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ICICI बैंक कस्टमर्स ने लोन रीस्ट्रक्चरिंग में अविस्ता की ली मदद, चंदा कोचर के रिश्‍तेदार की है कंपनी

रिपोर्ट के मुताबिक आईसीआईसीआई बैंक के कुछ बड़े कस्टमर्स ने अपने लोन की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए अविस्ता ग्रुप की मदद ली है।

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नई दिल्ली. आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ और एमडी चंदा कोचर के पति दीपक कोचर वीडियोकॉन को लोन मामले में सवालों के घेरे में हैं ही, अब उनके भाई का नाम भी सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आईसीआईसीआई बैंक के कुछ बड़े कस्टमर्स ने अपने लोन की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए अविस्ता ग्रुप की मदद ली है। यह एक फाइनेंशियल एडवाइजरी कंपनी है, जिसके मालिक चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के भाई राजीव कोचर हैं। हालांकि इस मामले में आईसीआईसीआई बैंक का कहना है कि किसी सेवा के लिए अविस्टा एडवाइजरी ग्रुप से जुड़ा नहीं रहा है।



 

जिन ग्राहकों का नाम इस मामले में सामने आया है, उनमें जयप्रकाश एसोसिएट, जीटीएल इंफ्रा, सुजलॉन और जयप्रकाश पावर भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन लोगों ने लोन की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए अविस्ता ग्रुप को हॉयर किया था। इस कंपनी को पिछले 6 साल में 7 कंपनियों के करीब 170 करोड़ डॉलर के विदेशी मुद्रा लोन को रीस्ट्रक्चर करने का काम मिला है। संयोग से ये सभी कंपनियां आईसीआईसीआई बैंक की भी कर्जदार हैं। ऐसी ही एक डील में कर्जदारों का लीड बैंक आईसीआईसीआई है।

 

 

जेपी ग्रुप ने भी कंफर्म किया

जेपी ग्रुप के स्पोकपर्सन ने तो अविस्ता एडवायजरी को हॉयर करने की बात कंफर्म भी की है। उन्होंने कहा है कि इसके लिए मार्केट स्टैंडर्ड के अनुसार ही फी भी पे की गई है। स्पोकपर्सन के अनुसार इसके लिए अविस्ता को रीस्ट्रक्चर्ड फॉरेन करंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCBs) का 0.75 फीसदी से 1 फीसदी पे किया गया है।

जयप्रकाश एसोसिएट और जयप्रकाश पावर द्वारा रीस्ट्रक्चर्ड फॉरेन करंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स की वैल्यू 11 करोड़ डॉलर और 22.5 करोड़ डॉलर रही है। हालांकि जेपी ग्रुप की ओर से कहा गया है कि अविस्ता एडवायजरी ने सिर्फ लोन रीसट्रक्चरिंग में मदद की है। यह कभी जेपी ग्रुप की किसी भी कंपनी के लिए किसी लोन सिंडिकेशन में इनवॉल्व नहीं रहा है।

 

 

क्या है लोन रीस्ट्रक्चरिंग

जब कोई कंपनी लोन चुकाने की स्थ‍िति में नहीं रहती, तो वह लोन की बेसिक शर्तों और कंडीशंस में राहत देने की मांग करती है। इसे ही लोन रीस्ट्रक्चरिंग कहते हैं। बैंक ऐसे में कई बार कुछ रियायतें देते हैं, जैसे-ब्याज दर में कमी, ब्याज लेने से छूट, लोन चुकाने की अवधि में बदलाव आदि।


ये है वीडियाकाॅन लोन विवाद

वीडियोकॉन को 3250 करोड़ रुपए लोन देने में गड़बड़ी के आरोपों की सीबीआई प्रारंभिक जांच कर रही है। यह लोन 2012 में दिया गया था। आरोप है कि इस लोन से चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को फायदा हुआ था। आरोप है कि वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत ने 64 करोड़ रुपए का निवेश न्‍यू पॉवर में किया था, जिसका मालिकाना हक दीपक कोचर का है। यह लोन बैंकों के एक समूह ने दिया था, जिसमें आईसीआईसीआई बैंक भी शामिल था।

 

ICICI बैंक का गड़बड़ी से इनकार

ICICI बैंक देश का तीसरा सबसे बड़ा निजी बैंक है। बैंक के बोर्ड ने इस लोन को देने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। यह लोन बैंकों के एक समूह ने दिया था, जिसमें ICICI बैंक सिर्फ एक सदस्‍य था। बैंक के बोर्ड ने चंदा कोचर का बचाव करते हुए कहा कि उन पर लगाए जा रहे आरोपों में दम नहीं है।

 



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