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अब पेट्रोल नहीं, पानी और एल्यूमिनियम से भी चलेंगी गाड़ियां, जानिए कैसे

आईआईटी रुड़की के छात्रों ने बनाई एक अनोखी बैटरी

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नई दिल्ली। अभी तक गाड़ियों को चलाने के लिए पेट्रोल-डीजल और सीएनजी का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन जल्द ही गाड़ियां पानी की मदद से भी चल सकेंगे। यह सुनकर आपको जरूर हैरानी हो रही होगी लेकिन यह बिल्कुल सच है। पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों को देखते हुए आईआईटी रुड़की के छात्रों  ने एक ऐसी बैटरी बनाने का दावा किया है जो पेट्रोल या डीजल से  नहीं बल्कि पानी से चलेगी। यह बैटरी एल्यूमिनियम और पानी के कैमिकल रिएक्शन से एनर्जी देगी। आईआईटी रुड़की के छात्रों  ने दावा किया है कि पानी की मदद से यह बैटरी 1000 किमी तक कार को चला सकती है। 

 

इस बैटरी से 1000 किमी तक चल सकती है कार
इस बैटरी को मार्केट में लाने की कोशिश करने  वाले लॉग 9 मटिरियल्स के फाउंडर अक्षय  सिंघल ने कहा कि अभी मार्केट में जो इलेक्ट्रिक कारे हैं उनकी ड्राइविंग रेंज 100 से 150 किमी के बीच होती है। जिसके बाद उन्हें चार्ज करने की जरूरत पड़ती है। इन्हीं सब चीजों के चलते लोग इलेक्ट्रिक कारों को नहीं  चुन रहे हैं। इसलिए उन्होंने ऐसी बैटरी बनाई है जिसे बार-बार ,चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस बैटरी में एक बार फ्यूल के तौर पर एल्यूमिनियम और पानी भरने के बाद कार 1000 किमी तक चल सकती है।

 

अगली स्लाइड में पढ़ें इस बैटरी वाली कारों से प्रदूषण नहीं होगा

इस बैटरी की कीमत लीथियम आयन बैटरी की कीमत से  3 लाख रुपए कम 
छात्रों ने कहा कि इन्हीं खूबियों के चलते यह बैटरी और पेट्रोल से चलने वाली कारों से कहीं ज्यादा अच्छी है। क्योंकि इस बैटरी वाली कारों से प्रदूषण नहीं होगा। और ना ही इन कारों को चार्ज करने  की जरूरत पड़ेगी। इन कारों की बैटरियों में बस एल्यूमिनियम और पानी भरवाना पड़ेगा। इस बैटरी को बना रहे छात्रों ने बताया कि यह इलेक्ट्रिक कारों में लगी लीथियम आयन बैटरी को रिप्लेस करती है। इलेक्ट्रिक कारों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही छात्रों ने बताया कि इस बैटरी की कीमत लीथियम आयन बैटरी की कीमत से  3 लाख रुपए कम पड़ेगी।

 

अगली स्लाइड में पढ़ें कार चलाने का खर्च लगभग 5 रुपए प्रति किमी

इससे लॉन्ग टर्म में बैटरी बदलने में आने वाला खर्च भी बचेगा
इस बैटरी से कार चलाने का खर्च लगभग 5 रुपए प्रति किमी आएगा। इसके साथ ही इससे लॉन्ग टर्म में बैटरी बदलने में आने वाला खर्च भी बचेगा। इस बैटरी में हर 1000 किमी के बाद एल्यूमिनियम और पानी डालना होगा। इस बैटरी को बाजार में उतारने के लिए काम चल रहा है। अभी अगर किसी इलेक्ट्रिक कार की कीमत 10 लाख रुपये है तो उसमें सिर्फ बैटरी की कॉस्ट ही 6 लाख रुपये आती है वहीं इस बैटरी का इस्तेमाल करने से बैटरी की कॉस्ट 3 लाख रुपए आएगी।

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