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लॉकर में हैं कीमती सामान तो हिफाजत का रखें इंतजाम, बैंक जिम्मेदार नहीं

बैंक में रखे कीमती सामान की हिफाज़त का आपको खुद ही इंतजाम करना होगा।

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नई दिल्ली। बैंक के लॉकर में आपका सामान रखा है तो आपको अलर्ट रहने की जरूरत है। बैंक में रखे कीमती सामान की हिफाज़त का आपको खुद ही इंतजाम करना होगा। क्योंकि किसी बैंक की शाखा में सेंध लग जाए या फिर वहां डकैती हो जाए तो बैंक लॉकर में रखे सामान की जिम्मेदारी नहीं लेता है। बैंक का कहना है कि लॉकर में क्या रखा है, यह जानकारी बैंक को नहीं होती है। इसीलिए बैंक की देनदारी नहीं बनती। जब कोई ग्राहक लॉकर की सुविधा लेता है तो उसे बैंक के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं। समझौते में साफ लिखा होता है कि लॉकर में रखे सामान को अगर किसी भी तरह का नुकसान हो जाता है तो बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। यह कहकर बैंक हर तरह की जवाबदेही और देनदारी से पल्ला झाड़ लेता है। 

 

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के विशेषज्ञों के मुताबिक बैंक और ग्राहकों के बीच मकान मालिक और किरायेदार जैसे रिश्ते होते हैं। किरायेदार के घर चोरी हो जाए तो मकान मालिक की कोई जिम्मेदारी नहीं होती। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2014-15 और 2016-17 के बीच 51 बैंकों में लूट, चोरी, डकैती और सेंधमारी की 2,632 वारदात हुई थीं, जिनमें लगभग 180 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बैंकिंग विशेषज्ञों के मुताबिक रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुसार बैंकों को लॉकरों की हिफाजत के लिए जरूरी एहतियात बरतना जरूरी है। इसमें आम तौर पर पूरी तरह सुसज्जित अलार्म सिस्टम, लोहे के दरवाजे वाले कमरे, सुरक्षाकर्मी और सीसीटीवी के जरिये लॉकर कक्ष के भीतर एवं बाहर की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी शामिल है।

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आगें पढ़ें, लूट चुके माल के वापस आने की संभावना नहीं

लूट चुके माल के वापस आने की संभावना नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक डकैती या चोरी में लॉकर से जा चुके माल के वापस मिलने की संभावना काफी कम होती है। केवल ग्राहक को ही पता होता है कि उसके लॉकर में क्या रखा था। डकैती होने पुलिस और बैंक ग्राहक के दावे की सच्चाई का पता लगाने के लिए क्लोज्ड सर्किट टेलिविजन (सीसीटीवी) पर ही भरोसा करते हैं। जाहिर है कि सीसीटीवी फुटेज में इसका पता लगना बहुत मुश्किल है। फिर भी कुछ तरीके हैं, जिन्हें आजमाने पर आपका कीमती सामान सुरक्षित रह सकता है और अगर लूटपाट हो भी जाए तो आपका दावा सच माना जा सकता है। 

 

अगली स्लाइड में पढ़ें क्या है उपाय

क्या है उपाय

लॉकर में रखे गए सामान की खरीद का सबूत यानी रसीदें अपने पास जरूर रखें। साथ ही आपने क्या-क्या रखा है, इसकी सूची लॉकर में भी रखें और अपने घर पर भी रखें। यह बहुत जरूरी है क्योंकि अगर आपका सामान चोरी हो जाता है तो इससे आपको लॉकर में रखे सामान की कीमत का हिसाब-किताब लगाने में और मुआवजे का दावा करने में मदद मिलेगी। अगर आप लॉकर में किसी तरह के दस्तावेज रख रहे हैं तो उनका लैमिनेशन कराना नहीं भूलें। आप लॉकर के सामान के लिए इंश्योरेंस भी ले सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा बीमा खरीदते समय पॉलिसी में दी गई शर्तों को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि उसमें कुछ खास वस्तुओं के लिए ही बीमा होने की बात कही गई हो। कई बार ऐसी बीमा पॉलिसी में केवल कीमती धातुओं से बने गहनों, हीरों, कलाकृतियों आदि को ही शामिल किया जाता है। इंश्योरेंस की प्रीमियम राशि इस बात पर निर्भर करती है कि बीमा की रकम क्या तय की गई है।    

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