर और शिविंदर ने रैनबैक्सी को कुछ साल पहले बेचकर हॉस्पिटल्स, टेस्ट लैबोरेटरीज, फाइनैंस और अन्य सेक्टर्स में डायवर्सिफाई किया। बताते हैं कि दोनों भाइयों ने करीब 10 हजार करोड़ में रैनबैक्सी को एक जापानी कंपनी के हाथों बेचा था। आज ग्रुप पर करीब 13 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ चुका है। कॉरपोरेट जगत के जानकार समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर करीब 23 हजार करोड़ की रकम का सिंह भाइयों ने किया क्या?

आगे पढ़ें- परिवार में विवाद नहीं फैलाना चाहता था

 

 

परिवार में विवाद नहीं फैलाना चाहता था

शिविंदर सिंह ने एक बयान में कहा कि उन्होंने मलविंदर और सुनील गोधवानी के खिलाफ एनसीएलटी में मामला दायर किया है। यह मामला आरएचसी होल्डिंग, रेलिगेयर और फोर्टिस में उत्पीड़न और कुप्रबंधन को लेकर दायर किया गया है। शिविंदर के मुताबिक, मलविंदर और गोधवानी के साझा कदमों से समूह की कंपनियों और शेयरधारकों के हितों को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से यह कार्रवाई करना चाहते थे, लेकिन इस उम्मीद में रुके हुए थे कि उन्हें सद्बुद्धि आएगी और पारिवारिक विवाद का एक नया अध्याय नहीं लिखना पड़ेगा। हालांकि बाद में मां के समझाने पर शिविंदर सिंह ने मामला वापस ले लिया था।

आगे पढ़ें- विवाद की जड़ 10 साल पुरानी

 

 

विवाद की जड़ 10 साल पुरानी 

परिवार का यह झगड़ा रैनबैक्सी कंपनी को जापान की दाइची सांक्यो को बेचे जाने के बाद से शुरू हुआ था। इस कंपनी को एक दशक पहले 4.6 अरब डॉलर (तक करीब 1000 हजार करोड़)  में बेचा गया था। इसके बाद दोनों भाइयों ने मिलकर कई कारोबार में हाथ आजमाया, लेकिन ग्रुप भारी घाटे में आ गया और उस पर करीब 13,000 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया। समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के चलते ग्रुप की कुछ कंपनियों को अटैच कर लिया गया। इसके चलते दोनों भाइयों को फोर्टिस हैल्थकेयर की अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ी। बिक्री के बाद फोर्टिस के खातों में धांधली के आरोप लगे। कहा गया कि दोनों भाइयों ने फोर्टिस के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए ग्रुप की दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किए। 

 

 

बाहरी एजेंसी से जांच कराएगी फोर्टिस 

इससे पहले फोर्टिस हेल्थकेयर ने कहा था कि वह एक बाहरी एजेंसी से कंपनी के फंड को गलत तरीके से दूसरी जगह ट्रांसफर किए जाने की स्वतंत्र जांच कराएगी। इससे पहले फरवरी में शुरू की गई जांच में कंपनी के खातों में कई तरह की गड़बड़ियां पाई गई थीं। फोर्टिस का कहना है कि कंपनी के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए की रकम लगत तरीकों से दूसरी जगह ट्रांसफर की गई। सिंह बंधुओं ने फोर्ट‍िस हॉस्प‍िटल को बेंगलुरू स्थ‍ित मणिपाल हॉस्प‍िटल एंटरप्राइज को बेचा था। इसके साथ ही मणिपाल हॉस्प‍िटल ने सिंह बंधु की डायग्नोस्ट‍िक कंपनी SRL में भी हिस्सेदारी खरीदी थी। शिविंदर के ताजा कदम को नई जांच से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 

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