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गर्मियों में महंगी होगी बिजली! कोयले की कमी से प्राइवेट सेक्टर के पावर प्लांट्स प्रभावित

कोयले की कमी से इंडीपेंडेंट पावर प्रोजेक्ट्स की कैपेसिटी यूटीलाइजेशन यानी प्‍लांट लोड फैक्‍टर पर प्रभाव पड़ रहा है।

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नई दिल्‍ली। कोयले की कमी से देश में इंडीपेंडेंट पावर प्रोजेक्ट्स की कैपेसिटी यूटीलाइजेशन यानी प्‍लांट लोड फैक्‍टर पर प्रभाव पड़ रहा है। कैपेसिटी यूटीलाइजेशन पूरा न हो पाने से इस सीजन की गर्मियों में पावर एक्सचेंज में बिजली की हाजिर कीमत बढ़ सकती है। यानी इस साल गर्मियों में बिजली के दाम ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं। 

 

पावर सेक्टर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले साल कोयले की कमी की वजह से एनर्जी एक्सचेंजेज में बिजली के हाजिर कीमत में बढड़ोत्तरी हुई थी और भाव 11 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गया था। गर्मियों में जब मांग पीक लेवल पर पहुंचेगी, तब बिजली की दरों में उसी तरह से बढ़ोत्तरी हो सकती है।   

 

निजी कंपनियों पर दबाव  
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार इंडीपेंडेंट पावर प्रोजेक्ट्स (आईपीपी) यानी निजी क्षेत्र की बिजली परियोजनाओं का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन फरवरी 2018 में 52.54 फीसदी रहा, जो एक साल पहले 59.54 फीसदी था। आंकड़ों के अनुसार सेंट्रल सेक्टर के प्रोजेक्ट्स का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन उस दौरान बढ़कर 76.59 फीसदी रहा, जो इससे एक साल पहले फरवरी में 72.93 फीसदी था। 

 

इसी तरह राज्य परियोजनाओं का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन फरवरी में बढ़कर 61.76 फीसदी हो गया, जो एक साल पहले इसी महीने में 54.41 फीसदी था। विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी प्रोजेक्ट्स के मुकाबले इंडीपेंडेंट पावर प्रोजेक्ट्स का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन कम होना निजी कंपनियों पर दबाव का संकेत हैं।

 

हॉयर कैपेसिटी पर ऑपरेट करने में सक्षम नहीं 
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिपेंडेंट पावर प्रोजेक्ट्स की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन घटने से ये कंपनियां प्लांट को बिजलीघर को वायबल रखने के लिए उसे हॉयर कैपेसिटी पर ऑपरेट करने में सक्षम नहीं हैं। उनका मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी की पावर प्रोडक्शन में हिस्सेदारी बढ़ रही है, जिसका कारण कोयले तक बेहतर पहुंच है। वहीं 2.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश वाली 50,000 मेगावाट के

इंडीपेंडेंट पावर प्रोजेक्ट दबाव में हैं। 

 

सप्लाई-डिमांड में आएगी दिक्कत 
विशेषज्ञों का कहना है कि कोयले की कमी, बिजली वितरण कंपनियों से पेमेंट  में देरी, इंपोर्टेड कोयले के भाव में उतार-चढ़ाव और उठाव को लेकर समझौते नहीं होने से आईपीपी गर्मियों में बिजली की मांग में बढ़ोत्तरी को पूरा करने के लिए बेहतर भूमिका निभाने में सफल नहीं रहेंगी। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार आईईएक्स में बिजली की दर मार्च महीने में पिछले महीने के मुकाबले 24 फीसदी बढ़कर 4.02 रुपए प्रति यूनिट पर पहुंच गई है।

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