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शहर के लिए जो थी बड़ी मुसीबत, उसी से करने लगे डेली 15 हजार रु की कमाई

भिखारियों के सहारे बदल दी राजस्थान के डूंगरपुर की तस्वीर

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नई दिल्ली. एक समय कचरा शहर के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ था, उसे ही रेवेन्यू का बड़ा हथियार बना लिया। हैरत की बात है कि इस शहर में कचरे रोजाना 15 हजार रुपए की कमाई रही है, बल्कि इसके माध्यम से बड़ी मात्रा में गैस बनाने के प्लान पर काम भी चल रहा है। हम सरकार द्वारा घोषित देश के 5वें सबसे स्वच्छ शहर डूंगरपुर के नगर परिषद चेयरमैन केके गुप्ता की बात कर रहे हैं। यह शहर के लिए उनके द्वारा की गईं पहलों का हिस्सा है।

 

डेली होती है 15 हजार रुपए की कमाई

गुप्ता ने moneybhaskar से बातचीत में कहा कि तीन साल पहले जब वह अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे, तो शहर में कचरे का निस्तारण बड़ी समस्या थी और इसके चलते शहर के बाहर कूड़े के पहाड़ खड़े होते जा रहे थे। डंपिंग की समस्या से शहर से कूड़े का उठान भी प्रभावित हो रहा था। ऐसे में उन्होंने कूड़े के निस्तारण के लिए उसमें बिकने योग्य मैटेरियल की छंटाई का काम शुरू किया। आज वह डेली 5-6 रुपए प्रति किलो की दर से वेस्ट की बिक्री डेली 15 हजार रुपए का रेवेन्यू हासिल कर रहे हैं। इस काम से भी उन्होंने ऐसे लोगों को जोड़ा, जो शहर की खूबसूरती के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे।

 

 

भिखारियों के सहारे बदली शहर की तस्वीर

गुप्ता कहते हैं कि उन्होंने कूड़े के निस्तारण के काम में शहर के भिखारियों और कूड़ा बीनने वालों को लगाया, जिससे उन्हें न सिर्फ रोजगार मिला बल्कि नगर परिषद की बड़ी मुश्किल आसान हो गई। वहीं उन्होंने कूड़े के दूसरे इस्तेमाल पर भी प्लान किया।

 

 

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खड़ा किया बायोगैस प्लांट

गुप्ता ने कहा कि सूखे कचरे के बाद उन्होंने गीले कचरे के निस्तारण भी शुरू कर दिया है। इसके लिए एक बायोगैस प्लांट लगाया गया है, जिससे मीथेन गैस का उत्पादन किया जा रहा है। इसे बायो गैस बर्निंग स्टोव में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

 

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डूंगरपुर को मिला बिल गेट्स का साथ

डूंगरपुर को दुनिया के दूसरे बड़े अमीर और माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स का भी साथ मिला है। बिल गेट्स की संस्था बिल एंड मिलिंडा ग्रुप ने स्वच्छता पर रिसर्च के लिए एशिया के 16 शहरों का चयन किया था। इस लिस्ट में डूंगरपुर सहित भारत के चार शहर भी शामिल है।

गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता अभियान से गत वर्षों की तुलना में शहर में मलेरिया,पीलिया जैसी बीमारियां 90 फीसदी तक कम हुई हैं। यूनिसेफ और डब्लयूएचओ ने डूंगरपुर को स्वस्थ जिला घोषित कर दिया है।


 

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