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वीडियोकॉन मामले में ICICI ने चंदा कोचर का किया बचाव, कहा-नियमों में रहकर दिया लोन

नई दिल्ली. वीडियोकॉन ग्रुप को 3250 करोड़ रुपए लोन देने के मामले में आईसीआईसीआई बैंक मैनेजमेंट ने बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर का बचाव किया है। आईसीआईसीआई बैंक का कहना है कि वीडियोकॉन ग्रुप को लोन देने  का फैसला क्रेडिट पैनल ने लिया था। चंदा कोचर उस पैनल की हिस्सा थीं, न कि हेड। बैंक मैनेजमेंट का कहना है कि चंदा कोचर ने जो कुछ भी किया, नियमों में रहकर ही किया है। वीडियोकॉन को फेवर करने के मामले में बैंक का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं, जिसका उद्देश्‍य बैंक को बदनाम करना है। 

 

 

क्रेडिट पैनल की हेड नहीं थीं कोचर 
आईसीआईसीआई बैंक के चेयरमैन एमके शर्मा का कहना है कि बोर्ड लोन के इंटरनल प्रॉसेस का रिव्यू कर चुकी है। लोन सीधे वीडियोकॉन ग्रुप को डिस्बर्स नहीं किया गया था, बल्कि यह एक एस्क्रो पूल अकाउंट में भेजा गया था। वीडियोकॉन ग्रुप को सैंक्शन होने वाले शेयर 10 फीसदी से भी कम हैं। उनका कहना है कि चंदा कोचर वीडियोकॉन को कर्ज दिए जाने के मामले में सिर्फ इवैल्युएटिंग के लिए क्रेडिट पैनल में थीं। वह क्रेडिट पैनल की हेड नहीं थीं। 

 

इससे पहले बुधवार को बैंक ने कहा, ‘बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि किसी लेनदेन/मिलीभगत/हितों के टकराव का कोई सवाल ही नहीं उठता, जैसा कई अटकलबाजी में आरोप लगाए गए हैं। बोर्ड का बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर पर पूरा भरोसा है।’

 

20 बैंकों के कंसोर्टियम ने दिया लोन 
आईसीआईसीआई बैंक के अनुसार 2012 में 20 बैंकों के कंसोर्टियम ने नियमों के मुताबिक विडियोकॉन ग्रुप को 40 हजार करोड़ रुपए का लोन देने का फैसला किया था। जिसमें से ICICI बैंक ने भी 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया। बैंक ने यह लोन उसी तरह की नियम और शर्तों पर दिया है जिस तरह के नियम शर्तों पर समूह के दूसरे बैंकों ने दिया है, ऐसे में वीडियोकॉन ग्रुप को विशेष लाभ दिए जाने की संभावना ही नहीं उठती।

 

 

चंदा कोचर पर उठे थे सवाल

इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वीडियोकॉन ग्रुप को आईसीआईसीआई बैंक ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था। यह लोन पूरा नहीं चुकाया गया। बाद में वीडियोकॉन की मदद से बनी एक कंपनी आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की अगुअाई वाले ट्रस्ट के नाम कर दी गई।

रिपोर्ट में दावा किया गया है, ‘‘वीडियोकॉन ग्रुप की पांच कंपनियों को अप्रैल 2012 ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया गया था। ग्रुप ने इस लोन में से 86% यानी 2810 करोड़ रुपए नहीं चुकाए। इसके बाद लोन को 2017 में एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट्स) घोषित कर दिया गया।’’ 

दिसंबर 2008 में वीडियोकॉन ग्रुप के मालिक वेणुगोपाल धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के साथ मिलकर एक कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाई। इसमें कोचर के परिवार और धूत की हिस्सेदारी 50-50 फीसदी की थी। दीपक कोचर को इस कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया। 

जनवरी 2009 में धूत ने इस कंपनी में डायरेक्टर का पद छोड़ दिया। उन्होंने ढाई लाख रुपए में अपने 24,999 शेयर्स भी न्यूपावर में ट्रांसफर कर दिए।

आरोप हैं कि 2010 से 2012 के बीच धूत की कंपनी ने कोचर की कंपनी को लोन दिया। आखिर में 94.99 फीसदी होल्डिंग वाले शेयर महज 9 लाख रुपए में चंदा कोचर के पति की अगुआई वाली कंपनी को मिल गए।

 

 

क्रेडिट अप्रूवल की प्रक्रिया खासी मजबूत
प्राइवेट सेक्टर के लेंडर ने बुधवार को रेग्युलेटरी फाइलिंग के माध्यम से सफाई दी थी, जिसमें उसने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक बोर्ड ने क्रेडिट अप्रूवल के लिए बैंक की आंतरिक प्रक्रिया की समीक्षा भी की और उसे खासा मजबूत पाया। हाल में एक वेबसाइट पर आई रिपोर्ट में वीडियोकॉन को लोन देने में कोचर और उनके फैमिली मेंबर्स की लिप्पता के आरोप लगाए गए थे। इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि कोचर के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को भी भेजी गई है।

 

 

ICICI सिर्फ कंसोर्टियम का हिस्सा भर

यह भी कहा गया कि बैंक और उसके टॉप मैनेजमेंट की छवि बिगाड़ने के लिए ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। वीडियोकॉन ग्रुप को कर्ज के संबंध में बैंक ने कहा कि बैंक का कर्ज एक कंसोर्टियम अरेंजमेंट का हिस्सा भर है।  बैंक ने कहा, ‘आईसीआईसीआई बैंक इस कंसोर्टियम का लीड बैंक नहीं है और बैंक ने सिर्फ इसके सिर्फ एक हिस्से के लिए मंजूरी दी थी, जो लगभग 3,250 करोड़ रुपए है। अप्रैल, 2012 में दिए गए कुल कर्ज यह 10 फीसदी से भी कम है।’

 

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