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एक कंप्यूटर और 40,000 रुपए से बना डाला दिल्ली का ऑनलाइन सदर बाजार, अब है 430 करोड़ का कारोबार

5 करोड़ से अधिक प्रोडक्ट की होती है यहां खरीद-फरोख्त

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राजीव कुमार

 

दिल्ली का सदर बाजार। उत्तर भारत का सबसे मशहूर थोक बाजार। जहां सुई से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स सामान तक थोक दाम पर मिलते हैं। जहां सैकड़ों नहीं, हजारों कारोबारी रोजाना व्यापार करने आते हैं। इस प्रकार के दूसरे बाजार की परिकल्पना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। लेकिन एक बीटेक ग्रेजुएट ने मात्र एक कंप्यूटर और 40,000 रुपए की पूंजी से ऑनलाइन सदर बाजार बना डाला। यहां 5 करोड़ से अधिक प्रोडक्ट का कारोबार होता है।

 

6 करोड़ खरीदार तो 47 लाख विक्रेता रजिस्टर्ड है इस ऑनलाइन थोक बाजार में। इनमें से 10 लाख से अधिकत तो मैन्यूफैक्चरर्स हैं। इस बी2बी (बिजनेस टू बिजनेस) ऑनलाइन बाजार का नाम है इंडिया मार्ट। जहां वित्त वर्ष 2017-18 में 430 करोड़ रुपए का कारोबार किया गया। हम बात कर रहे हैं इसके संस्थापक एवं सीईओ दिनेश अग्रवाल की। जल्द ही वह अपनी कंपनी को स्टॉक मार्केट में लिस्ट कराने जा रहे हैं।

 

हर सेकेंड 20 क्रेता-विक्रेताओं का मिलन

अग्रवाल ने मनी भास्कर को बताया कि इंडियामार्ट के प्लेटफार्म पर हर सेकेंड 20 क्रेता-विक्रेताओं का मिलन (मैच) होता है। यानी कि 15 लाख एक दिन में। हर महीने 4.5 करोड़। अग्रवाल ने बताया कि कंपनी में  3500 लोगों को डायरेक्ट रोजगार मिला हुआ है। राजनैतिक एवं कारोबारी घराने से ताल्लुक रखने वाले अग्रवाल ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री ली। अग्रवाल ने बताया कि उनके दादाजी स्वतंत्रता सेनानी थे और 1957 में बहराइच इलाके से एमएलए भी रहे। कानपुर से बीटेक की डिग्री लेने के बाद 1992-95 तक उन्होंने विदेश में नौकरी की। 1995 में भारत में इंटरनेट लांच हुआ, तब वह अमेरिका में एचसीएल में नौकरी करते थे। लेकिन तभी उन्होंने सोच लिया था कि अब कारोबार करना है। अग्रवाल ने बताया कि 1996 में उन्होंने एक कंप्यूटर और 40,000 रुपए से इंडियामार्ट की शुरुआत की।

 

अग्रवाल ने बताया कि उनके इस कारोबारी प्लेटफार्म पर ऐसे-ऐसे प्रोडक्ट बिक  रहे हैं जिनके बारे में आपने-हमने सुना भी नहीं है। उन्हें खुद पता नहीं होता है कि उनकी साइट्स पर क्या-क्या बिक रहे हैं। अपने बिजनेस मॉडल के बारे में उन्होंने बताया कि एक लाख से अधिक सप्लायर्स उन्हें शुल्क देते हैं। इन सप्लायर्स को कंपनी की तरफ से सर्च में प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा वे इन सप्लायर्स को और भी कई सुविधाएं देते हैं।

शुरू में निर्यातकों के लिए काम होता था इस प्लेटफार्म पर

अग्रवाल ने बताया कि 1996 में जब उन्होंने इस पोर्टल की शुरुआत की तो उनके जेहन में निर्यातक थे। क्योंकि निर्यातक उस जमाने में भी इंटरनेट से वाकिफ होते थे। वर्ष 2008 तक मुख्य रूप से निर्यातकों के ऑनलाइन कारोबार के लिए उनके प्लेटफार्म का इस्तेमाल हुआ। लेकिन 2008-09 में उन्होंने इस प्लेटफार्म पर घरेलू थोक कारोबार को लाने का फैसला किया। 2009-10 में इंडियामार्ट को घरेलू स्वरूप दिया गया। पिछले 10 सालों में इंडियामार्ट प्लेटफार्म पर 80 फीसदी घरेलू कारोबार होता है।

थोक कारोबारियों को मशक्कत के बाद प्लेटफार्म पर लाए

अग्रवाल ने मनी भास्कर को बताया कि उस जमाने में जब सोशल मीडिया नहीं था, मोबाइल फोन नहीं थे, थे भी तो काफी महंगे, तो थोक कारोबारियों को ऑनलाइन कारोबार के लिए तैयार करना कठिन था। वह थोक बाजार एसोसिशन, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल जैसी एजेंसियों की मदद से कारोबारियों एवं मैन्यूफैक्चरर्स की सूची हासिल करते थे। फिर उन्हें डाक द्वारा चिट्ठी भेजने का काम होता था। ऐसे करके उन्होंने लोगों को इंडियामार्ट के प्लेटफार्म पर लाने का काम किया। अब तो 1000 लोग उनकी सेल्स टीम में है जो लोगों ऐप की मदद से कारोबारियों को इस प्लेटफार्म से जोड़ने का काम भी करते हैं। 

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