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इंडिगो के बाद जेट एयरवेज की भी एअर इंडिया पर ‘ना’, कहा-नहीं लगाएंगे बिड

इंडिगो के बाद जेट एयरवेज ने भी एअर इंडिया के लिए बिड लगाने से इनकार कर दिया है।

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मुंबई. इंडिगो के बाद प्राइवेट सेक्टर की देश की सबसे बड़ी एविएशन कंपनी जेट एयरवेज ने भी एअर इंडिया के लिए बिड लगाने से इनकार कर दिया है। इसे सरकार की अपने स्वामित्व वाली एअर इंडिया को बेचने की योजना के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। सरकार इन दिनों कर्ज के बोझ से दबी एअर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन की योजना पर काम कर रही है।

 

 

बिड लगाने से जेट का इनकार
जेट एयरवेज के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव अमित अग्रवाल ने एएफपी को ईमेल से भेजे स्टेटमेंट में कहा, ‘हम सरकार की एअर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन की योजना का स्वागत करते हैं। हालांकि इन्फोर्मेशन मेमोरैंडम में ऑफर की शर्तों पर विचार करने और हमारे रिव्यू के आधार पर हम इस प्रोसेस में भाग नहीं ले रहे हैं।’

 

 

49 हजार करोड़ रुपए का है कर्ज
एक समय देश के एविएशन मार्केट पर एकाधिकार रखने वाली एअर इंडिया धीरे-धीरे नई प्राइवेट कंपनियों के हाथों अपना मार्केट शेयर गंवाती चली गई। एअर इंडिया पिछले लगभग एक दशक से घाटे में चल रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी पर कर्ज बढ़कर 7.67 अरब डॉलर (लगभग 49 हजार करोड़ रुपए) हो चुका है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सरकारी एविएशन कंपनी को 5.8 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज मिल चुका है, लेकिन अभी उसे और वर्किंग कैपिटल की जरूरत है।

 


एअर इंडिया की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की है योजना
सरकार ने हाल में कहा था कि वह मुश्किलों से जूझ रही एविएशन कंपनी की 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। सरकार ने इसके लिए बिड डॉक्यूमेंट्स जारी कर दिया है, जो देश की सबसे ज्यादा चर्चित बिक्री होगी। सरकार ऐसा खरीदार खोज रही है, जो एअर इंडिया के सभी ऑपरेशंस को अपने हाथ में ले ले। 

 

 

इंडिगो पहले ही कर चुकी है इनकार 
इंडिगो ने भी हाल में संकेत दिए थे कि वह सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली नहीं लगाएगी। इंडिगो  इंडिगो ब्रॉन्ड के तहत ऑपरेट करने वाली इंटरग्लोब एविएशन ने कहा कि वह एयर इंडिया को खरीदने की रेस में नहीं है। कंपनी का कहना है कि इसके लिए सरकार ने जो टर्म रखे हैं, वह हमें सूट नहीं कर रहा है। 
इंडिगो के अध्यक्ष एवं पूर्णकालिक निदेशक आदित्य घोष ने एक बयान जारी कर कहा कि पहले इंडिगो ने एयर इंडिया के इंटरनेशनल ऑपरेशन को खरीदने में रुचि दिखाई थी। हालांकि, एयर इंडिया के विनिवेश के लिए सरकार की मौजूदा योजना के तहत यह विकल्प उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि एयर इंडिया को पूरी तरह से अक्वायर करने और उसके ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को पटरी पर लाने के लिए हमारे पास क्षमता है। 

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